पलपल संवाददाता, जबलपुर. एमपी के जबलपुर में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अपात्र नर्सिंग कॉलेजों के स्टूडेंट्स को 30 दिन के भीतर पात्र कॉलेजों में ट्रांसफर करने के आदेश दिए है. नर्सिंग कॉलेज मान्यता फर्जीवाड़ा मामले की सीबीआई जांच में जिन कॉलेजों में छात्र नहीं मिले हैं. वो छात्र अपात्र होंगे व उन्हें एग्जाम में नहीं बैठाया जाएगा.
हाईकोर्ट ने नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता संबंधी ओरिजनल फाइलों को याचिकाकर्ता द्वारा अवलोकन के बाद रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए हैं. इसमें तुलनात्मक रूप से यह बताना होगा कि जो कॉलेज सीबीआई जांच में अपात्र पाए गए उन्हें आखिर किन हालात व किन-किन कमियों के होते हुए भी निरीक्षणकर्ता अधिकारियों द्वारा अनुमति दी गई. गौरतलब है कि नर्सिंग फर्जीवाड़ा केस में लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने जनहित याचिका दायर की थी. 28 मार्च को मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच के जस्टिस संजय द्विवेदी व जस्टिस अचल कुमार पालीवाल ने की थी.
हाईकोर्ट ने पहले भी प्रदेश के कॉलेजों की मान्यता की फाइलें तलब कर याचिकाकर्ता को अवलोकन करने के निर्देश दिए थे. जिसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट में प्रदेश में कागजों पर चल रहे कॉलेजों और फैकल्टी फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था. याचिकाकर्ता विशाल बघेल ने हाईकोर्ट में एक अन्य आवेदन पेश कर बताया कि नर्सिंग काउंसिल द्वारा अपात्र कॉलेजों के छात्रों को पात्र कॉलेजों में ट्रांसफर नहीं किया जा रहा है. जिससे हजारों छात्रों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है. अपात्र कॉलेजों के पास उन्हें पढ़ाने व प्रशिक्षण देने के लिए जरूरी संसाधन नहीं है. हाईकोर्ट ने इस मामले में आदेश दिए कि सीबीआई जांच में अपात्र पाए गए कॉलेजों में नामांकित छात्रों को 1 महीने के भीतर पात्र कॉलेजों में ट्रांसफर किया जाए. मामले में अगली सुनवाई अब 4 अप्रैल को होगी.
सीबीआई जांच में सही पाए गए छात्र ही परीक्षा दे पाएगें-
सीबीआई जांच में जिन कॉलेजों में स्टूडेंट्स नहीं मिले हैं. उन कॉलेजों के स्टूडेंट्स को एनरोलमेंट व परीक्षा में बैठने की पात्रता नहीं होगी. कई कॉलेजों ने सीबीआई जांच के दौरान कॉलेज में स्टूडेंट नहीं होने की जानकारी दी थी. कई कॉलेजों ने सीबीआई को एडमिशन के रिकॉर्ड दिखाने से इनकार कर दिया था. इसी आधार पर सीबीआई ने हाईकोर्ट में रिपोर्ट सौंपी थी. बाद में हाईकोर्ट ने छात्र हित में सभी पात्र-अपात्र व डिफिशिएंट कॉलेजों के स्टूडेंट्स का नामांकन कर परीक्षा में बैठाने के निर्देश दिए. तब सभी कॉलेज छात्रों के बैक डेट पर एडमिशन दर्शा कर एनरोलमेंट और परीक्षा में बैठाने के आवेदन करने लगे. वे कॉलेज भी छात्रों का एनरोलमेंट कराना चाहते हैं. जो सीबीआई जांच में वजूद में ही नहीं पाए गए. हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्क सुनने के बाद अपने पहले के आदेश में संशोधन करते हुए नए निर्देश दिए हैं. इस कारण अब कॉलेजों और छात्रों के एनरोलमेंट सीबीआई जांच रिपोर्ट के आधार पर ही किए जाएंगे.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-