122 साल पुराने मॉडल स्कूल को सांदीपनि बनाने से भड़का आक्रोश, पूर्व छात्र बोले, उत्कृष्ट विद्यालय की पहचान है

122 साल पुराने मॉडल स्कूल को सांदीपनि  बनाने से भड़का आक्रोश, पूर्व छात्र बोले, उत्कृष्ट विद्यालय की पहचान है

प्रेषित समय :18:12:06 PM / Mon, Nov 2nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर। एमपी के जबलपुर में 122 साल पुराने पंडित लज्जा शंकर झा मॉडल उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को सांदीपनि विद्यालय में परिवर्तित करने के प्रस्ताव का विरोध शुरू हो गया है। स्कूल के पूर्व विद्यार्थियों के संगठन मॉडेलियन परिवार ने इस कवायद पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।
                                 पूर्व छात्रों का कहना है कि विद्यालय की ऐतिहासिक पहचान, उत्कृष्ट विद्यालय का दर्जा और मेरिट आधारित प्रवेश व्यवस्था बरकरार रखी जाए। स्कूल को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने पर उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके लिए संस्था का मूल स्वरूप नहीं बदला जाना चाहिए। पंडित लज्जा शंकर झा मॉडल स्कूल की स्थापना वर्ष 1904 में हुई थी। यह संस्थान पिछले 122 वर्षों से शिक्षा और संस्कार के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाए हुए है। यहां से पढ़े विद्यार्थी प्रशासनिक, न्यायिक, चिकित्सा और इंजीनियरिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। मेरिट के आधार पर प्रवेश, परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन और अनुभवी शिक्षकों के योगदान ने स्कूल को विशिष्ट पहचान दिलाई है। मॉडेलियन परिवार भी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, छात्रवृत्ति और मार्गदर्शन देकर इस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। पूर्व विद्यार्थियों ने प्रस्ताव की आवश्यकता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जबलपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अधारताल पहले से ही सांदीपनि सीएम राइज विद्यालय के रूप में संचालित है। मॉडल स्कूल भी इसी विधानसभा क्षेत्र में है और दोनों संस्थानों के बीच की दूरी 5 किलोमीटर से कम है। ऐसे में एक ही क्षेत्र में इतने नजदीक दो संस्थानों को सांदीपनि स्वरूप में संचालित करने की आवश्यकता और 122 साल पुराने स्कूल की व्यवस्था बदलने का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए।
आधुनिक सुविधाओं का स्वागत, लेकिन पहचान बरकरार रहे-
मॉडेलियन परिवार के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे स्कूल के आधुनिकीकरण या बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के विरोध में नहीं हैं। सरकार चाहे तो विद्यालय में आधुनिक तकनीक, संसाधन और सुविधाएं बढ़ा सकती है। लेकिन इसके लिए उत्कृष्ट विद्यालय का प्रशासनिक ढांचा, चयन प्रक्रिया और ऐतिहासिक पहचान समाप्त नहीं की जानी चाहिए। पूर्व विद्यार्थियों और संस्था से जुड़े नागरिकों ने मुख्यमंत्री एवं स्कूल शिक्षा मंत्री से प्रस्ताव पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय लेने से पहले मॉडेलियन परिवार के प्रतिनिधियों का पक्ष सुना जाए और शासन इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करे। उनका कहना है कि विद्यालय की 122 साल पुरानी विरासत को सुरक्षित रखते हुए ही इसके भविष्य की योजना बनाई जानी चाहिए
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-