जबलपुर में राज्य मछली महाशीर का शिकार, हाईकोर्ट ने लगाई रोक, कहा, अवैध खनन-शिकार से नर्मदा की जैव विविधता पर खतरा

जबलपुर में राज्य मछली महाशीर का शिकार, हाईकोर्ट ने लगाई रोक, कहा, अवैध खनन-शिकार से नर्मदा की जैव विविधता पर खतरा

प्रेषित समय :09:38:10 AM / Sat, May 16th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर। एमपी हाईकोर्ट ने नर्मदा नदी और आसपास के घाटों में हो रहे अवैध रेत खनन तथा महाशीर मछली के अवैध शिकार को लेकर सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने नर्मदा नदी सहित खिरहनी घाट क्षेत्र में अवैध खनन और मत्स्याखेट पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
                                  चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने मछुआरा कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग, कलेक्टर, एसपी, ईओडब्ल्यू, जिला माइनिंग अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। जबलपुर निवासी अभिषेक कुमार सिंह ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है। उन्होंने बताया कि नर्मदा नदी और खिरहनी घाट में बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन और महाशीर मछली का अवैध शिकार किया जा रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने दलील दी कि महाशीर को मध्यप्रदेश की राज्य मछली का दर्जा प्राप्त है, लेकिन इसके संरक्षण के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे। याचिका में कहा गया कि खासतौर पर ब्रीडिंग सीजन में महाशीर मछली का शिकार पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए। लगातार अवैध मत्स्याखेट और रेत खनन के कारण यह दुर्लभ प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर पहुंच रही है।
2011 में मिला था राज्य मछली का दर्जा-
याचिका के अनुसार वर्ष 2011 में मध्यप्रदेश सरकार ने महाशीर को राज्य मछली घोषित किया था, लेकिन संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासनिक लापरवाही के चलते इसका अवैध शिकार लगातार जारी है।
रेत चोरी और धमकी का भी आरोप-
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि खिरहनी घाट पर 6 मार्च 2025 को प्रशासन ने अवैध रेत भंडारण और मशीनें जब्त की थीं। जब्त सामग्री की सुपुर्दगी गांव के उपसरपंच राजेंद्र यादव को दी गई थी। आरोप है कि छतरी यादव और उसके भाई ने उपसरपंच को धमकाया और उसी रात जब्त की गई रेत चोरी कर ली। मामले में नामजद रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद पुलिस और माइनिंग विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। हाईकोर्ट की इस सख्ती को नर्मदा नदी की जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। खासतौर पर महाशीर जैसी दुर्लभ प्रजाति की सुरक्षा को लेकर यह आदेश दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।


 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-