जबलपुर। एक व्यक्ति पर पहले प्राणघातक हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल किया गया। इसके बाद उसी पीडि़त के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज करा दी गई। यहां तक कि पुलिस ने बिना जांच किए एफआईआर दर्ज कर ली। पीडि़त ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए बताया कि जिस समय आरोपियों के कहने पर मंडला पुलिस उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर रही थी। उस वक्त वह जबलपुर के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती जिंदगी और मौत से जूझ रहा था।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि गंभीर रूप से घायल याचिकाकर्ता 80 किलोमीटर दूर घटना को कैसे अंजाम दे सकता है। इस मामले की सुुनवाई में जस्टिस बीपी शर्मा की कोर्ट ने इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई मानते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया और आदेश की प्रति मंडला एसपी को भेजने के निर्देश दिए। जबलपुर के नयागांव में रहने वाले व्यापारी शंकर लाल ने मंडला में रहने वाले सैंटी बरमैया और कपिल साहू के खिलाफ कलेक्टर और एसपी से यह कहते हुए लिखित शिकायत की थी कि राजनीतिक संरक्षण में ये दोनों रेत चोरी कर अवैध व्यापार कर रहे हैं। इतना ही नहींए इसकी जब थाने में शिकायत की गई तो जान से मारने की धमकी दी गई। याचिकाकर्ता शंकर लाल 13 जनवरी 2025 को ड्राइवर और सुरक्षाकर्मी के साथ वापस जबलपुर आ रहे थे। इस दौरान बरेला के पास कपिल, सैंटी ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर पहले तो शंकर लाल की कार के सामने अपनी गाड़ी लगाकर रोकी और फिर उन पर प्राणघातक हमला कर दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी वहां से फरार हो गए। इधर मौके पर मौजूद ड्राइवर ने शंकर लाल को इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। जहां उनके सिर पर 40 से अधिक टांके लगे। शंकर लाल गुनानी पर शाम 6 बजकर 30 मिनट पर प्राणघातक हमला होता है। 14 जनवरी को कपिल साहू की मां मंडला जिले के बीजाडांडी थाने पहुंचकर याचिकाकर्ता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराती हैं कि 13 जनवरी की शाम 6 बजकर 20 मिनट पर शंकर लाल हथियारबंद बदमाशों के साथ घर आया। तोडफ़ोड़ करते हुए आगजनी की। जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गया। हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए रिकॉर्ड का गहन परीक्षण किया और पाया कि मध्यप्रदेश पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की हैए वह अविश्वसनीय और अस्वाभाविक है। कोर्ट ने कहा कि जिस समय शंकर लाल के द्वारा वारदात को अंजाम देना बताया जा रहा हैए उस समय अगर वो बीजाडांडी में था तो क्या 40 किलोमीटर दूर सिर्फ 10 मिनट में बरेला थाने के एकता चौक पहुंच गया। उन पर हमला भी हुआ। वारदात के बाद 13 जनवरी की रात याचिकाकर्ता के ड्राइवर और सुरक्षाकर्मी उन्हें इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती करवाया था। वकील संकल्प कोचर ने कोर्ट को बताया कि गंभीर रूप से घायल हालत में जब शंकर लाल को भर्ती कराया गया था। तब उनके सिर पर 40 से अधिक टांके लगाए गए थे। दो दिन तक उन्हें होश भी नहीं था। कोर्ट ने कहा कि बहुत ही हैरानी की बात है कि एक घायल व्यक्ति के खिलाफ 40 किलोमीटर दूर बीजाडांडी थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कानून का इस्तेमाल बदले की भावना के लिए नहीं किया जा सकता है। याचिकाकर्ता शंकर लाल के द्वारा दर्ज कराई एफआईआर का बदला लेने के लिए कराई गई है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी पाया कि जिस महिला ममता साहू ने शंकर लाल गुनानी के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराते हुए बताया था कि याचिकाकर्ता ने घटना को अंजाम देने के बाद खुद बताया था कि मेरा नाम शंकर लाल गुनानी है। कोर्ट ने इस पर भी हैरानी जताई और कहा कि वास्तव में कोई भी समझदार अपराधी गंभीर वारदात करते हुए अपनी पहचान और स्वयं अपना नाम उजागर नहीं करता है। महिला के द्वारा लगाए गए आरोपों को नाकाफी मानते हुए बीजाडांडी थाने में धारा 296, 351, 324, 326 के तहत दर्ज एफआईआर को निरस्त करे हुए आदेश की कॉपियां सीजेएम मंडला, एसपी मंडला व थाना प्रभारी बीजाडांडी को भेजने के निर्देश दिए गए। वारदात को एक साल बीत चुके हैं। हमला करने वाले आरोपी कपिल साहू और सैंटी बरमैया सहित अन्य साथी अभी भी फरार हैं।
ICUआईसीयू में भरती युवक पर वारदात का आरोप, हाईकोर्ट ने रद्द की FIR, कहा, पुलिस ने बदले की भावना से की है कार्रवाई
प्रेषित समय :14:55:02 PM / Mon, Jan 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर




