तवांग. अरुणाचल प्रदेश में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर 9 दिसम्बर को भारत और चीन के सैनिकों की झड़प हुई. तवांग सेक्टर में हुई इस झड़प में दोनों तरफ के कुछ सैनिकों के जख्मी होने की खबर है. इसके बाद दोनों ही पक्षों के सैनिक वहां से हट गए. दोनों सेनाओं के कमांडरों ने बातचीत से मामला सुलझा लिया. इस क्षेत्र में दोनों सेनाओं कुछ हिस्सों पर अपना-अपना दावा ठोकती आई हैं. 2006 से यह विवाद जारी है.
इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है भारत
केंद्र सरकार चीन के मंसूबों को स्थायी तौर पर काउंटर करने के लिए पूर्वोत्तर में 40 हजार करोड़ रुपए की लागत से फ्रंटियर हाईवे बनाने जा रही है. करीब 2 हजार किलोमीटर लंबा यह हाईवे अरुणाचल प्रदेश की लाइफ लाइन और चीन के सामने भारत की स्थायी ग्राउंड पोजिशन लाइन भी साबित करेगा. सामरिक महत्व की बात करें तो यह भारत-तिब्बत के बीच खींची गई सीमा रेखा मैकमोहन लाइन से होकर गुजरेगा. अंग्रेजों के विदेश सचिव हेनरी मैकमोहन ने इसे सीमा के तौर पर पेश किया था और भारत इसे ही असली सीमा मानता है जबकि चीन खारिज करता रहा है. इस हाइवे का निर्माण सीमा सड़क संगठन और नेशनल हाईवे अथॉरिटी मिलकर करेंगे. सेना लॉजिस्टिक सपोर्ट देगी. फ्रंटियर हाईवे तवांग के बाद ईस्ट कामेंग, वेस्ट सियांग, देसाली, दोंग और हवाई के बाद म्यांमार तक जाएगा.
चीन ने बदले थे 15 जगहों के नाम
पिछले साल, चीन ने अरुणाचल प्रदेश की सीमा से लगे क्षेत्र में 15 स्थानों के नाम चीनी और तिब्बती रख दिए थे. चीन की सिविल अफेयर्स मिनिस्ट्री ने कहा था- यह हमारी प्रभुसत्ता और इतिहास के आधार पर उठाया गया कदम है. यह चीन का अधिकार है.
दरअसल, चीन दक्षिणी तिब्बत को अपना क्षेत्र बताता है. उसका आरोप है कि भारत ने उसके तिब्बती इलाके पर कब्जा करके उसे अरुणाचल प्रदेश बना दिया. इसके पहले 2017 में चीन ने 6 जगहों के नाम बदले थे. चीन के इस कदम का भारत ने भी करारा जवाब दिया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा- अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है. नाम बदलने से सच्चाई नहीं बदलती. चीन ने 2017 में भी ऐसा ही कदम उठाया था. अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग था और हमेशा रहेगा.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के नजदीक अचानक गायब हुए 19 मजदूर, एक का मिला शव
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