आयुष्मान मरीजों पर संकट, 8 अक्टूबर से निजी अस्पतालों ने इलाज बंद करने का किया ऐलान

आयुष्मान मरीजों पर संकट, 8 अक्टूबर से निजी अस्पतालों ने इलाज बंद करने का किया ऐलान

प्रेषित समय :19:17:55 PM / Mon, Oct 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नगर प्रतिनिधि, जबलपुर। आयुष्मान भारत-निरामयम योजना को लेकर जबलपुर के निजी अस्पतालों ने बड़ा ऐलान किया है। मध्य प्रदेश नर्सिंग होम एसोसिएशन की जबलपुर शाखा ने कहा है कि यदि उनकी मांगों और समस्याओं पर समय रहते उचित निर्णय नहीं हुआ तो 8 अक्टूबर से जिले के निजी अस्पताल आयुष्मान कार्ड से उपचार करना बंद कर देंगे। 
                               एसोसिएशन के अनुसार अस्पताल इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर पूर्ण हड़ताल में शामिल होंगे। अस्पताल संचालकों का कहना है कि योजना के संचालन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों का लंबे समय से समाधान नहीं हो पाया है, जिसका सीधा वित्तीय और प्रशासनिक प्रभाव निजी अस्पतालों पर पड़ रहा है। निजी अस्पतालों की प्रमुख शिकायत वैध अस्पताल दावों के भुगतान में देरी और लंबित बकाया राशि को लेकर है। एसोसिएशन का कहना है कि अस्पताल आयुष्मान योजना के पात्र मरीजों को उपचार उपलब्ध कराते हैं, लेकिन उपचार के बाद किए गए वैध दावों का भुगतान समय पर नहीं होने से अस्पतालों पर वित्तीय दबाव बढ़ता है। अस्पतालों का कहना है कि उपचार की लागत, कर्मचारियों का वेतन, दवाइयां, चिकित्सा उपकरण और अन्य जरूरी खर्च नियमित रूप से करना पड़ता है। ऐसे में यदि योजना के तहत किए गए दावों का भुगतान समय पर नहीं होता है तो इसका असर अस्पतालों की आर्थिक व्यवस्था पर पड़ता है।
एनएबीएच एक्रेडिटेशन अनिवार्य किए जाने पर सवाल-
निजी अस्पतालों नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फार हास्पिटल्स यानी एनएबीएच एक्रेडिटेशन को अनिवार्य किए जाने को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। एसोसिएशन का कहना है कि योजना में शामिल अस्पतालों के लिए एनएबीएच एक्रेडिटेशन अनिवार्य करने के कानूनी और नीतिगत आधार पर स्पष्टता आवश्यक है। एसोसिएशन के अनुसार इस मुद्दे को लेकर प्रदेश के हेल्थ कमिश्नर के साथ चर्चा चल रही है। अस्पताल संचालक चाहते हैं कि एनएबीएच की अनिवार्यता से जुड़े नियम, उसकी प्रक्रिया और अस्पतालों पर पडऩे वाले प्रभाव को लेकर स्पष्ट नीति सामने रखी जाए।
अस्पतालों की सुरक्षा भी प्रमुख मुद्दा-
निजी अस्पतालों ने केवल भुगतान और एक्रेडिटेशन को ही मुद्दा नहीं बनाया है, बल्कि अस्पतालों की सुरक्षा को भी प्रमुख विषय बताया है। एसोसिएशन का कहना है कि योजना में काम करने वाले अस्पतालों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। इसके साथ ही अस्पतालों पर किसी प्रकार की कार्रवाई या विवाद की स्थिति में नियमों के अनुरूप निष्पक्ष व्यवस्था होनी चाहिए। अस्पताल संचालकों का कहना है कि योजना में शामिल संस्थानों के साथ समान और पारदर्शी व्यवहार होना चाहिए और नियमों का पालन करने वाले अस्पतालों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
शिकायतों के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष व्यवस्था की मांग-
निजी अस्पतालों ने वैध शिकायतों के निपटारे के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष व्यवस्था की मांग भी उठाई है। एसोसिएशन का कहना है कि योजना से जुड़े अस्पतालों को यदि किसी दावे, भुगतान या अन्य प्रक्रिया को लेकर शिकायत है तो उसके समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। अस्पताल संचालकों का मानना है कि पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली से अस्पतालों और योजना के संचालन से जुड़े विभागों के बीच विवादों को समय पर सुलझाया जा सकता है। इसके साथ ही नियमों का पालन करने वाले अस्पतालों को अनावश्यक परेशानी से बचाने की जरूरत है।
छह प्रमुख मुद्दों पर अस्पताल एकजुट-
मध्य प्रदेश नर्सिंग होम एसोसिएशन जबलपुर शाखा के अनुसार जिले में एसोसिएशन से जुड़े 111 निजी अस्पताल हैं और सभी अस्पताल प्रमुख छह मुद्दों को लेकर एकमत हैं। एसोसिएशन ने इन मुद्दों को आयुष्मान योजना के प्रभावी संचालन और अस्पतालों की कार्यप्रणाली से सीधे जुड़ा बताया है। अस्पतालों का कहना है कि वे आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भागीदार हैं। उनका उद्देश्य योजना का विरोध करना नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करना है, जिसमें मरीजों को समय पर उपचार मिले और अस्पतालों को भी नियमों के अनुरूप किए गए कार्य का भुगतान समय पर प्राप्त हो।
प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग को बताई समस्याएं-
एसोसिएशन ने दावा किया कि अस्पतालों की विभिन्न चिंताओं से प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग को अवगत कराया जा चुका है। अस्पताल प्रतिनिधियों की ओर से संबंधित अधिकारियों के साथ इन विषयों पर चर्चा भी की जा रही है। एसोसिएशन का कहना है कि यदि सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से समस्याओं का उचित समाधान किया जाता है तो अस्पताल योजना के तहत मरीजों को सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं। लेकिन यदि समय रहते मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो 8 अक्टूबर से आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।

इमरजेंसी सेवाएं रहेंगी जारी-
निजी अस्पतालों की प्रस्तावित हड़ताल में इमरजेंसी सेवाओं को अलग रखा गया है। एसोसिएशन के अनुसार 8 अक्टूबर से निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत उपचार बंद करने के साथ इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर हड़ताल में शामिल रहेंगे। इसका मतलब यह होगा कि आयुष्मान कार्ड लेकर सामान्य उपचार या नियोजित इलाज के लिए निजी अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि एसोसिएशन ने आपातकालीन सेवाओं को जारी रखने की बात कही है।
आइएमए और मेडिकल कॉलेज टीचर एसोसिएशन के समर्थन का दावा
एसोसिएशन ने दावा किया कि निजी अस्पतालों की प्रस्तावित हड़ताल को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और मेडिकल कॉलेज टीचर एसोसिएशन का भी समर्थन हासिल है। इससे आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलने का दावा किया गया है। जबलपुर में आयोजित प्रेसवार्ता में मध्य प्रदेश नर्सिंग होम एसोसिएशन जबलपुर शाखा के अध्यक्ष डॉ. अमरेंद्र पांडे सहित अन्य चिकित्सकों ने अस्पतालों की समस्याओं को सामने रखा। प्रेसवार्ता के दौरान डॉ. अमित गौर, डॉ. जतिन धीरावाणी, डॉ. मुकेश श्रीवास्तव, डॉ. स्पर्श नायक और डॉ. अभिजीत मुखर्जी सहित अन्य चिकित्सक उपस्थित रहे।
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की बात-
निजी अस्पतालों की ओर से कहा गया कि आयुष्मान भारत-निरामयम योजना के लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में निजी अस्पताल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अस्पतालों का उद्देश्य योजना के संचालन को बाधित करना नहीं, बल्कि इसे सुचारू और प्रभावी तरीके से लागू कराना है। एसोसिएशन का कहना है कि अस्पतालों की समस्याओं का समाधान होने पर योजना के तहत मरीजों को सेवाएं उपलब्ध कराने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। इसके लिए भुगतान व्यवस्था को समयबद्ध बनाने, नियमों में स्पष्टता लाने, अस्पतालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और शिकायतों के समाधान के लिए निष्पक्ष व्यवस्था की जरूरत है।
8 अक्टूबर पर टिकी निगाहें-
अब सभी की नजर 8 अक्टूबर पर है। इससे पहले यदि स्वास्थ्य विभाग और सरकार की ओर से निजी अस्पतालों की मांगों पर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है तो प्रस्तावित हड़ताल टल सकती है। वहीं यदि मांगों पर सहमति नहीं बनी तो जबलपुर सहित प्रदेश के निजी अस्पताल आयुष्मान कार्ड से उपचार बंद करने की घोषणा पर आगे बढ़ सकते हैं। ऐसी स्थिति में आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को निजी अस्पतालों में सामान्य उपचार कराने में परेशानी हो सकती है। हालांकि निजी अस्पतालों ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित हड़ताल के दौरान इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी। अब सरकार और निजी अस्पतालों के बीच होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि 8 अक्टूबर से आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों में उपचार व्यवस्था सामान्य रहती है या फिर मरीजों को नई व्यवस्था का सामना करना पड़ता है।
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-