अवैध खनन मामला: भाजपा विधायक संजय पाठक की फर्म को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत नहीं, मुश्किलें बढ़ीं

अवैध खनन मामला: भाजपा विधायक संजय पाठक की फर्म को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत नहीं, मुश्किलें बढ़ीं

प्रेषित समय :15:25:38 PM / Sat, Oct 17th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सिहोरा तहसील के टिकरिया और प्रतापपुर में 2004 से 2017 के दौरान लौह अयस्क के कथित अतिरिक्त खनन मामले में भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़ी पार्टनरशिप फर्म पैसिफिक एक्सपोर्ट की याचिका खारिज कर दी है. सुमित अग्रवाल के संचालन वाली इस फर्म ने जबलपुर कलेक्टर द्वारा थमाए 81.73 करोड़ रुपए के मांग पत्र को चुनौती दी थी.

अधिवक्ता पंकज कुमार दुबे ने अदालत में हस्तक्षेप आवेदन प्रस्तुत किया था, जिस पर विचार करते हुए अदालत ने साफ किया कि खनिज नियमों के तहत ऐसी दंडात्मक कार्रवाई का पूर्ण अधिकार जिला कलेक्टर के पास सुरक्षित है. इससे पूर्व जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने 8 सितंबर 2026 को इसी प्रकरण से जुड़ी आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन की अर्जी भी निरस्त कर दी थी.

कलेक्टर को चार माह में अंतिम फैसला

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि खनिज अधिनियम के तहत जांच और वसूली की प्रक्रिया को पूरा करने का मूल क्षेत्राधिकार जिला दंडाधिकारी के पास सुरक्षित है. यदि फर्म को प्रस्तावित मांग या आकलन पर कोई तकनीकी आपत्ति है, तो वह अपना पक्ष सीधे कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत करे. खंडपीठ ने जिला प्रशासन को पूरी निष्पक्षता के साथ प्रकरण का अध्ययन कर आगामी 4 माह के भीतर विधिवत निराकरण करने की समय-सीमा तय की है.

सालों से टल रही पेशी पर जतायी नाराजगी

प्रशासन द्वारा 2025 से लगातार नोटिस जारी किए जा रहे थे, लेकिन फर्म के प्रतिनिधि समाधानकारक उत्तर देने अथवा व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित होने से कतराते रहे. इस टालमटोल पर ऐतराज जताते हुए न्यायिक पीठ ने कहा कि राजस्व प्रक्रिया को लंबे समय तक बाधित नहीं रखा जा सकता. पिछले 6 से 8 महीनों से अटकी फाइल पर अब त्वरित फैसला होगा, जिससे सरकारी खजाने को मिलने वाली वैधानिक राशि का बिना किसी देरी के समय पर सही मूल्यांकन हो सके.

अरबों के राजस्व पर टिकी नजरें

यह पूरा मामला सिहोरा क्षेत्र की खदानों में स्वीकृत सीमा से अधिक खुदाई करने से उपजा है, जिसमें संजय पाठक से जुड़ी विभिन्न कारोबारी इकाइयों से लगभग 443 करोड़ रुपए तथा उस पर देय जीएसटी की संयुक्त वसूली प्रस्तावित है. कुल 5 अलग-अलग प्रकरणों में से अब तक 2 प्रमुख फर्मों की याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं. शासन का मुख्य ध्येय प्राकृतिक संपदा के दुरुपयोग को रोककर जनहित के विशालकाय शासकीय राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-