पांच साल से एक्सपायर लाइसेंस पर चल रहा था मेडिकल स्टोर, महिला ड्रग इंस्पेक्टर को रोका तो दुकान सील

पांच साल से एक्सपायर लाइसेंस पर चल रहा था मेडिकल स्टोर, महिला ड्रग इंस्पेक्टर को रोका तो दुकान सील

प्रेषित समय :18:20:24 PM / Sun, Oct 11th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ग्वालियर. दवाओं की बिक्री से जुड़े नियमों के पालन और मेडिकल स्टोर की वैधता की निगरानी में लापरवाही का मामला ग्वालियर में सामने आया है. संजीवन चिकित्सालय से जुड़े संजीवन मेडिकल्स का औषधि विक्रय लाइसेंस पांच साल से अधिक समय पहले समाप्त हो चुका था, इसके बावजूद दुकान में दवाओं का क्रय-विक्रय किए जाने की जानकारी सामने आई है. खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने मामले में कार्रवाई करते हुए फर्म के दोनों औषधि विक्रय लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए और परिसर को सील कर दिया. विभागीय आदेश के अनुसार, जांच पूरी होने तक मेडिकल स्टोर बंद रहेगा.

इस मामले में दूसरा महत्वपूर्ण पहलू औषधि निरीक्षक के निरीक्षण से जुड़ा है. विभागीय आदेश के मुताबिक, जांच के लिए पहुंचीं महिला ड्रग इंस्पेक्टर को दुकान में प्रवेश करने और आवश्यक दस्तावेजों की जांच करने से रोका गया. अधिकारी की पहचान बताने के बावजूद निरीक्षण नहीं होने देने और बाद में दुकान बंद कर दिए जाने का भी उल्लेख आदेश में किया गया है. इस घटनाक्रम ने दवा कारोबार की निगरानी और सरकारी निरीक्षण में सहयोग करने की जिम्मेदारी को चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

पांच साल पहले समाप्त हो गई थी लाइसेंस की वैधता

विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, संजीवन मेडिकल्स को जारी औषधि विक्रय लाइसेंस की वैधता 5 जून 2021 को समाप्त हो गई थी. इसके बावजूद दुकान में दवाओं की बिक्री जारी रहने का मामला सामने आया. विभाग ने इसे बिना वैध लाइसेंस के दवाओं का कारोबार करने से जुड़ा उल्लंघन माना.

औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और इसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार, दवाओं की बिक्री के लिए आवश्यक लाइसेंस और निर्धारित शर्तों का पालन करना जरूरी है. इसका उद्देश्य दवाओं के वितरण पर नियामकीय निगरानी बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि कारोबार निर्धारित मानकों के अनुरूप हो.

लाइसेंस की वैधता समाप्त होने के बाद भी कारोबार जारी रहने का मामला केवल दस्तावेजी अनियमितता तक सीमित नहीं है. इससे यह सवाल भी उठता है कि मेडिकल स्टोर के लाइसेंस की स्थिति की समय-समय पर जांच किस तरह की जाती है और वैधता समाप्त होने के बाद दुकान के संचालन पर रोक सुनिश्चित करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है.

निरीक्षण के लिए पहुंचीं अधिकारी को रोकने का आरोप

विभागीय आदेश के मुताबिक, 10 अक्टूबर 2026 को औषधि निरीक्षक नीलम भाभर संजीवन मेडिकल्स के औचक निरीक्षण के लिए पहुंची थीं. उस समय दुकान खुली थी और वहां स्टाफ दवाओं का क्रय-विक्रय कर रहा था.

आदेश में उल्लेख है कि निरीक्षण के लिए प्रवेश करने और लाइसेंस सहित संबंधित दस्तावेज मांगने पर संजीवन चिकित्सालय की डॉ. अर्चना गुप्ता और स्टाफ ने अधिकारी को रोक दिया. विभाग के अनुसार, औषधि निरीक्षक ने अपना परिचय और पहचान-पत्र भी दिखाया, लेकिन निरीक्षण नहीं होने दिया गया. इसके बाद दुकान बंद कर दी गई.

औषधि निरीक्षण का उद्देश्य दवाओं की बिक्री से जुड़े दस्तावेजों, लाइसेंस की वैधता और नियमों के पालन की जांच करना होता है. ऐसे निरीक्षणों के दौरान संबंधित प्रतिष्ठान से आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने और नियमानुसार सहयोग करने की अपेक्षा की जाती है.

हालांकि, अधिकारी को रोकने और निरीक्षण में बाधा डालने से संबंधित आरोप विभागीय आदेश में दर्ज विवरण पर आधारित हैं. मामले में संबंधित पक्षों का विस्तृत जवाब उपलब्ध नहीं है.

दोनों लाइसेंस निरस्त, परिसर पर लगाया ताला

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने मामले में कार्रवाई करते हुए संजीवन मेडिकल्स के दोनों औषधि विक्रय लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए. इसके साथ ही मेडिकल स्टोर परिसर को सील कर दिया गया है.

औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी अनुभूति शर्मा के अनुसार, जांच पूरी होने तक परिसर बंद रहेगा. संचालक को चेतावनी दी गई है कि इस अवधि में दुकान संचालित करने, दवाओं का क्रय-विक्रय करने या सील तोड़कर परिसर खोलने पर नियमानुसार न्यायालयीन कार्रवाई की जा सकती है.

विभागीय आदेश में सरकारी अधिकारी को कर्तव्य पालन से रोकने और शासकीय कार्य में बाधा डालने से संबंधित घटनाक्रम का भी उल्लेख किया गया है. इन तथ्यों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई का स्वरूप स्पष्ट होगा.

लाइसेंस निरस्त होने और परिसर सील किए जाने के बाद फिलहाल मेडिकल स्टोर का संचालन बंद रहेगा. आगे की स्थिति जांच के निष्कर्षों और संबंधित विभागीय या कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी.

मेडिकल स्टोर की निगरानी में रिकॉर्ड की नियमित जांच जरूरी

इस प्रकरण का व्यापक पहलू दवा दुकानों के लाइसेंस की वैधता और नियामकीय निगरानी से जुड़ा है. मेडिकल स्टोर में दवाओं की बिक्री एक नियंत्रित गतिविधि है, जिसके लिए संबंधित लाइसेंस और निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक होता है. लाइसेंस की समयसीमा समाप्त होने के बाद उसका नवीनीकरण या आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी करना कारोबार की जिम्मेदारी का हिस्सा है.

दवा दुकानों की नियमित जांच से लाइसेंस की स्थिति, दवाओं के भंडारण और बिक्री से संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल की जा सकती है. इसके अलावा, नियमानुसार निरीक्षण होने से अनियमितताओं की पहचान समय रहते संभव होती है. किसी प्रतिष्ठान के दस्तावेजों में कमी मिलने या निरीक्षण में बाधा आने पर संबंधित विभाग नियमों के अनुसार कार्रवाई कर सकता है.

इस मामले में लाइसेंस की वैधता समाप्त होने की तारीख और दुकान के संचालन से जुड़े विभागीय निष्कर्ष कार्रवाई के प्रमुख आधार बने हैं. साथ ही, निरीक्षण में कथित बाधा डालने का पहलू भी जांच के दायरे में है.

जांच के निष्कर्षों पर टिकी आगे की कार्रवाई

संजीवन मेडिकल्स के मामले में फिलहाल दोनों औषधि विक्रय लाइसेंस निरस्त हैं और परिसर सील है. विभाग ने जांच पूरी होने तक दुकान बंद रखने के निर्देश दिए हैं. आदेश के उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.

अब मामले में आगे की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच के दौरान लाइसेंस की स्थिति, दवाओं के कारोबार और निरीक्षण में कथित बाधा से जुड़े तथ्यों की पुष्टि किस प्रकार होती है. यह प्रकरण मेडिकल स्टोर संचालकों के लिए लाइसेंस की वैधता बनाए रखने और औषधि निरीक्षण के दौरान नियमानुसार सहयोग करने की जिम्मेदारी को भी रेखांकित करता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-