जबलपुर. पश्चिम मध्य रेल प्रशासन ने यात्रियों और रेलकर्मियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए तीनों मंडलों में पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच कराई. 31 अक्टूबर से 6 नवंबर तक हुई जांच में अवशिष्ट क्लोरीन और बैक्टीरियोलॉजिकल विश्लेषण के कुल 1,610 नमूने लिए गए. राहत की बात यह रही कि सभी नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए.
इस अवधि में अवशिष्ट क्लोरीन के 1,538 और बैक्टीरियोलॉजिकल विश्लेषण के 72 नमूनों की जांच की गई. मंडलवार आंकड़ों के अनुसार, कोटा मंडल में अवशिष्ट क्लोरीन के 502 और बैक्टीरियोलॉजिकल विश्लेषण के 22, जबलपुर मंडल में क्रमशः 510 और 21 तथा भोपाल मंडल में 526 और 29 नमूनों का परीक्षण किया गया. सभी नमूने जांच में मानक स्तर पर पाए गए.
तीन स्तरों पर होती है पेयजल की जांच
पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अवशिष्ट क्लोरीन, बैक्टीरियोलॉजिकल और केमिकल एनालिसिस के माध्यम से परीक्षण किया जाता है. इससे पानी में क्लोरीन की आवश्यक मात्रा, बैक्टीरिया की मौजूदगी और रासायनिक तत्वों के स्तर का पता लगाया जाता है.
पश्चिम मध्य रेल मुख्यालय, तीनों मंडलों और दोनों कारखानों में जल स्रोतों, पानी की टंकियों, पाइपलाइनों एवं वाटर बूथों की नियमित सफाई और निगरानी की जाती है. जांच के दौरान किसी तरह की कमी मिलने पर संबंधित विभाग द्वारा सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है. रेल प्रशासन के अनुसार, यात्रियों और रेलकर्मियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है.
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