शहरों में बढ़ते ट्रैफिक के बीच कार चलाना अब पहले जैसा आसान नहीं रह गया है. सुबह दफ्तर पहुंचने की जल्दी हो या शाम को घर लौटने का समय, सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें और बार-बार रुकने-चलने की स्थिति ड्राइविंग को थकाऊ बना देती है. ऐसे में मैनुअल कार चलाने वालों को लगातार क्लच दबाना और गियर बदलना पड़ता है. खासकर भीड़भाड़ वाले रास्तों पर यह काम परेशानी बढ़ा सकता है. यही वजह है कि अब कम बजट में कार खरीदने वाले ग्राहक भी ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन वाले विकल्प तलाश रहे हैं. आमतौर पर ऑटोमैटिक कारों को महंगा माना जाता है, लेकिन भारतीय बाजार में कुछ ऐसी हैचबैक भी मौजूद हैं, जिनके चुनिंदा ऑटोमैटिक वेरिएंट की शुरुआती कीमत पांच लाख रुपये के आसपास या उससे कम बताई गई है. इनमें मारुति एस-प्रेसो, रेनो क्विड, मारुति ऑल्टो K10, मारुति सेलेरियो और मारुति वैगनआर जैसे मॉडल शामिल हैं.
शहर के ट्रैफिक में क्यों उपयोगी है ऑटोमैटिक कार
शहरों में ड्राइविंग के दौरान सबसे अधिक परेशानी तब होती है, जब कार को कुछ मीटर चलाने के बाद बार-बार रोकना पड़ता है. मैनुअल ट्रांसमिशन में हर बार क्लच दबाकर गियर बदलना पड़ता है. लंबे ट्रैफिक जाम में यह प्रक्रिया चालक के पैरों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है. ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन यानी एएमटी इस परेशानी को काफी हद तक कम करता है.
एएमटी कार में गियर बदलने का काम सिस्टम अपने आप करता है. चालक को सामान्य परिस्थितियों में क्लच पैडल दबाने की जरूरत नहीं होती. इससे शहर के भीतर रुक-रुककर चलने वाले ट्रैफिक में कार चलाना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है. हालांकि एएमटी और पारंपरिक ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन की तकनीक अलग होती है. एएमटी में मूल रूप से मैनुअल गियरबॉक्स के साथ स्वचालित क्लच और गियर संचालन की व्यवस्था होती है.
कम बजट वाले खरीदारों के लिए यह तकनीक एक व्यावहारिक विकल्प बन सकती है. लेकिन कार चुनते समय केवल कीमत नहीं, बल्कि माइलेज, जगह, सुरक्षा सुविधाएं, सर्विस खर्च और अपने दैनिक इस्तेमाल को भी ध्यान में रखना जरूरी है.
1. मारुति एस-प्रेसो छोटी कार में ऑटोमैटिक का विकल्प
पांच लाख रुपये से कम बजट में ऑटोमैटिक कार तलाशने वालों के लिए मारुति एस-प्रेसो एक प्रमुख विकल्प है. दी गई जानकारी के अनुसार, इसकी शुरुआती कीमत 3.49 लाख रुपये से 4.64 लाख रुपये के बीच है. कंपनी इसके VXI (O) और VXI+ (O) जैसे चुनिंदा वेरिएंट में एएमटी का विकल्प देती है.
इसमें 1.0 लीटर पेट्रोल इंजन दिया गया है. एस-प्रेसो का ऊंचा डिजाइन और अपेक्षाकृत सीधी बैठने की व्यवस्था चालक को सड़क का बेहतर दृश्य देखने में मदद कर सकती है. संकरी सड़कों और शहर के भीतर पार्किंग की समस्या से जूझने वाले लोगों के लिए इसका कॉम्पैक्ट आकार उपयोगी साबित हो सकता है.
इस कार का एक आकर्षण इसका कम रखरखाव खर्च भी बताया जाता है. हालांकि खरीदने से पहले यह जांचना जरूरी है कि बताई गई शुरुआती कीमत किस वेरिएंट की है और एएमटी वेरिएंट की वास्तविक ऑन-रोड कीमत कितनी बैठेगी.
2. रेनो क्विड देती है अलग डिजाइन का विकल्प
मारुति के अलावा रेनो क्विड भी कम बजट की ऑटोमैटिक हैचबैक के रूप में विचार करने योग्य विकल्प है. इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 4.52 लाख रुपये से बताई गई है. इसमें 1.0 लीटर पेट्रोल इंजन के साथ एएमटी विकल्प उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है.
क्विड का डिजाइन सामान्य छोटी हैचबैक से कुछ अलग नजर आता है. इसका ऊंचा ग्राउंड क्लीयरेंस और चौड़ा स्टांस इसे खराब शहरी सड़कों पर उपयोगी बना सकता है. गड्ढों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरने वाले चालकों के लिए ग्राउंड क्लीयरेंस एक महत्वपूर्ण पहलू होता है.
कम गति पर एएमटी का इस्तेमाल शहर के ट्रैफिक में सुविधा दे सकता है. हालांकि कार खरीदने से पहले टेस्ट ड्राइव लेना जरूरी है, ताकि गियर बदलने के दौरान मिलने वाला अनुभव और सवारी का आराम अपनी जरूरत के मुताबिक जांचा जा सके.
3. मारुति ऑल्टो K10 छोटे परिवार और पहली कार खरीदने वालों के लिए
मारुति ऑल्टो K10 लंबे समय से बजट कार खरीदने वालों के बीच लोकप्रिय नाम रही है. इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 3.69 लाख रुपये से बताई गई है. इसके चुनिंदा ऊंचे वेरिएंट में एएमटी का विकल्प मिलता है. कार में 1.0 लीटर तीन सिलेंडर वाला पेट्रोल इंजन दिया गया है.
ऑल्टो K10 का सबसे बड़ा फायदा इसका कॉम्पैक्ट आकार है. संकरी गलियों, छोटे पार्किंग स्थानों और भीड़भाड़ वाले बाजारों में इसे संभालना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है. पहली बार कार खरीदने वाले लोगों के लिए भी इसका आकार और परिचित ड्राइविंग अनुभव उपयोगी साबित हो सकता है.
इसमें एयरबैग जैसे बुनियादी सुरक्षा फीचर्स उपलब्ध हैं. फिर भी खरीदारी के समय चुने गए वेरिएंट में मौजूद एयरबैग, एबीएस, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल और अन्य सुरक्षा सुविधाओं की पुष्टि जरूर करनी चाहिए. केवल शुरुआती कीमत देखकर निर्णय लेना उचित नहीं होगा, क्योंकि एएमटी वेरिएंट की कीमत अधिक हो सकती है.
4. मारुति सेलेरियो माइलेज और रोजमर्रा के इस्तेमाल पर जोर
मारुति सेलेरियो उन लोगों के लिए आकर्षक विकल्प हो सकती है, जिनकी प्राथमिकता शहर में आरामदायक ड्राइविंग के साथ ईंधन की बचत भी है. इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 4.69 लाख रुपये से बताई गई है. इसमें 1.0 लीटर पेट्रोल इंजन के साथ एएमटी विकल्प मिलता है.
सेलेरियो को बेहतर ईंधन दक्षता के लिए जाना जाता है. उपलब्ध जानकारी में इसके माइलेज को 26 किलोमीटर प्रति लीटर से अधिक बताया गया है. हालांकि वास्तविक माइलेज सड़क की स्थिति, ट्रैफिक, ड्राइविंग स्टाइल, कार के रखरखाव और एसी के इस्तेमाल जैसे कारकों पर निर्भर करता है. इसलिए कंपनी के प्रमाणित माइलेज और वास्तविक परिस्थितियों में मिलने वाले माइलेज के बीच अंतर समझना जरूरी है.
इसका केबिन चार वयस्क यात्रियों के लिए उपयोगी जगह उपलब्ध कराने के लिहाज से पेश किया जाता है. छोटे परिवार के दैनिक सफर, बाजार जाने और दफ्तर आने-जाने के लिए यह एक संतुलित विकल्प हो सकती है.
5. मारुति वैगनआर परिवार के लिए ज्यादा जगह का विकल्प
मारुति वैगनआर इस सूची में उन खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प है, जिन्हें छोटी कार के आकार में ज्यादा केबिन स्पेस चाहिए. इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 4.98 लाख रुपये से बताई गई है. कंपनी इसके 1.0 लीटर और 1.2 लीटर पेट्रोल इंजन वाले चुनिंदा वेरिएंट में एएमटी का विकल्प देती है.
वैगनआर का टॉल-बॉय डिजाइन इसकी पहचान है. ऊंची छत के कारण केबिन में सिर के ऊपर पर्याप्त जगह मिलती है. परिवार के साथ रोजाना सफर करने वालों और पीछे बैठने वाले यात्रियों के लिए यह उपयोगी हो सकती है. इसके अलावा मारुति का व्यापक सर्विस नेटवर्क और अपेक्षाकृत कम रखरखाव खर्च भी ग्राहकों के निर्णय को प्रभावित कर सकता है.
हालांकि पांच लाख रुपये से कम की बताई गई शुरुआती कीमत को एएमटी वेरिएंट की कीमत नहीं समझना चाहिए. ऑटोमैटिक मॉडल खरीदने के लिए संबंधित वेरिएंट की कीमत और उपलब्धता डीलर से जांचना जरूरी है.
खरीदने से पहले इन बातों की जांच जरूर करें
पांच लाख रुपये से कम बजट में ऑटोमैटिक कार खरीदने की योजना बनाते समय सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि दी गई कीमतें एक्स-शोरूम शुरुआती कीमतें हैं. इनमें आरटीओ शुल्क, बीमा, अन्य कर और अतिरिक्त विकल्प शामिल नहीं होते. इसके अलावा किसी मॉडल की शुरुआती कीमत अक्सर उसके मैनुअल वेरिएंट की हो सकती है, जबकि एएमटी वेरिएंट की कीमत अधिक रहती है.
इसलिए डीलर से ऑटोमैटिक वेरिएंट की अलग कीमत और ऑन-रोड खर्च का पूरा विवरण लेना चाहिए. टेस्ट ड्राइव के दौरान गियर बदलने की प्रतिक्रिया, ब्रेकिंग, स्टीयरिंग, सीटों का आराम और पीछे बैठने वालों के लिए उपलब्ध जगह को परखना भी जरूरी है.
सुरक्षा के मामले में एयरबैग की संख्या, एबीएस, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल और क्रैश टेस्ट से जुड़ी उपलब्ध जानकारी पर ध्यान दें. साथ ही सर्विस सेंटर की दूरी, नियमित सर्विस का खर्च और वारंटी की शर्तें भी जांचें.
कौन-सी कार किस जरूरत के लिए हो सकती है बेहतर
यदि प्राथमिकता सबसे कम शुरुआती कीमत और छोटी कार की सुविधा है, तो एस-प्रेसो और ऑल्टो K10 पर विचार किया जा सकता है. अलग डिजाइन और बेहतर ग्राउंड क्लीयरेंस की जरूरत हो तो रेनो क्विड विकल्प बन सकती है. माइलेज और रोजमर्रा के उपयोग के बीच संतुलन तलाशने वालों के लिए सेलेरियो उपयोगी हो सकती है, जबकि ज्यादा केबिन स्पेस चाहने वाले परिवार वैगनआर को देख सकते हैं.
कुल मिलाकर, पांच लाख रुपये से कम बजट में ऑटोमैटिक कार खरीदने का विकल्प तलाशना अब पहले की तुलना में आसान हुआ है. हालांकि सही चुनाव केवल मॉडल की लोकप्रियता या शुरुआती कीमत के आधार पर नहीं होना चाहिए. अपनी जरूरत, एएमटी वेरिएंट की वास्तविक कीमत, सुरक्षा सुविधाओं और कुल खर्च की तुलना करने के बाद ही फैसला लेना बेहतर होगा.
नोट: दिए गए स्रोत में कुछ कीमतें मॉडल की शुरुआती कीमत हैं, जरूरी नहीं कि वे ऑटोमैटिक वेरिएंट की हों. प्रकाशन से पहले संबंधित कंपनियों की वर्तमान वेरिएंट कीमत और उपलब्धता की पुष्टि कर लें.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

