जबलपुर. गुजरात हाई कोर्ट में लंबे न्यायिक अनुभव के बाद न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में जबलपुर स्थित मुख्यपीठ में कार्यभार संभाल लिया. हाई कोर्ट परिसर पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. इसके बाद महाधिवक्ता, न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों ने उनका अभिनंदन किया. न्यायमूर्ति कोगजे के सामने अब प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था के नेतृत्व की जिम्मेदारी है.
इससे एक दिन पहले गुरुवार को भोपाल के लोक भवन स्थित सांदीपनि सभागार में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई थी. समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित न्यायपालिका, प्रशासन और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. शपथ के अगले दिन जबलपुर पहुंचकर उन्होंने मुख्यपीठ का दायित्व संभाला.
वकालत से न्यायपालिका तक पहुंचा सफर
न्यायमूर्ति कोगजे ने वर्ष 1993 में विधि की पढ़ाई पूरी करने के बाद गुजरात में वकालत शुरू की. कानूनी क्षेत्र में अनुभव बढ़ने के साथ उन्हें सरकारी पक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी मिलीं. वर्ष 2001 में वे सहायक शासकीय अधिवक्ता नियुक्त हुए, जबकि 2002 में अतिरिक्त लोक अभियोजक की जिम्मेदारी संभाली.
इसी दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में सरकार की ओर से पैरवी की. गुजरात के चर्चित 2002 के गोधरा दंगा मामलों से जुड़े प्रकरणों में विशेष लोक अभियोजक के रूप में उनकी भूमिका भी रही. जटिल और संवेदनशील मामलों में पैरवी के इस अनुभव ने उनके न्यायिक करियर की मजबूत पृष्ठभूमि तैयार की.
2016 में न्यायाधीश की नई भूमिका
वकालत और अभियोजन के लंबे अनुभव के बाद न्यायमूर्ति कोगजे ने न्यायपालिका में प्रवेश किया. गुजरात हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में उन्होंने 6 अप्रैल 2016 को कार्यभार संभाला. करीब दो वर्ष बाद 15 मार्च 2018 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया.
गुजरात हाई कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की. कानूनी मामलों की गहरी समझ और न्यायिक अनुभव के साथ उन्होंने हाई कोर्ट में लंबे समय तक दायित्व निभाया.
कॉलेजियम की सिफारिश के बाद मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश महत्वपूर्ण रही. 31 अगस्त 2026 को कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति कोगजे के नाम की सिफारिश की थी. इसके बाद केंद्र सरकार की अधिसूचना के साथ उनकी नियुक्ति का रास्ता साफ हुआ.
भोपाल में शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने जबलपुर पहुंचकर मुख्यपीठ की जिम्मेदारी संभाल ली. इसके साथ ही मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के प्रशासनिक और न्यायिक नेतृत्व की नई पारी शुरू हो गई.
जबलपुर में आयोजित अभिनंदन समारोह में महाधिवक्ता और अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों ने न्यायमूर्ति कोगजे के लंबे न्यायिक अनुभव का उल्लेख करते हुए उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया. वक्ताओं ने उम्मीद व्यक्त की कि उनके अनुभव से प्रदेश की न्याय व्यवस्था को लाभ मिलेगा.
न्यायमूर्ति कोगजे ने स्वागत के लिए सभी का आभार व्यक्त किया. उनके आगमन के साथ हाई कोर्ट की मुख्यपीठ में न्यायिक कार्य के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी नई प्राथमिकताओं को लेकर अपेक्षाएं बढ़ी हैं.
सामने होंगी न्यायिक व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियां
मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति कोगजे के सामने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्य पीठ जबलपुर के साथ इंदौर और ग्वालियर खंडपीठों की न्यायिक व्यवस्था के नेतृत्व की जिम्मेदारी होगी. लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण, न्यायिक प्रशासन में बेहतर समन्वय और आम नागरिक के लिए न्याय प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाना प्रमुख विषयों में रहेंगे.
गुजरात में एक वकील के रूप में शुरू हुआ उनका सफर सरकारी अधिवक्ता और विशेष लोक अभियोजक की जिम्मेदारियों से होते हुए हाई कोर्ट के न्यायाधीश और अब मुख्य न्यायाधीश के पद तक पहुंचा है. शुक्रवार को जबलपुर में कार्यभार ग्रहण के साथ इस यात्रा ने मध्य प्रदेश में नया अध्याय शुरू किया है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-




