दिल्ली. पूर्वी लद्दाख के गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स क्षेत्र में भारतीय सैनिकों और चीनी सैनिकों ने पीछे हटना शुरू कर दिया है. एक बयान में कहा गया है कि यह विकास भारत-चीन कोर कमांडर स्तर की बैठक के 16वें दौर में हुई सहमति के आधार पर हुआ है. गुरुवार को जारी एक संयुक्त बयान के अनुसार भारत चीन कोर कमांडर स्तर की बैठक के 16वें दौर में बनी आम सहमति के अनुसार गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स के क्षेत्र में भारतीय और चीनी सैनिकों ने समन्वित और नियोजित तरीके से विघटन करना शुरू कर दिया है, जो सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति के लिए अनुकूल है.
बयान के अनुसार, बैठक का 16वां दौर 17 जुलाई को चुशुल-मोल्दो सीमा पर हुआ था. इससे पहले माचज़् में बैठक हुई थी. जुलाई की बैठक में, दोनों पक्षों ने पिछले कई दौर की वाताज़् में हुई प्रगति से हटकर, पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी के साथ प्रासंगिक मुद्दों के समाधान के लिए रचनात्मक और दूरंदेशी तरीके से चर्चा जारी रखी.
इससे पहले चीनी सेना जून में गलवान में झड़प वाली जगह से पीछे हटी थी. लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बैठक में एलएसी के पास से सैनिकों की संख्या कम करने का फैसला लिया गया था. जिसके बाद चीन की तरफ कुछ वाहनों और सैनिकों को गलवान घाटी से वापस ले जाया गया है. 22 जून को चीनी पक्ष ने आश्वासन दिया था कि वे सैनिकों को फ्रंट एरिया से डेप्थ एरिया में भेजेंगे.
जानकारी के अनुसार 16वें दौर की बैठक के दौरान भारत ने सख्त लहजे में चीन से पूर्वी लद्दाख की सभी विवादित जगहों से सैनिकों को जल्द से जल्द हटाने की बात कही थी. ये बैठक करीब साढ़े 12 घंटे चली थी. भारत की ओर से इसमें लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता की अध्यक्षता में प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ था, जबकि चीन की ओर से साउथ झिंजियांग मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट चीफ मेजर जनरल यांग लिन की अध्यक्षता में वार्ता हुई थी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-लद्दाख में सेना का ट्रक 60 फीट नीचे श्योक नदी में गिरा, 7 की मौत, कई गंभीर राहत कार्य जारी
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