दुबई. आसमान में उड़ते विमान के कॉकपिट में जानलेवा हमला, हजारों फीट नीचे गिरता विमान और यात्रियों की जिंदगी पर मंडराता खतरा. ऐसे भयावह हालात में अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देने वाले फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने सम्मानित किया है. विमान में सवार यात्रियों और क्रू सदस्यों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले कैप्टन और फ्लाइट एफजेड1073 के क्रू को फर्स्ट-क्लास ऑर्डर ऑफ जायद 2 से नवाजा गया. यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उनके साहस और जिम्मेदारी की सराहना की.
मंगलवार को राष्ट्रपति ने क्रू सदस्यों से मुलाकात की. इस दौरान दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम भी मौजूद रहे. दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने क्रू को सम्मान प्रदान किया. यूएई नेतृत्व ने मुश्किल परिस्थितियों में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और अपने कर्तव्य का निर्वहन करने के लिए उनकी प्रशंसा की.
यह घटना 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 में हुई थी. उड़ान के दौरान कॉकपिट में गंभीर हिंसक घटना के बाद विमान का नियंत्रण और यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई. हालात बिगडऩे पर विमान को सऊदी अरब के तबुक की ओर मोडऩा पड़ा. इस दौरान कैप्टन स्मित मच्छार गंभीर रूप से घायल हो गए.
द नेशनल को दिए एक इंटरव्यू में कैप्टन मच्छार ने बताया कि कॉकपिट का दरवाजा खोलने से पहले ही को-पायलट ने उन पर कई बार हमला कर दिया था. शुरुआत में उन्हें लगा कि विमान का कोई हिस्सा टूटकर उनके सिर पर गिरा है, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि उन पर उनकी ही टीम के एक सदस्य ने हमला किया है.
लगातार हमलों के कारण उनकी आंखों के सामने धुंधलापन छाने लगा था. उन्हें चीजें साफ दिखाई नहीं दे रही थीं और आसपास केवल धुंधली आकृतियां नजर आ रही थीं. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और सीट बेल्ट से खुद को छुड़ाकर हमले से बचने की कोशिश की.
गंभीर चोटों के बावजूद कैप्टन मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने वाले हैंडल तक पहुंचने की कोशिश की और अपने साथियों को आवाज लगाई. इसी दौरान वह बेहोश होकर कॉकपिट में गिर पड़े. उनकी हालत बेहद गंभीर थी, लेकिन दरवाजे तक पहुंचने और उसे खोलने की उनकी कोशिश आगे की कार्रवाई में अहम साबित हुई.
कैप्टन के मुताबिक, घटना के दौरान विमान करीब 17,000 फीट नीचे गिर गया था. सबसे भयावह क्षण वह था, जब उन्होंने विमान के इंजन बंद होने की आवाज सुनी और उसके प्रभाव को महसूस किया. ऐसी स्थिति में विमान को सुरक्षित संभालना बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन क्रू ने हिम्मत नहीं छोड़ी.
रिपोर्ट के मुताबिक, कैप्टन मच्छार कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे. इसके बाद अन्य क्रू सदस्यों और यात्रियों ने अंदर पहुंचकर को-पायलट को काबू किया. बताया गया कि को-पायलट ने कैप्टन पर कुल्हाड़ी से हमला किया था और विमान को नीचे गिराने की कोशिश की थी.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विमान से अपहरण संबंधी आपातकालीन संकेत भेजा गया. इसके बाद फ्लाइट की तबुक में आपातकालीन लैंडिंग कराई गई. विमान सुरक्षित उतर गया और उसमें सवार सभी 180 लोगों को बचा लिया गया. इस घटना ने दिखाया कि संकट की घड़ी में क्रू की सूझबूझ, साहस और त्वरित निर्णय कितनी जिंदगियां बचा सकते हैं.
इतने खतरनाक अनुभव से गुजरने के बावजूद कैप्टन मच्छार का विमानन के प्रति जुनून कम नहीं हुआ. द नेशनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस घटना ने उड़ान के प्रति उनके प्यार को खत्म नहीं किया है. उन्होंने कहा, क्या विमानन के लिए मेरा प्यार खत्म हो गया? बिल्कुल नहीं. बिल्कुल भी नहीं. मुझे बस इस बात की खुशी है कि मैं अपना फर्ज निभा पाया. उनके इन शब्दों से साफ झलकता है कि गंभीर चोटों और जानलेवा खतरे के बावजूद उनके लिए यात्रियों की सुरक्षा और अपने कर्तव्य का निर्वहन सबसे अहम रहा.
घटना के बाद दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान ने इलाज के दौरान कैप्टन मच्छार से मुलाकात की थी. उन्होंने कैप्टन के साहस, जिम्मेदारी और लोगों की जान बचाने के जज्बे की प्रशंसा की. शेख हमदान ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि कैप्टन मच्छार यूएई के उन मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनमें करुणा, शांति और इंसानी जिंदगी को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है. उन्होंने कहा कि देश को ऐसे लोगों पर गर्व है.
वहीं, इस्राइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने भी कैप्टन मच्छार को नागरिक वीरता के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार देने की घोषणा की है. इस तरह यूएई और इस्राइल, दोनों देशों की ओर से मिलने वाला सम्मान उनके साहस और कर्तव्यनिष्ठा की पहचान बन गया है. एक बेहद संकटपूर्ण स्थिति में यात्रियों की जान बचाने के उनके प्रयास ने उन्हें असाधारण वीरता की मिसाल बना दिया है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-


