144 घंटे जिंदगी के लिए जूझती रही मनीषा, मेडिकल कॉलेज में तोड़ा दम; परिवार की उम्मीदें मातम में बदलीं

144 घंटे जिंदगी के लिए जूझती रही मनीषा, मेडिकल कॉलेज में तोड़ा दम; परिवार की उम्मीदें मातम में बदलीं

प्रेषित समय :19:34:36 PM / Sat, Oct 17th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नगर प्रतिनिधि,जबलपुर. जिंदगी कभी-कभी इंसान को ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है, जहां परिवार की हर उम्मीद अस्पताल के बिस्तर पर टिकी होती है. अपनों की सलामती की आस में परिजन हर गुजरते पल के साथ बेहतर खबर का इंतजार करते हैं, लेकिन जब तमाम कोशिशों के बावजूद जिंदगी की जंग खत्म हो जाती है, तो पीछे रह जाती हैं यादें और अपूरणीय क्षति. जबलपुर के गोपालपुर में रहने वाली मनीषा भूमिया के परिवार के साथ भी ऐसा ही हुआ. जहरीले पदार्थ का सेवन करने के बाद मनीषा को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था. करीब छह दिन तक चले उपचार के दौरान परिवार को उनकी जिंदगी बचने की उम्मीद रही, लेकिन अंततः उन्होंने दम तोड़ दिया.

मनीषा की मौत की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. जिस महिला के स्वस्थ होकर घर लौटने की उम्मीद की जा रही थी, उसकी जगह अब परिजनों को अंतिम विदाई की तैयारी करनी पड़ी. घटना के कारणों को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है. पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है.

11 अक्टूबर की रात बिगड़ी मनीषा की तबीयत

भेड़ाघाट पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, गोपालपुर निवासी मनीषा भूमिया ने 11 अक्टूबर की रात घर पर किसी जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था. इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. हालत गंभीर होने पर परिजन उन्हें उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज शुरू किया गया.

परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन रहा होगा. अस्पताल में भर्ती मनीषा की सेहत को लेकर हर दिन नई उम्मीद के साथ इंतजार करना पड़ा. हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि जहरीले पदार्थ के सेवन की वजह क्या थी और किन परिस्थितियों में यह घटना हुई.

ऐसे मामलों में किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले घटना के सभी पहलुओं की जांच आवश्यक होती है. फिलहाल पुलिस भी इसी दिशा में आगे की कार्रवाई कर रही है.

छह दिन तक इलाज, फिर थम गईं सांसें

मनीषा को बचाने के लिए मेडिकल कॉलेज में उपचार किया जा रहा था. परिवार को उम्मीद थी कि उनकी हालत में सुधार होगा और वह स्वस्थ होकर घर लौटेंगी. लेकिन यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी. पुलिस के अनुसार, उपचार के दौरान देर रात करीब 1:30 बजे मनीषा की मृत्यु हो गई.

करीब 144 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद मनीषा की सांसें थम गईं. अस्पताल में चल रहा उपचार आखिरकार उनकी जिंदगी नहीं बचा सका. उनके निधन के बाद परिवार को गहरा सदमा पहुंचा.

हालांकि, इस दुखद घटना के पीछे की परिस्थितियों को लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है. यह भी स्पष्ट नहीं है कि जहरीले पदार्थ का सेवन किन कारणों से हुआ था. ऐसे में घटना को लेकर अटकलें लगाने के बजाय जांच के निष्कर्षों की प्रतीक्षा करना जरूरी है.

पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा

भेड़ाघाट पुलिस के अनुसार, शनिवार को मनीषा के देवर विजय भूमिया ने घटना की सूचना दी. विजय ने बताया कि वह मध्य प्रदेश विद्युत मंडल (एमपीईबी) में निजी नौकरी करते हैं. सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मर्ग कायम किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

पुलिस अब घटना से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की जांच कर रही है. जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण होगा कि जहरीले पदार्थ का सेवन कैसे और किन परिस्थितियों में हुआ. फिलहाल पुलिस की ओर से घटना के कारणों को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है.

गोहलपुर में युवक की मौत, पुलिस ने शुरू की जांच

इसी बीच, शहर के गोहलपुर थाना क्षेत्र के कुदवारी में एक अन्य दुखद घटना सामने आई. पुलिस के अनुसार, कुदवारी निवासी अंश केवट ने शुक्रवार रात फंदे से लटककर अपनी जान दे दी. घटना की जानकारी मिलने पर उन्हें चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.

पुलिस ने अंश का शव पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया है. इस मामले में भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है. उपलब्ध जानकारी में घटना के कारणों का उल्लेख नहीं है, इसलिए किसी विशेष वजह को उनकी मौत से जोड़ना उचित नहीं होगा.

दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं और उनके कारण भी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे. फिर भी, इन घटनाओं ने परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया है.

संवेदनशीलता और समय पर मदद की अहमियत

मनीषा की मौत की घटना एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है. किसी व्यक्ति के जीवन में चल रही परिस्थितियों और उसके मानसिक संघर्ष को बाहर से देखकर समझ पाना हमेशा संभव नहीं होता. इसलिए कठिन समय से गुजर रहे लोगों के प्रति संवेदनशीलता, संवाद और सहयोग महत्वपूर्ण हैं.

यदि कोई व्यक्ति गहरे तनाव, निराशा या भावनात्मक परेशानी से गुजर रहा हो, तो उसकी बात गंभीरता से सुनना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सहायता दिलाना जरूरी है. संकट की स्थिति में परिवार, मित्रों और समुदाय का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

फिलहाल गोपालपुर की मनीषा भूमिया और कुदवारी के अंश केवट की मौत के मामलों में पुलिस की जांच जारी है. दोनों घटनाओं से जुड़े वास्तविक कारण जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएंगे.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-