नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि भारतीय वायु सेना के विमान से प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं से जुड़े स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स का विवरण, सूचना के अधिकार कानून के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता. हाईकोर्ट ने कहा कि ये जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती, क्योंकि इस जानकारी के सामने आने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है या प्रधानमंत्री के जीवन और शारीरिक सुरक्षा को जोखिम में डाला जा सकता है. जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने कहा कि सुरक्षा कर्मियों के नाम और उनकी पहचान से जुड़ी जानकारी को हटा देने मात्र से, रिकॉर्ड के सार्वजनिक होने से पैदा होने वाले संभावित सुरक्षा जोखिम खत्म नहीं होंगे.
दरअसल, हाईकोर्ट भारतीय वायु सेना के एयर हेडक्वार्टर स्थित 'डायरेक्टोरेट ऑफ पर्सनल सर्विसेज के सेंट्रल पब्लिक इंफॉर्मेशन ऑफिसर द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इस याचिका में सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन (सीपीआईओ) के जुलाई 2020 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें सीपीआईओ को 'स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स' के रिकॉर्ड्स की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था.
ये रिकॉर्ड सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश के बत्रा ने मांगे थे. उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत एक आवेदन दायर करके पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 1 अप्रैल 2013 से 5 जून 2018 के बीच भारतीय वायु सेना के विमानों से की गई विदेश यात्राओं के बारे में जानकारी मांगी थी. वायु सेना ने सूचना के अधिकार कानून की धारा 8(1)(ए) और 8(1)(ई) के तहत मिलने वाली छूट का हवाला देते हुए, इन यात्राओं के रिकॉर्ड देने से इनकार कर दिया था.
सुनवाई के दौरान वायु सेना ने कहा कि इन रिकॉर्ड्स में संवेदनशील जानकारियां शामिल हैं, जिनमें यात्रियों का विवरण, विमान और चालक दल की जानकारी, उड़ान से जुड़े संदर्भ, यात्रियों की संख्या, एजेंसियों का विवरण और प्रधानमंत्री के सुरक्षा कर्मियों से जुड़ी जानकारी शामिल हैं. इसमें यह तर्क दिया गया कि भले ही सुरक्षाकर्मियों के नाम हटा दिए जाएं, फिर भी बाकी विवरणों को पब्लिक डोमेन में मौजूद जानकारी से जोड़कर प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था के कुछ पहलुओं का पता लगाया जा सकता है और सुरक्षा तैनाती के तरीकों का खुलासा किया जा सकता है.
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