ग्वालियर CMHO पर हाईकोर्ट की बड़ी कार्रवाई, 3 लाख रुपए का जुर्माना; कोर्ट बोला- 'अपील खारिज कराने की सेटिंग थी'

ग्वालियर CMHO पर हाईकोर्ट की बड़ी कार्रवाई, 3 लाख रुपए का जुर्माना; कोर्ट बोला-

प्रेषित समय :18:22:58 PM / Sat, Nov 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ग्वालियर. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों की कार्यप्रणाली और लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताते हुए ग्वालियर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. एमएस सागर सहित संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों पर 3 लाख रुपए की कॉस्ट लगाई है. मामला कर्मचारी देवेंद्र सिंह परमार की सेवा समाप्ति से जुड़ा है, जिसमें राज्य शासन ने सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देने के लिए 329 दिन की देरी से अपील दाखिल की थी.

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने देरी के पीछे दिए गए कारणों को संतोषजनक नहीं माना. सुनवाई के दौरान अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अपील खारिज कराने की ही सेटिंग थी.

सरकारी खजाने से नहीं, अधिकारियों को भरना होगा जुर्माना

अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि 3 लाख रुपए की जुर्माना राशि सरकारी खजाने से जमा नहीं होगी, बल्कि संबंधित जिम्मेदार अधिकारी इसे अपनी जेब से भरेंगे. कोर्ट ने OIC को एक सप्ताह के भीतर पूरी राशि हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराने का आदेश दिया है.

साथ ही अदालत ने कहा कि यदि संबंधित अधिकारी इस राशि की भरपाई करना चाहते हैं तो शासन देरी के लिए जिम्मेदार अन्य अधिकारियों से समान अनुपात में इसकी वसूली कर सकता है.

329 दिन की देरी पर कोर्ट ने उठाए सवाल

मामले में राज्य शासन ने सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ रिट अपील दाखिल की थी, लेकिन यह अपील निर्धारित समय सीमा से 329 दिन बाद पेश की गई. देरी माफ कराने के लिए शासन की ओर से जो स्पष्टीकरण दिया गया, उससे डिवीजन बेंच संतुष्ट नहीं हुई.

कोर्ट ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आशंका जताई कि अपील जानबूझकर देर से दाखिल की गई, ताकि वह समय-सीमा के आधार पर खारिज हो जाए और पहले दिए गए न्यायिक निर्देशों से बचा जा सके.

1989 में हुई थी नियुक्ति, 2018 में खत्म कर दी सेवा

यह पूरा विवाद देवेंद्र सिंह परमार की नौकरी से जुड़ा है. जानकारी के मुताबिक, परमार की नियुक्ति वर्ष 1989 में रोजगार कार्यालय के माध्यम से एलडीसी (लोअर डिवीजन क्लर्क) के पद पर हुई थी. राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी ने भी उनकी नियुक्ति को वैध माना था.

इसके बावजूद विभाग ने मार्च 2016 में उन्हें नोटिस जारी किया और दिसंबर 2017 से जनवरी 2018 के बीच उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं. इसके खिलाफ परमार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था.

कर्मचारी के पक्ष में आया था सिंगल बेंच का फैसला

सेवा समाप्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने देवेंद्र सिंह परमार के पक्ष में फैसला सुनाया था. इसके बाद राज्य शासन ने इस फैसले को डिवीजन बेंच में चुनौती दी, लेकिन अपील दाखिल करने में 329 दिन की देरी हो गई.

प्रमुख सचिव को 30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही एक महीने के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) अदालत में पेश करने को कहा है.

मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को निर्धारित की गई है. अदालत के इस आदेश को सरकारी विभागों में प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-