जबलपुर. मध्य प्रदेश में साइबर अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं और अब उनकी चपेट में वे लोग भी आ रहे हैं, जो आम नागरिकों को ऑनलाइन ठगी से बचने की सलाह देते हैं। जबलपुर से सामने आया ताजा मामला इस खतरे की गंभीरता को साफ तौर पर उजागर करता है, जहां शातिर साइबर ठगों ने एक महिला बैंक कर्मी को ही अपना निशाना बनाते हुए उसके मोबाइल फोन को हैक किया और बिना किसी ओटीपी के दो अलग-अलग बैंक खातों से कुल 6 लाख 15 हजार 955 रुपये निकाल लिए। यह मामला न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था और डिजिटल लेनदेन की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।
घटना जबलपुर के संजीवनी नगर थाना क्षेत्र की है। पीड़ित महिला की पहचान शिखा विक्रम के रूप में हुई है, जो उम्र करीब 40 वर्ष हैं और विजय नगर स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की गंगा नगर शाखा में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। शिखा विक्रम रोजमर्रा की तरह अपने काम में व्यस्त थीं और उन्हें इस बात का जरा भी अंदेशा नहीं था कि उनके मोबाइल और बैंक खातों के साथ इतनी बड़ी साजिश रची जा चुकी है। जानकारी के अनुसार, शिखा विक्रम ने 31 जनवरी को जब अपने मोबाइल फोन में मैसेज चेक किए, तो उनके होश उड़ गए। मैसेज बॉक्स में बैंक खातों से जुड़े कई ट्रांजेक्शन अलर्ट और ओटीपी संदेश मौजूद थे। ये संदेश 29 और 30 जनवरी के बीच के थे, जिनकी उन्हें पहले कोई जानकारी नहीं थी। जब उन्होंने अपने खातों का ब्योरा खंगाला, तो पता चला कि उनके एचडीएफसी बैंक खाते से 5 लाख 63 हजार 676 रुपये और एसबीआई खाते से 52 हजार 279 रुपये की राशि अनधिकृत रूप से ट्रांसफर हो चुकी है। सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि इन सभी लेनदेन के लिए शिखा विक्रम ने किसी भी प्रकार का ओटीपी साझा नहीं किया था। न तो उनके पास किसी कॉल के जरिए ओटीपी मांगा गया और न ही उन्होंने किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने की बात स्वीकार की है। इसके बावजूद इतनी बड़ी रकम खातों से निकल जाना, साइबर अपराधियों की तकनीकी क्षमता और नए-नए तरीकों की ओर इशारा करता है। पीड़िता का कहना है कि उन्होंने कभी भी अपनी बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड या ओटीपी किसी के साथ साझा नहीं किया। इसके बाद भी उनके दोनों खाते खाली हो गए। शुरुआती जांच में यह बात सामने आ रही है कि जालसाजों ने किसी तरीके से महिला बैंक कर्मी के मोबाइल फोन को हैक कर लिया था और उसी के जरिए खातों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बना ली। इसके बाद बिना ओटीपी के ही ट्रांजेक्शन को अंजाम दिया गया। मामले की जानकारी मिलते ही शिखा विक्रम ने संजीवनी नगर थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि यह एक गंभीर साइबर अपराध का मामला है और इसमें तकनीकी जांच के साथ-साथ बैंकिंग चैनलों के जरिए पैसे के ट्रेल को भी खंगाला जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर ठग अब सिर्फ फर्जी कॉल, लिंक या ओटीपी मांगने तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि वे मोबाइल हैकिंग, रिमोट एक्सेस और मैलवेयर जैसे आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे मामलों में कई बार पीड़ित को तब तक भनक नहीं लगती, जब तक खाते से पैसा निकल नहीं जाता। इस केस में भी यही देखने को मिला, जहां ट्रांजेक्शन के कई घंटे बाद पीड़िता को इसकी जानकारी मिली।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-




