नई दिल्ली. नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक प्रकरण को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में शामिल कुछ शिक्षकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों पर परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता बनाए रखने की जिम्मेदारी थी, उन्हीं में से कुछ लोगों ने अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया. उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मामले में “रक्षक ही भक्षक बन गए.”
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है. इसी बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा पुनर्परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें देशभर के 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने भाग लिया. परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना को समाप्त किया जा सके.
एक साक्षात्कार के दौरान शिक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने कुछ शिक्षकों और अधिकारियों पर भरोसा किया था, लेकिन कुछ लोगों ने उस भरोसे को तोड़ा. उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि योग्य और मेहनती विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है.
धर्मेंद्र प्रधान ने हाल के सप्ताहों में हुई छात्र आत्महत्याओं पर भी गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि जब भी किसी छात्र की आत्महत्या की खबर सामने आती है तो एक शिक्षा मंत्री के रूप में वे स्वयं को जिम्मेदार महसूस करते हैं. उन्होंने स्वीकार किया कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है और व्यवस्था में मौजूद कमजोरियों को दूर करना सरकार की जिम्मेदारी है. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों ने इस संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास किया है.
उल्लेखनीय है कि नीट-यूजी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आने के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने 3 मई को आयोजित परीक्षा को निरस्त कर दिया था. बाद में प्राप्त शिकायतों और प्रारंभिक जांच के आधार पर पुनर्परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया. जांच एजेंसियों को यह जानकारी मिली थी कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र से मिलते-जुलते प्रश्न कुछ समूहों तक पहुंच गए थे, जिसके बाद मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया.
मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो अब तक कई आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रश्नपत्र किस स्तर से लीक हुआ और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही. प्रारंभिक जांच में कुछ शिक्षकों के नाम भी सामने आए हैं, जिन पर परीक्षा की गोपनीय जानकारी बाहर पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं.
पेपर लीक प्रकरण और उससे उपजे विवाद ने देश की परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता तथा विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं. हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित एवं तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाया जाएगा. अब विद्यार्थियों और अभिभावकों की निगाहें जांच के अंतिम निष्कर्षों और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले सुधारात्मक कदमों पर टिकी हुई हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-




