शिक्षक भर्ती मामले में हाई कोर्ट से बड़ी राहत, अभ्यर्थियों को च्वाइस फिलिंग की अनुमति

शिक्षक भर्ती मामले में हाई कोर्ट से बड़ी राहत, अभ्यर्थियों को च्वाइस फिलिंग की अनुमति

प्रेषित समय :19:58:36 PM / Wed, Jun 24th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर। मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में हाई कोर्ट ने अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत प्रदान की है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं को च्वाइस फिलिंग प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति देते हुए स्पष्ट किया है कि फिलहाल उनके नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए जाएंगे। न्यायालय ने यह भी कहा है कि आगे की पूरी प्रक्रिया याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। इस आदेश से डेढ़ हजार से अधिक अभ्यर्थियों को राहत मिलने की संभावना है।

                                                                 मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ के समक्ष हुई। कोर्ट के सामने भोपाल निवासी प्रिया देव सहित अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिका पर विचार किया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रवीण कुमार वर्मा और डॉ. ज्योति वर्मा ने पक्ष रखते हुए कहा कि सभी अभ्यर्थी एक समान परिस्थितियों और विवाद से प्रभावित हैं। ऐसे में प्रत्येक अभ्यर्थी द्वारा अलग-अलग याचिकाएं दायर करना न केवल व्यावहारिक रूप से कठिन है बल्कि न्यायिक समय की दृष्टि से भी उचित नहीं होगा। अधिवक्ताओं ने न्यायालय को बताया कि सभी याचिकाकर्ताओं के हित और विवाद के बिंदु समान हैं, इसलिए उन्हें संयुक्त रूप से याचिका दायर करने की अनुमति दी जानी चाहिए। इस तर्क से सहमत होते हुए हाई कोर्ट ने संयुक्त याचिका दायर करने संबंधी आवेदन स्वीकार कर लिया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी तर्क रखा गया कि इसी प्रकार के एक अन्य मामले में हाई कोर्ट पहले ही अंतरिम राहत प्रदान कर चुका है। अधिवक्ता वर्मा ने न्यायालय का ध्यान डब्ल्यूपी क्रमांक 21474/2026 की ओर आकर्षित करते हुए बताया कि 19 जून 2026 को पारित आदेश में भी अभ्यर्थियों को राहत दी गई थी। उन्होंने आग्रह किया कि वर्तमान मामले में भी समान परिस्थितियों को देखते हुए समान राहत प्रदान की जाए। दलीलों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को च्वाइस फिलिंग प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दे दी। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि जब तक मामले का अंतिम निराकरण नहीं हो जाता, तब तक संबंधित अभ्यर्थियों के नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए जाएंगे। इस प्रकार न्यायालय ने एक ओर अभ्यर्थियों के अवसरों को सुरक्षित रखा है तो दूसरी ओर अंतिम निर्णय तक नियुक्ति प्रक्रिया को सीमित दायरे में रखने का निर्देश दिया है।मध्य प्रदेश शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रवीण नामदेव उपस्थित हुए। न्यायालय ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही मामले को चार सप्ताह बाद संबंधित याचिका के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। हाई कोर्ट के इस अंतरिम आदेश को शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें आगामी सुनवाई और न्यायालय के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं, जिससे भर्ती प्रक्रिया की आगे की दिशा तय होगी।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-