जबलपुर। मध्य प्रदेश भू-संपदा अपीलीय अधिकरण (रेरा) में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति विनोद कुमार द्विवेदी की अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति से लंबे समय से लंबित अपीलों के त्वरित निस्तारण की उम्मीद बढ़ गई है। नियमित अध्यक्ष के अभाव में प्रभावित हो रही अपीलीय प्रक्रिया अब गति पकड़ सकती है, जिससे फ्लैट खरीदारों, बिल्डरों और निवेशकों को समय पर न्याय मिलने का रास्ता साफ होने की संभावना है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियुक्ति से रेरा की अपीलीय व्यवस्था अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।
प्रदेश में रेरा द्वारा पारित आदेशों के खिलाफ दायर अपीलों का अंतिम निर्णय भू-संपदा अपीलीय अधिकरण ही करता है। हालांकि लंबे समय से अध्यक्ष का पद रिक्त रहने के कारण बड़ी संख्या में अपीलें लंबित थीं। कई मामलों में सुनवाई निर्धारित समय पर नहीं हो पा रही थी, जिससे न केवल विवादों का निपटारा टलता रहा बल्कि घर खरीदारों और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े पक्षों को भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा था। अब न्यायमूर्ति विनोद कुमार द्विवेदी के कार्यभार संभालने के बाद अधिकरण की कार्यप्रणाली में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। नियमित काज लिस्ट जारी होने, लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी आने और नए मामलों का समयबद्ध निराकरण होने की संभावना है। इससे न्यायिक प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी और अपीलों के निस्तारण में आ रही बाधाएं दूर हो सकेंगी।रियल एस्टेट क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि समय पर अपीलों का निपटारा होने से सबसे अधिक लाभ उन फ्लैट खरीदारों को मिलेगा, जो लंबे समय से अपने मामलों के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। वहीं बिल्डरों और निवेशकों को भी कानूनी विवादों के शीघ्र समाधान का लाभ मिलेगा, जिससे परियोजनाओं और निवेश से जुड़े निर्णयों में अनिश्चितता कम होगी। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि अनुभवी न्यायिक नेतृत्व मिलने से अधिकरण की कार्यक्षमता में सुधार होगा। निर्णय प्रक्रिया में निरंतरता आएगी और रेरा की नियामकीय व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक मजबूत एवं विश्वसनीय बनेगी। इससे रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी बढ़ावा मिलेगा। रेरा अपीलीय अधिकरण में नियमित अध्यक्ष की नियुक्ति को प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे लंबित अपीलों के शीघ्र निस्तारण, नियमित सुनवाई, समयबद्ध न्याय और नियामकीय व्यवस्था में सुधार की उम्मीद बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सुनवाई की प्रक्रिया इसी तरह व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ी तो रेरा पर घर खरीदारों, बिल्डरों और निवेशकों का विश्वास और मजबूत होगा, जिसका सकारात्मक प्रभाव पूरे रियल एस्टेट क्षेत्र पर देखने को मिलेगा।
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