सरकारी स्कूल में बड़ा एक्शन, प्राचार्य की 2 वेतनवृद्धि रोकने का प्रस्ताव; 5 शिक्षकों पर भी गिरी गाज

सरकारी स्कूल में बड़ा एक्शन, प्राचार्य की 2 वेतनवृद्धि रोकने का प्रस्ताव; 5 शिक्षकों पर भी गिरी गाज

प्रेषित समय :19:03:05 PM / Fri, Oct 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

  नगर प्रतिनिधि, जबलपुर. सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है. कुंडम विकासखंड के शासकीय हाईस्कूल तिलसानी में औचक निरीक्षण के दौरान सामने आई शैक्षणिक कमियों के बाद प्रभारी प्राचार्य और शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. पांच शिक्षकों की एक-एक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोक दी गई है, जबकि प्रभारी प्राचार्य की दो वेतनवृद्धियां रोकने का प्रस्ताव भोपाल स्थित लोक शिक्षण संचालनालय को भेजा गया है.

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के सीखने के स्तर, उपस्थिति और परीक्षा परिणामों में सुधार को लेकर विभागीय निगरानी पर जोर दिया जा रहा है. तिलसानी स्कूल का मामला अब केवल एक संस्था तक सीमित नहीं है. इसके माध्यम से विभाग ने स्कूलों के नियमित निरीक्षण और शिक्षकों की जवाबदेही को लेकर संभाग स्तर पर भी सख्ती के संकेत दिए हैं.

निरीक्षण में पढ़ाई से लेकर रिकॉर्ड तक मिली कमियां

मुख्यमंत्री जनविश्वास कार्यक्रम के दौरान 9 अक्टूबर को जबलपुर संभाग के संयुक्त संचालक लोक शिक्षण घनश्याम सोनी ने तिलसानी स्कूल का औचक निरीक्षण किया था. इस दौरान विद्यार्थियों की संख्या कम मिलने के साथ उनके शैक्षणिक स्तर में भी अपेक्षित सुधार नहीं पाया गया.

निरीक्षण में शिक्षकों की दैनिक डायरी और विद्यार्थियों की उपस्थिति से संबंधित अभिलेख अधूरे मिले. बच्चों को नियमित गृहकार्य देने और उनकी पढ़ाई की प्रगति पर ध्यान देने के मामले में भी कमियां सामने आईं. स्कूल परिसर की साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई.

इन बिंदुओं ने स्कूल में नियमित शैक्षणिक गतिविधियों और उनके मूल्यांकन की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए. विभागीय जांच में बोर्ड परीक्षा परिणामों में पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट का उल्लेख भी किया गया.

नोटिस के बाद जवाब संतोषजनक नहीं मिला

निरीक्षण के बाद 12 अक्टूबर को प्रभारी प्राचार्य अर्चना यादव सहित पांच शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे. संबंधित कर्मचारियों ने 17 अक्टूबर को अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया, लेकिन विभाग ने जवाबों को असंतोषजनक माना.

इसके बाद शिक्षक अशोक साहू, संगीत नोरोजी, गुलफिसा नूरी, ममता ठाकुर और रंजना प्रजापति की एक-एक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने का निर्णय लिया गया. प्रभारी प्राचार्य अर्चना यादव के मामले में दो वेतनवृद्धियां रोकने का प्रस्ताव आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल को भेजा गया है.

निगरानी करने वाले अधिकारी भी जवाबदेही के दायरे में

स्कूल की स्थिति के साथ विकासखंड स्तर पर निगरानी की कमी को भी गंभीरता से लिया गया है. क्षेत्रीय विकासखंड स्रोत समन्वयक और संबंधित जनशिक्षक को स्कूलों का नियमित निरीक्षण नहीं करने के संबंध में कड़ी चेतावनी दी गई है.

इस कदम का उद्देश्य केवल शिक्षकों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि निरीक्षण व्यवस्था को भी सक्रिय बनाना है. स्कूलों की शैक्षणिक स्थिति समय रहते सामने आए और कमियों को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें, इसके लिए पर्यवेक्षण अमले की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

संभाग के स्कूलों के लिए भी जारी हुए निर्देश

संयुक्त संचालक ने संभाग के जिला शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों और बीआरसीसी को पठन-पाठन की गुणवत्ता पर नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं. शिक्षकों को पाठ योजना तैयार रखने, शैक्षणिक अभिलेख अद्यतन करने और विद्यार्थियों की अकादमिक प्रगति का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने पर जोर दिया गया है.

निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों की उपस्थिति, स्कूल की स्वच्छता और दस्तावेजों की स्थिति का मौके पर सत्यापन करने के निर्देश भी दिए गए हैं.

अब पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार पर रहेगी नजर

तिलसानी स्कूल में हुई कार्रवाई के बाद महत्वपूर्ण सवाल यह है कि प्रशासनिक कदमों का असर कक्षाओं में पढ़ाई और विद्यार्थियों के प्रदर्शन पर कितना पड़ता है. वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई के साथ नियमित उपस्थिति, गृहकार्य, पाठ्यक्रम की प्रगति और परीक्षा परिणामों में सुधार भी अहम होंगे.

विभागीय निर्देशों के अनुसार अब स्कूलों की निगरानी और शैक्षणिक रिकॉर्ड की जांच पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. इससे यह परखने का अवसर मिलेगा कि कार्रवाई के बाद स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था कितनी सुधरती है और विद्यार्थियों को इसका कितना लाभ मिलता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-