नगर प्रतिनिधि,जबलपुर. पढ़ाई में अच्छे अंक हासिल करना ही सफलता की पूरी परिभाषा नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और सही लक्ष्य के साथ जीवन में आगे बढ़ना भी उतना ही जरूरी है. इसी संदेश के साथ शासकीय कन्या महाविद्यालय, रांझी में छात्राओं के व्यक्तित्व विकास पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया. स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने, लक्ष्य निर्धारित करने और नियमित दिनचर्या अपनाने के लिए प्रेरित किया गया.
कार्यक्रम में संभागीय मार्गदर्शक प्रो. अरुण शुक्ल मुख्य वक्ता रहे, जबकि अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. वीणा श्रीवास्तव ने की. प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. माधुरी सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया. व्याख्यान का केंद्र छात्राओं को किताबी ज्ञान के साथ जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करना रहा.
आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास से मिलेगी सफलता
मुख्य वक्ता प्रो. अरुण शुक्ल ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए खुद पर भरोसा रखना और लगातार प्रयास करना जरूरी है. उन्होंने लक्ष्य निर्धारित करने पर जोर देते हुए कहा कि जब व्यक्ति अपने उद्देश्य को लेकर स्पष्ट होता है, तो वह कठिन परिस्थितियों में भी रास्ता तलाश सकता है.
उन्होंने छात्राओं को अपनी आंतरिक क्षमताओं और गुणों को पहचानने की सलाह दी. उनके अनुसार, व्यक्ति की पहचान केवल बाहरी व्यक्तित्व से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार, विचारों और आचरण से बनती है. इसलिए विद्यार्थियों को अपने व्यक्तित्व को बेहतर बनाने के साथ भविष्य की योजनाओं पर भी गंभीरता से काम करना चाहिए.
समय प्रबंधन और अनुशासन पर दिया जोर
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. वीणा श्रीवास्तव ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के साथ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है. उन्होंने समय का सही उपयोग करने और दैनिक कार्यों को व्यवस्थित ढंग से पूरा करने की आदत विकसित करने की बात कही.
प्राचार्य ने अनुशासन को व्यक्तिगत विकास का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए छात्राओं को अपनी दिनचर्या में नियमितता लाने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि पढ़ाई के दौरान विकसित की गई अच्छी आदतें आगे चलकर करियर और जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी मददगार साबित होती हैं.
करियर के साथ व्यक्तित्व विकास भी जरूरी
कार्यक्रम में उपस्थित प्राध्यापकों ने भी छात्राओं को कॉलेज के समय का बेहतर उपयोग करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि महाविद्यालय का जीवन केवल परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है. यह वह समय है, जब विद्यार्थी अपनी रुचियों, क्षमताओं और भविष्य के करियर की दिशा को समझ सकते हैं.
व्यक्तित्व विकास के लिए संवाद कौशल, सकारात्मक सोच, जिम्मेदारी और नियमित अध्ययन जैसी आदतों को महत्वपूर्ण बताया गया. छात्राओं को अपने लक्ष्य के अनुरूप तैयारी करने और चुनौतियों से घबराने के बजाय उनसे सीखने के लिए प्रोत्साहित किया गया.
शिक्षकों की रही सहभागिता
कार्यक्रम में डॉ. बिंदु शर्मा, श्रीमती रेणुबाला घई, वीरेंद्र झरिया, श्रीमती कविता धुर्वे, डॉ. स्वीटी यादव और डॉ. दीपेंद्र यादव उपस्थित रहे. जनभागीदारी शिक्षक वर्ग से डॉ. नीलिमा रॉय, डॉ. अंकिता पांडे, डॉ. सपना श्रीवास्तव और कुमारी पूजा सेन ने भी सहभागिता की.
कार्यक्रम के अंत में प्रकोष्ठ की ओर से अतिथियों, शिक्षकों और छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया. व्याख्यान के माध्यम से छात्राओं को आत्मविश्वास, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास का महत्व समझाने का प्रयास किया गया.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

