जबलपुर। सदर स्थित जामा मस्जिद की वक्फ संपत्तियों के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं का बहुचर्चित मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड के सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि यदि याचिकाकर्ता 15 दिनों के भीतर नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करता है तो उस पर 60 दिनों के भीतर कारणयुक्त एवं विधिसम्मत निर्णय पारित किया जाए। न्यायालय ने इस निर्देश के साथ याचिका का निराकरण कर दिया।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ता मोहम्मद इदरीस ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि सदर बाजार स्थित जामा मस्जिद की वक्फ संपत्तियों तथा उनसे प्राप्त होने वाली आय के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं और कथित वित्तीय गड़बड़ियां हुई हैं। याचिका में यह भी मांग की गई थी कि वक्फ अधिनियम, 1995 की धाराओं 64, 65 और 67 के तहत संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाए तथा कथित अनियमितताओं की जांच कर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए जाएं। सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की ओर से न्यायालय को बताया गया कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन पर नियमानुसार विचार कर निर्णय लिया जाएगा। इस पर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि नया अभ्यावेदन निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रस्तुत किया जाता है तो सक्षम प्राधिकारी उसका परीक्षण कर 60 दिनों के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित करेगा, जिससे मामले का विधिसम्मत निराकरण हो सके। एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर भी हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि इस संबंध में याचिकाकर्ता के पास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 175(3) के तहत सक्षम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने अथवा निजी परिवाद प्रस्तुत करने का वैधानिक विकल्प उपलब्ध है। इसलिए एफआईआर दर्ज कराने संबंधी राहत के लिए उचित वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मुख्तार अहमद ने पक्ष रखा और वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर विस्तृत दलीलें प्रस्तुत कीं। वहीं राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता मुकुंद अग्रवाल तथा मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की ओर से अधिवक्ता उत्कर्ष अग्रवाल ने न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वक्फ बोर्ड को स्पष्ट निर्देश जारी किए। हाईकोर्ट के इस आदेश को वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और जवाबदेही से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कानूनी जानकारों का कहना है कि न्यायालय ने प्रशासनिक प्राधिकारी को निर्धारित समय सीमा में निर्णय लेने का निर्देश देकर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया है। साथ ही एफआईआर के संबंध में उपलब्ध वैधानिक उपायों का उल्लेख करते हुए न्यायालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि कानून में उपलब्ध वैकल्पिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए संबंधित पक्ष उचित राहत प्राप्त कर सकते हैं।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-





