जन्माष्टमी पर संस्कारधानी में उमड़ा आस्था का सैलाब, 51 झांकियों और शंखनाद से गूंजा शहर

जन्माष्टमी पर संस्कारधानी में उमड़ा आस्था का सैलाब, 51 झांकियों और शंखनाद से गूंजा शहर

प्रेषित समय :19:43:20 PM / Fri, Sep 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर शुक्रवार को संस्कारधानी जबलपुर भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर नजर आई. शहर के अलग-अलग हिस्सों में मंदिरों में विशेष पूजन-अर्चन के साथ धार्मिक कार्यक्रम हुए, वहीं श्री सनातन धर्म महासभा की ओर से निकाली गई ऐतिहासिक जन्माष्टमी शोभायात्रा ने शहर की सड़कों को कृष्णमय कर दिया. शोभायात्रा में 51 झांकियां शामिल रहीं और 51 बटुकों के शंख वादन से इसका शुभारंभ हुआ. रास्तेभर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही और भजन-कीर्तन की धुनों के बीच भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे गूंजते रहे.

श्री सनातन धर्म महासभा के तत्वावधान में निकाली गई 47वीं जन्माष्टमी शोभायात्रा शुक्रवार दोपहर दो बजे श्री सनातन धर्म तिराहा, पुराने मोटर स्टैंड से प्रारंभ हुई. शोभायात्रा के आरंभ का दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा. 51 बटुकों द्वारा एक साथ किए गए शंख वादन ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया. इसके बाद सजी-धजी झांकियों के साथ शोभायात्रा आगे बढ़ी. भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनकी लीलाओं से जुड़े विभिन्न प्रसंग झांकियों के माध्यम से प्रस्तुत किए गए.

शोभायात्रा में धार्मिक संस्थाओं के साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों की भी सहभागिता रही. गायत्री परिवार, श्रीरामलीला समिति गढ़ा, समरसता सेवा संगठन, चैतन्य महाप्रभु संकीर्तन मंडल, यादव समाज, साहू समाज, माहेश्वरी समाज और अग्रवाल समाज सहित अनेक संगठनों से जुड़े लोग इसमें शामिल हुए. करीब एक दर्जन भजन मंडलियों ने पूरे मार्ग में भक्ति गीतों और संकीर्तन से माहौल को भक्तिमय बनाए रखा. छह बैंड दलों के साथ दुलदुल घोड़ी भी शोभायात्रा का हिस्सा रही.

शहर के विभिन्न श्रीकृष्ण मंदिरों और धार्मिक स्थलों की झांकियों ने आयोजन को व्यापक स्वरूप दिया. श्री नरसिंह मंदिर गीता धाम, श्रीकृष्ण मंदिर गोरखपुर, श्रीराम मंदिर मदन महल, श्रीकृष्ण मंदिर छोटी ओमती, श्री जगदीश मंदिर गढ़ाफाटक, श्री गोपाल लालजी मंदिर, श्री गोपाल मंदिर घमापुर, श्री गीता मंदिर बाई का बगीचा, झूलेलाल मंदिर भरतीपुर और अन्नपूर्णा मंदिर निवाड़गंज सहित अनेक मंदिरों की झांकियां शोभायात्रा में शामिल हुईं.

शोभायात्रा अपने निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ते हुए तीन पत्ती चौक, मालवीय चौक, सुपर बाजार, गंजीपुरा, बड़ा फुहारा, कमानिया गेट, कोतवाली, मिलौनीगंज, गोपाल लालजी मंदिर, हनुमानताल और बड़ी खेरमाई से होते हुए त्रिमूर्ति मंदिर भानतलैया पहुंची. यहां धर्मसभा के साथ शोभायात्रा का समापन हुआ. पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने झांकियों का स्वागत किया और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ लगी रही.

जन्माष्टमी शोभायात्रा के स्वागत और सम्मान के लिए जवाहरगंज वार्ड स्थित बड़ा फुहारा और घमंडी चौक पर विशेष मंच बनाया गया था. यहां शोभायात्रा में शामिल संत-महंत, गणमान्य नागरिकों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, समाजसेवियों, आयोजकों और विभिन्न मंदिरों की झांकियों से जुड़े लोगों का सम्मान किया गया. धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक सहभागिता का यह स्वरूप भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा.

शोभायात्रा में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों की भी मौजूदगी रही. पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं विधायक लखन घनघोरिया, पूर्व मंत्री तरुण भनोत, जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष एडवोकेट मनीष मिश्रा, पूर्व विधायक एवं ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष संजय यादव, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश यादव, शहर कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ नाटी शर्मा, पूर्व विधायक विनय सक्सेना, वरिष्ठ कांग्रेस नेता बाबू विश्वमोहन, युवक कांग्रेस नेता अंकुर गुप्ता और नेता प्रतिपक्ष अमरीष मिश्रा सहित अनेक लोग कार्यक्रम में उपस्थित रहे.

जन्माष्टमी के अवसर पर केवल शहर की शोभायात्रा ही नहीं, बल्कि धार्मिक स्थलों पर भी विशेष आयोजन हुए. भेड़ाघाट स्थित हरे कृष्णा आश्रम में भगवान राधा-कृष्ण का अभिषेक, तुलसी पूजा, संकीर्तन और महाआरती का आयोजन किया गया. शाम 4:30 बजे हुए धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की. इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया.

हरे कृष्णा आश्रम में बच्चों के लिए मटकी फोड़ प्रतियोगिता भी आयोजित की गई. इससे धार्मिक आयोजन में बच्चों और परिवारों की सहभागिता बढ़ी. आश्रम को जन्माष्टमी के अवसर पर आकर्षक ढंग से सजाया गया था. संगमरमर की वादियों के बीच स्थित आश्रम का वातावरण धार्मिक उत्सव के अनुरूप दिखाई दिया.

आश्रम के व्यवस्थापक एवं नर्मदा महाआरती के संस्थापक डॉ. सुधीर अग्रवाल ने बताया कि जन्माष्टमी के अवसर पर भक्तों को वृंदावन धाम से पूजित मोर पंख प्रसाद स्वरूप वितरित किया गया. भगवान राधा-कृष्ण के दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं का आना दिनभर जारी रहा.

शहर में जन्माष्टमी के आयोजनों की खासियत यह रही कि धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक सहभागिता भी दिखाई दी. अलग-अलग समाजों, संस्थाओं, मंदिर समितियों और भजन मंडलियों की भागीदारी ने आयोजन को सामूहिक स्वरूप दिया. झांकियों में धार्मिक प्रसंगों के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं की झलक भी देखने को मिली.

51 झांकियों, 51 बटुकों के शंख वादन, भजन मंडलियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की सहभागिता ने जन्माष्टमी उत्सव को शहरव्यापी स्वरूप दिया. शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की मौजूदगी और धार्मिक नारों से शहर का वातावरण देर तक भक्तिमय बना रहा. परंपरा, आस्था और सामाजिक सहभागिता के इस संगम ने एक बार फिर जबलपुर की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को सामने रखा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-