मदन महल पहाड़ियों में दिखा उत्तरी अमेरिका का दुर्लभ विशाल मशरूम, मचा वैज्ञानिक हलचल

मदन महल पहाड़ियों में दिखा उत्तरी अमेरिका का दुर्लभ विशाल मशरूम, मचा वैज्ञानिक हलचल

प्रेषित समय :18:50:44 PM / Mon, Apr 20th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर। मदन महल की पहाड़ियों से एक ऐसी अनोखी और चौंकाने वाली खोज सामने आई है, जिसने न केवल स्थानीय प्रकृति प्रेमियों बल्कि वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों को भी उत्साहित कर दिया है। यहां शैल पर्ण उद्यान क्षेत्र में एक शौकिया फोटोग्राफर द्वारा उत्तरी अमेरिका में पाए जाने वाले दुर्लभ और विशाल आकार के मशरूम बोंडारजेविया बर्कलेई को देखा और कैमरे में कैद किया गया है। इस खोज को क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

                                                                                         जानकारी के अनुसार, जबलपुर निवासी और पेशे से सिविल इंजीनियर माधव नामदेव, जो एक सामाजिक संस्था के सदस्य भी हैं, हाल ही में मदन महल की पहाड़ियों में घूमने गए थे। प्रकृति और फोटोग्राफी के शौक के चलते वे इस क्षेत्र में अक्सर जाते रहते हैं। इसी दौरान उनकी नजर एक सूखे पेड़ के तने पर उगे एक असामान्य रूप से बड़े मशरूम पर पड़ी। उन्होंने देखा कि यह मशरूम न केवल आकार में बड़ा था बल्कि इसकी संरचना भी सामान्य मशरूमों से अलग थी। इसका फैलाव लगभग एक फीट से अधिक था और यह पेड़ के किनारे छाते की तरह फैला हुआ दिखाई दे रहा था। माधव नामदेव ने इस दुर्लभ दृश्य को अपने कैमरे में कैद किया और बाद में इसकी पहचान के लिए विशेषज्ञों से संपर्क किया। फोटो और प्रारंभिक अध्ययन के आधार पर यह पुष्टि हुई कि यह मशरूम बोंडारजेविया बर्कलेई प्रजाति का है, जो आमतौर पर उत्तरी अमेरिका के जंगलों में पाया जाता है और एशिया के कुछ ही हिस्सों में इसकी उपस्थिति दर्ज की गई है। भारत में इस प्रजाति का मिलना बेहद दुर्लभ माना जाता है, ऐसे में जबलपुर में इसका पाया जाना एक बड़ी वैज्ञानिक और पर्यावरणीय घटना के रूप में देखा जा रहा है। मदन महल की पहाड़ियां, जहां यह मशरूम पाया गया, पहले से ही अपनी जैव विविधता के लिए जानी जाती हैं। लगभग 1000 एकड़ में फैले इस क्षेत्र में काले रंग की चट्टानों के बीच सैकड़ों प्रकार के पेड़-पौधे, जीव-जंतु और पक्षी पाए जाते हैं। यह क्षेत्र स्थानीय और बाहरी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान किसी खजाने से कम नहीं है, जहां उन्हें विविध प्रकार के जीवों और वनस्पतियों को करीब से देखने का अवसर मिलता है। वनस्पति विशेषज्ञों के अनुसार, बोंडारजेविया बर्कलेई आमतौर पर ओक जैसे कठोर लकड़ी वाले पेड़ों के सूखे तनों या जड़ों पर उगता है। यह शुरुआत में परजीवी के रूप में पेड़ में सड़न उत्पन्न करता है, लेकिन पेड़ के मृत होने के बाद भी वहां विकसित होता रहता है। यह प्रक्रिया जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इससे लकड़ी का अपघटन होता है और मिट्टी को आवश्यक पोषक तत्व वापस मिलते हैं। इस दृष्टि से यह मशरूम केवल एक दुर्लभ प्रजाति ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला जीव भी है। हालांकि इस मशरूम को लेकर उत्साह का माहौल है, लेकिन विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि जंगलों में पाए जाने वाले कई मशरूम देखने में समान होते हैं, जिनमें कुछ जहरीले भी हो सकते हैं। ऐसे में बिना उचित जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह के किसी भी जंगली मशरूम का सेवन करना खतरनाक हो सकता है। हालांकि कुछ आदिवासी समुदाय इस प्रजाति के उपयोग और सेवन के पारंपरिक तरीके जानते हैं, साथ ही इससे कुछ देसी औषधियां भी तैयार की जाती हैं। इस खोज के बाद पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के महत्व को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मदन महल की पहाड़ियों जैसे क्षेत्रों को संरक्षित रखने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में भी इस तरह की दुर्लभ प्रजातियों की पहचान और अध्ययन संभव हो सके। यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जबलपुर का प्राकृतिक परिवेश अभी भी कई अनदेखे और अनजाने रहस्यों को अपने भीतर समेटे हुए है, जिन्हें समझने और संरक्षित करने की जरूरत है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-