आयुध निर्माणियों के कर्मचारियों का बड़ा फैसला, निगमों में स्थायी नौकरी से बनाई दूरी, केंद्र सरकार की सेवा को दी प्राथमिकता

आयुध निर्माणियों के कर्मचारियों का बड़ा फैसला, निगमों में स्थायी नौकरी से बनाई दूरी, केंद्र सरकार की सेवा को दी प्राथमिकता

प्रेषित समय :18:02:34 PM / Thu, Oct 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. देश की आयुध निर्माणियों में कार्यरत रक्षा असैनिक कर्मचारियों के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है. पूर्व आयुध निर्माणी बोर्ड के कर्मचारियों को केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने अथवा नए रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों में स्थायी संविलियन का विकल्प दिए जाने के बाद कर्मचारी संगठनों ने दावा किया है कि अधिकांश कर्मचारियों ने सरकारी सेवा में बने रहने को प्राथमिकता दी है. ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध विकल्प संबंधी आंकड़ों में बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने केंद्र सरकार का कर्मचारी बने रहने का विकल्प चुना है.

जबलपुर के लिए यह मामला विशेष महत्व रखता है, क्योंकि शहर देश के प्रमुख रक्षा उत्पादन केंद्रों में शामिल है. यहां आयुध निर्माणी खमरिया, गन कैरिज फैक्ट्री, व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर और ग्रे आयरन फाउंड्री जैसे प्रमुख रक्षा उत्पादन प्रतिष्ठान हैं. इन इकाइयों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए सेवा की शर्तें, पदोन्नति, वेतन, पेंशन और भविष्य की नौकरी की सुरक्षा महत्वपूर्ण विषय हैं.

कर्मचारी महासंघ ने 99 प्रतिशत से अधिक का दावा किया

ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन के अनुसार, देश की 41 आयुध निर्माणियों से संबंधित 59,318 रक्षा असैनिक कर्मचारियों में से 59,033 कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने का विकल्प चुना. संगठन ने बताया कि 123 कर्मचारियों ने सात नए रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों में स्थायी संविलियन का विकल्प चुना, जबकि 92 कर्मचारी विभिन्न कारणों से अपनी पसंद दर्ज नहीं करा सके.

महासंघ के इन आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने का विकल्प चुनने वाले कर्मचारियों का अनुपात 99.51 प्रतिशत बताया गया है. हालांकि, उपलब्ध संख्याओं का योग कुल कर्मचारियों की संख्या से मेल नहीं खाता. इसलिए इन आंकड़ों को संगठन की ओर से जारी जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए. अंतिम संख्या की पुष्टि के लिए संबंधित सरकारी विभाग का प्रमाणित विवरण आवश्यक है.

फेडरेशन के अध्यक्ष एसएन पाठक और महासचिव सी. श्रीकुमार ने इस घटनाक्रम को निगमीकरण की व्यवस्था के प्रति कर्मचारियों की असहमति का संकेत बताया है. संगठन की मांग है कि कर्मचारियों की पसंद का सम्मान किया जाए और केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने वालों के अधिकारों को सुरक्षित रखा जाए.

जबलपुर की चार प्रमुख आयुध निर्माणियों पर रहेगा असर

जबलपुर में रक्षा उत्पादन से जुड़ी चार प्रमुख आयुध निर्माणियां हैं, जिनकी भूमिका अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है. आयुध निर्माणी खमरिया में गोला-बारूद का उत्पादन किया जाता है. गन कैरिज फैक्ट्री तोपों और उनसे संबंधित उपकरणों के निर्माण के लिए जानी जाती है. व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर सेना के वाहनों के उत्पादन में भूमिका निभाती है, जबकि ग्रे आयरन फाउंड्री धातु ढलाई से संबंधित उत्पादन करती है.

इन प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों की सेवा व्यवस्था में होने वाले बदलाव का प्रभाव केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहता. इसका संबंध कर्मचारियों के परिवारों, स्थानीय बाजार, आवास, शिक्षा और शहर की औद्योगिक गतिविधियों से भी जुड़ा है.

इसी वजह से सरकारी सेवा में बने रहने और नए सार्वजनिक उपक्रमों में स्थायी रूप से शामिल होने का विकल्प जबलपुर के रक्षा कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है. हालांकि, जबलपुर की इन चार इकाइयों के कर्मचारियों ने अलग-अलग कितनी संख्या में कौन-सा विकल्प चुना, इसका प्रमाणित इकाईवार विवरण उपलब्ध होने पर ही स्थानीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

वर्ष 2021 में बदली थी आयुध निर्माणी बोर्ड की व्यवस्था

केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में तत्कालीन आयुध निर्माणी बोर्ड को समाप्त कर उसकी उत्पादन इकाइयों को सात नए रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों में पुनर्गठित करने का निर्णय लिया था. इस कदम का उद्देश्य रक्षा उत्पादन व्यवस्था में स्वायत्तता बढ़ाना, परिचालन दक्षता में सुधार करना और उत्पादन क्षमता को मजबूत करना बताया गया था.

पुनर्गठन के बाद पूर्व आयुध निर्माणी बोर्ड के कर्मचारियों को नए सार्वजनिक उपक्रमों से प्रतिनियुक्ति की मानी गई व्यवस्था के तहत जोड़ा गया. इस बदलाव के साथ कर्मचारियों के बीच वेतन, पदोन्नति, पेंशन और भविष्य की सेवा शर्तों को लेकर सवाल उठे.

कर्मचारी संगठनों ने मांग की कि संगठनात्मक बदलाव के कारण कर्मचारियों के मौजूदा अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए. उनका कहना रहा कि लंबे समय से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों को अपनी सेवा संबंधी स्थिति को लेकर स्पष्टता मिलनी चाहिए.

15 जून के सरकारी आदेश में क्या है प्रावधान

रक्षा उत्पादन विभाग ने 15 जून 2026 को पूर्व आयुध निर्माणी बोर्ड के कर्मचारियों के स्थायी संविलियन और प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था से संबंधित आदेश जारी किया. इसमें पात्र कर्मचारियों को नए रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों में स्थायी संविलियन का विकल्प देने की प्रक्रिया से जुड़ी व्यवस्था निर्धारित की गई.

आदेश के अनुसार, जो कर्मचारी नए सार्वजनिक उपक्रमों में स्थायी संविलियन का विकल्प नहीं चुनते, उनके लिए सेवानिवृत्ति तक प्रतिनियुक्ति की मानी गई व्यवस्था जारी रखने का प्रावधान है. इस अवधि में उन पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों से संबंधित लागू नियम और सेवा शर्तें प्रभावी रहेंगी.

इसका अर्थ यह है कि कर्मचारियों के लिए नए सार्वजनिक उपक्रमों में स्थायी रूप से शामिल होना अनिवार्य नहीं है. निर्धारित प्रक्रिया के तहत विकल्प चुनने वालों और सरकारी सेवा की व्यवस्था में बने रहने वालों की स्थिति अलग-अलग होगी.

हालांकि, इस व्यवस्था को समझते समय कर्मचारियों को संबंधित आदेश, लागू सेवा नियमों और अपने संवर्ग से जुड़े निर्देशों का अध्ययन करना चाहिए. स्थायी संविलियन और प्रतिनियुक्ति की मानी गई व्यवस्था के प्रशासनिक परिणाम अलग हो सकते हैं.

कर्मचारी संगठनों ने सेवा अधिकार सुरक्षित रखने की मांग की

फेडरेशन का कहना है कि कर्मचारियों की सेवा संबंधी स्थिति में स्पष्टता जरूरी है. संगठन चाहता है कि सरकारी सेवा में बने रहने वाले कर्मचारियों के वेतन, पदोन्नति, पेंशन, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य लाभों को लेकर अनिश्चितता न रहे.

जबलपुर की आयुध निर्माणियों में भी इन विषयों का सीधा महत्व है. कर्मचारियों के लिए सेवा सुरक्षा और भविष्य में मिलने वाले लाभों की स्पष्ट जानकारी आर्थिक नियोजन तथा परिवार की जिम्मेदारियों के लिहाज से आवश्यक है.

कर्मचारी संगठनों की मांग है कि सरकार कर्मचारियों की प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करे. साथ ही विकल्प प्रक्रिया के परिणामों और आगे लागू होने वाली व्यवस्था के संबंध में पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराई जाए.

अंतिम आंकड़ों और इकाईवार स्थिति पर रहेगी नजर

विकल्प प्रक्रिया के बाद कर्मचारियों की अंतिम संख्या, स्थायी संविलियन स्वीकार करने वालों का विवरण और सरकारी सेवा की व्यवस्था में बने रहने वालों की स्थिति महत्वपूर्ण होगी. फिलहाल महासंघ की ओर से जारी आंकड़ों और कुल कर्मचारियों की संख्या के बीच अंतर होने के कारण आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है.

जबलपुर के कर्मचारियों के लिए यह घटनाक्रम नौकरी की सुरक्षा, सेवा पहचान और भविष्य के लाभों से जुड़ा अहम विषय बना हुआ है. आने वाले समय में सरकारी विभाग की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले प्रमाणित आंकड़े और दिशा-निर्देश ही यह स्पष्ट करेंगे कि विकल्प प्रक्रिया के परिणाम क्या रहे और संबंधित कर्मचारियों की सेवा व्यवस्था किस प्रकार लागू होगी.

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि सरकारी आदेश में कर्मचारियों को स्थायी संविलियन और प्रतिनियुक्ति की मानी गई व्यवस्था में बने रहने के विकल्प दिए गए हैं. कर्मचारी महासंघ के दावों के अनुसार, अधिकांश कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने को प्राथमिकता दी है. इस दावे के अंतिम सत्यापन के लिए आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार रहेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-