नई दिल्ली. देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून बुधवार को विदा हो गया, लेकिन इस बार बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी नीचे रहा. भारत में जून से सितंबर के दौरान कुल 759.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 12.6 प्रतिशत कम है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2001 के बाद यह देश का चौथा सबसे कम बारिश वाला मानसून सीजन रहा. कमजोर मानसून का असर देश के अलग-अलग हिस्सों में समान नहीं रहा. कुछ क्षेत्रों में बारिश सामान्य के आसपास रही, जबकि पूर्वोत्तर, पूर्वी और दक्षिणी प्रायद्वीपीय इलाकों के कई हिस्सों में बारिश की कमी दर्ज की गई.
मानसून की शुरुआत भी कमजोर रही थी और जून तथा जुलाई के शुरुआती हिस्से में बारिश सामान्य से काफी कम रही. इसके बाद जुलाई के अंतिम सप्ताह और अगस्त की शुरुआत में बारिश ने कुछ राहत दी, लेकिन यह सुधार ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सका. अगस्त के मध्य से फिर बारिश में कमी दर्ज की गई. अब मानसून की विदाई के बाद अक्टूबर में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया गया है, जिससे रबी फसलों की बुवाई और मिट्टी में नमी को लेकर चिंता बढ़ सकती है.
जून से ही कमजोर रहा मानसून
2026 के मानसून सीजन की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक मजबूत नहीं रही. जून और जुलाई के शुरुआती दिनों में बारिश सामान्य से काफी नीचे रही. एक समय साप्ताहिक बारिश की कमी 51.1 प्रतिशत तक पहुंच गई थी. 15 जुलाई को समाप्त हुए सप्ताह में यह सबसे बड़ा साप्ताहिक घाटा दर्ज किया गया.
जुलाई के अंतिम हिस्से में मानसून सक्रिय हुआ और अगस्त की शुरुआत में बारिश में सुधार दिखाई दिया. इससे कई क्षेत्रों में बारिश की कमी कुछ कम हुई, लेकिन यह स्थिति स्थायी नहीं रही. अगस्त के मध्य के बाद मानसून फिर कमजोर पड़ गया.
सितंबर में भी कई इलाकों में बारिश का वितरण असमान रहा. हालांकि महीने के अंतिम हिस्से में कुल कमी कुछ कम हुई, लेकिन सीजन के शुरुआती महीनों में हुई बारिश की भरपाई नहीं हो सकी.
देश में 759.4 मिलीमीटर बारिश
जून से सितंबर तक देश में कुल 759.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. यह सामान्य मानसूनी बारिश की तुलना में 12.6 प्रतिशत कम है. वर्ष 2001 के बाद के मानसून रिकॉर्ड में यह चौथा सबसे कम बारिश वाला सीजन रहा.
मानसून की यह कमी केवल बारिश की कुल मात्रा तक सीमित नहीं रही. देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश के वितरण में भी बड़ा अंतर देखने को मिला. यही वजह है कि कुछ क्षेत्रों में सामान्य परिस्थितियां बनी रहीं, जबकि कई राज्यों में बारिश की कमी का असर अधिक दिखाई दिया.
पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में सबसे ज्यादा कमी
क्षेत्रीय आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश सामान्य से 25 प्रतिशत कम रही. दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में 24 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में छह प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. इसके मुकाबले मध्य भारत में बारिश लगभग सामान्य रही और यहां केवल दो प्रतिशत की कमी दर्ज हुई.
राज्य और उपक्षेत्र स्तर पर भी बारिश की कमी काफी अलग रही. अरुणाचल प्रदेश में 44 प्रतिशत, असम और मेघालय में 39 प्रतिशत, बिहार में 32 प्रतिशत, पंजाब में 41 प्रतिशत, मराठवाड़ा में 39 प्रतिशत और केरल में 28 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई.
17 मौसम विज्ञान उपखंडों में कम बारिश
IMD के आंकड़ों के अनुसार मानसून सीजन के दौरान देश के 17 मौसम विज्ञान उपखंडों में बारिश सामान्य से कम रही. ये उपखंड देश के करीब 42 प्रतिशत क्षेत्र में फैले हुए हैं.
वहीं 18 उपखंडों, जो देश के लगभग 53 प्रतिशत क्षेत्र को कवर करते हैं, में बारिश सामान्य श्रेणी में रही. इससे स्पष्ट है कि पूरे देश में मानसून का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा. कुछ क्षेत्रों में सामान्य बारिश के बावजूद बड़े इलाकों में कमी दर्ज होने से राष्ट्रीय स्तर पर मानसून का आंकड़ा कमजोर रहा.
सितंबर में उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत को मिली राहत
सितंबर में बारिश का वितरण मानसून के शुरुआती महीनों से कुछ अलग रहा. इस दौरान उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि दक्षिणी प्रायद्वीप, पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में बारिश सामान्य से नीचे रही.
इस क्षेत्रीय अंतर का असर खेती और मिट्टी की नमी पर भी अलग-अलग रूप में पड़ सकता है. जिन इलाकों में मानसून के दौरान कम बारिश हुई है, वहां अक्टूबर में भी बारिश कम रहने की स्थिति किसानों के लिए चुनौती बढ़ा सकती है.
अक्टूबर में भी कम बारिश का अनुमान
मानसून की विदाई के बाद अब मौसम विभाग की नजर अक्टूबर पर है. IMD के अनुमान के मुताबिक अक्टूबर में देशभर में बारिश दीर्घकालिक औसत के 85 प्रतिशत से कम रह सकती है.
देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई गई है. हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है.
अक्टूबर से दिसंबर के पूरे तीन महीने की अवधि के लिए भी अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है. उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में इस दौरान सामान्य से अधिक बारिश की संभावना बनी हुई है.
अल नीनो की मजबूत होती स्थिति पर नजर
मौसम विभाग ने मौजूदा मौसम परिस्थितियों में अल नीनो की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया है. IMD के महानिदेशक एम. मोहापात्रा के अनुसार अल नीनो की स्थिति नवंबर में अपने चरम पर पहुंच सकती है और उसके बाद कमजोर होने की संभावना है.
अल नीनो की स्थिति और मानसून के कमजोर प्रदर्शन के बीच संबंध को लेकर मौसम वैज्ञानिक लगातार निगरानी कर रहे हैं. आने वाले महीनों में समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों के बदलाव का असर देश के मौसम पर पड़ सकता है.
सितंबर में गर्मी ने भी तोड़ा रिकॉर्ड
कम बारिश के साथ सितंबर में तापमान भी असामान्य रूप से अधिक रहा. देश का औसत अधिकतम तापमान 32.05 डिग्री सेल्सियस रहा, जो वर्ष 1901 के बाद सितंबर का सबसे अधिक औसत अधिकतम तापमान है.
औसत न्यूनतम तापमान 23.39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सितंबर के लिए चौथा सबसे अधिक रहा. वहीं सितंबर का औसत तापमान 27.72 डिग्री सेल्सियस रहा, जो वर्ष 1901 के बाद पांचवां सबसे अधिक है.
इससे स्पष्ट है कि इस बार मानसून के कमजोर रहने के साथ गर्मी का असर भी सामान्य से अधिक रहा.
अक्टूबर में भी सामान्य से अधिक तापमान की संभावना
IMD के अनुसार अक्टूबर में देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रह सकता है. पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों और मध्य तथा उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ अलग-अलग इलाकों में तापमान सामान्य रहने की संभावना है.
न्यूनतम तापमान भी देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है. हालांकि पूर्वोत्तर भारत के ज्यादातर हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम या सामान्य रह सकता है.
कम बारिश और अपेक्षाकृत अधिक तापमान का यह संयोजन मिट्टी में उपलब्ध नमी को प्रभावित कर सकता है.
रबी की बुवाई के लिए मिट्टी की नमी अहम
मानसून की कमी का असर खरीफ के बाद शुरू होने वाली रबी फसलों पर भी पड़ सकता है. कृषि क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक जिन इलाकों में मानसून के दौरान पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, वहां मिट्टी में नमी की कमी रबी की बुवाई की परिस्थितियों को प्रभावित कर सकती है.
विशेष रूप से वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में इसका असर अधिक हो सकता है. मध्य, दक्षिणी प्रायद्वीपीय, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में मानसून की कमी अधिक रही है, इसलिए इन क्षेत्रों में मिट्टी की नमी पर विशेष नजर रखनी होगी.
सितंबर में 48 प्रतिशत जिलों में बारिश सामान्य से कम
जिला स्तर के आंकड़े भी मानसून की असमान स्थिति की तस्वीर दिखाते हैं. सितंबर में देश के करीब 32 प्रतिशत जिलों में बारिश की कमी वाली स्थिति रही, जबकि 16 प्रतिशत जिले बड़ी कमी की श्रेणी में रहे.
इस तरह लगभग आधे जिलों में सितंबर के दौरान बारिश सामान्य से कम रही. अब अक्टूबर में भी कम बारिश के अनुमान के बीच इन क्षेत्रों में मिट्टी की नमी, जल उपलब्धता और रबी की तैयारियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा.
मानसून की विदाई के बाद नई चुनौती
2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून 12.6 प्रतिशत की कमी के साथ विदा हो चुका है. जुलाई में कुछ समय के लिए हुई बारिश की वापसी और सितंबर में उत्तर-पश्चिम तथा मध्य भारत में बेहतर बारिश के बावजूद शुरुआती कमी पूरी नहीं हो सकी.
अब अक्टूबर की बारिश और तापमान देश के लिए महत्वपूर्ण होंगे. यदि बारिश अनुमान के मुताबिक सामान्य से कम रहती है और तापमान भी अधिक बना रहता है तो कृषि क्षेत्रों में मिट्टी की नमी का संकट बढ़ सकता है. हालांकि इसका प्रभाव हर क्षेत्र में समान नहीं होगा और स्थानीय बारिश तथा सिंचाई सुविधाएं परिस्थितियों को काफी हद तक प्रभावित करेंगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-




