नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के निर्माण में गुणवत्ता संबंधी खामियों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने ठेकेदार कंपनियों के साथ निगरानी व्यवस्था की जवाबदेही बढ़ाने की तैयारी की है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में सामने आई कमियों के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। इस कवायद में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाली परियोजनाओं में अनुबंध की शर्तों, निर्माण की प्रगति और गुणवत्ता की निगरानी सुनिश्चित करना उसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।
हालांकि, NHAI की भूमिका को ठेकेदार की जिम्मेदारी से अलग समझना जरूरी है। निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार पूरा करना ठेकेदार या संबंधित परियोजना कंपनी का दायित्व होता है। वहीं, परियोजना के अनुबंध और कार्यान्वयन मॉडल के अनुसार NHAI तथा नियुक्त इंजीनियरों और निगरानी एजेंसियों को यह देखना होता है कि काम तय शर्तों और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं। किसी गंभीर खामी की स्थिति में संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच कर नियमों के अनुसार जवाबदेही तय की जा सकती है।
NHAI की भूमिका क्या है
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, रखरखाव और प्रबंधन से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जिन परियोजनाओं का क्रियान्वयन उसके माध्यम से होता है, उनमें प्राधिकरण अनुबंध के अनुसार परियोजना की निगरानी, निर्धारित मानकों के पालन और निर्माण संबंधी दायित्वों के अनुपालन को सुनिश्चित करने में भूमिका निभाता है।
परियोजना के स्वरूप के आधार पर निर्माण कार्य ठेकेदार, रियायतग्राही कंपनी या अन्य अधिकृत एजेंसी के माध्यम से कराया जा सकता है। ऐसे में NHAI की जिम्मेदारी केवल सड़क बनवाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसे अनुबंध में निर्धारित निगरानी और अनुपालन व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने की भी जरूरत होती है।
यदि निर्माण के दौरान तकनीकी कमी सामने आती है, तो संबंधित परियोजना के अनुबंध के मुताबिक निरीक्षण, सुधारात्मक कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। हालांकि, कार्रवाई का अधिकार, उसका स्वरूप और जिम्मेदार अधिकारियों या कंपनियों की भूमिका परियोजना की शर्तों तथा लागू नियमों पर निर्भर करती है।
ठेकेदार की जिम्मेदारी से अलग होगी निगरानी एजेंसियों की जवाबदेही
हाईवे निर्माण में ठेकेदार की प्रमुख जिम्मेदारी निर्धारित डिजाइन, तकनीकी विनिर्देशों, गुणवत्ता मानकों और समयसीमा के अनुसार काम पूरा करना है। इसके विपरीत, निगरानी के लिए नियुक्त इंडिपेंडेंट इंजीनियर, अथॉरिटी इंजीनियर या कंसल्टेंट की भूमिका परियोजना की शर्तों के अनुसार निर्माण की गुणवत्ता का निरीक्षण करना और कमियों की पहचान करना होती है।
यदि किसी परियोजना में गंभीर तकनीकी खामी सामने आती है, तो यह जांचना महत्वपूर्ण होगा कि निर्माण करने वाली कंपनी ने निर्धारित मानकों का पालन किया या नहीं। इसके साथ यह भी देखा जा सकता है कि निगरानी के लिए जिम्मेदार एजेंसियों ने अपनी निर्धारित जिम्मेदारियां पूरी की थीं या नहीं।
मंत्रालय की प्रस्तावित सख्ती का उद्देश्य इसी जवाबदेही को अधिक स्पष्ट बनाना है। इससे ठेकेदारों के साथ उन एजेंसियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है, जिनका काम निर्माण की गुणवत्ता पर नजर रखना है। हालांकि, किसी भी पक्ष के खिलाफ कार्रवाई संबंधित तथ्यों, अनुबंध की शर्तों और लागू नियमों के आधार पर ही होनी चाहिए।
मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट में बदलाव की तैयारी
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता संबंधी कमियों के बाद मंत्रालय ने भविष्य की परियोजनाओं में ऐसी स्थितियों को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें ऑटोमेटेड एंड इंटेलिजेंट मशीन एडेड कंस्ट्रक्शन (AI-MC) तकनीक का निर्माण के दौरान उपयोग, आधार निविदा मूल्य से कम दर पर स्वीकार की गई परियोजनाओं की विशेष निगरानी और गंभीर तकनीकी खामियों के मामले में ठेकेदार के साथ निगरानी एजेंसियों की भूमिका की समीक्षा जैसे उपाय शामिल हैं।
इन उपायों के साथ मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट में भी नए संशोधनों की प्रक्रिया चल रही है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, गुजरात में आयोजित चिंतन शिविर के दौरान राज्यों के परिवहन मंत्रियों, लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों, NHAI और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के प्रतिनिधियों के साथ हाईवे परियोजनाओं की गुणवत्ता पर चर्चा हुई। इस दौरान लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की खामियों का उदाहरण भी सामने रखा गया और विशेषज्ञों से सुझाव लिए गए।
मंत्रालय के स्तर पर प्रस्तावित बदलावों को अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद जारी किए जाने की तैयारी है। संशोधित प्रावधानों का अंतिम स्वरूप सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ठेकेदारों, निगरानी एजेंसियों और संबंधित प्राधिकरणों की जवाबदेही को लेकर किन शर्तों में बदलाव किया गया है।
कम दर पर टेंडर वाली परियोजनाओं पर विशेष नजर
निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आधार निविदा मूल्य से कम दर पर टेंडर स्वीकार किए जाने वाली परियोजनाओं की विशेष निगरानी करने का निर्णय भी किया गया है। कम दर पर ठेका मिलना अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है, लेकिन ऐसी परियोजनाओं में यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि लागत कम रखने के प्रयास में निर्माण सामग्री, तकनीकी मानकों या गुणवत्ता से समझौता न हो।
NHAI या संबंधित कार्यान्वयन एजेंसी को अपने अधिकार क्षेत्र और अनुबंध की शर्तों के अनुसार यह देखना होता है कि परियोजना निर्धारित मानकों के अनुरूप आगे बढ़ रही है। जहां जरूरी हो, वहां निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण के जरिए कमियों की पहचान की जा सकती है। गंभीर खामी मिलने पर ठेकेदार से सुधार कराने और अनुबंध के तहत उपलब्ध कार्रवाई के विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
AI-MC तकनीक से निर्माण की निगरानी पर जोर
मंत्रालय ने ऑटोमेटेड एंड इंटेलिजेंट मशीन एडेड कंस्ट्रक्शन यानी AI-MC तकनीक को परियोजनाओं में निर्माण के पूरे चरण के दौरान लागू करने पर भी जोर दिया है। इसका उद्देश्य निर्माण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना और गुणवत्ता की निगरानी में तकनीक की भूमिका बढ़ाना है।
तकनीकी प्रणालियों का प्रभावी उपयोग निर्माण के विभिन्न चरणों में मानकों के पालन का आकलन करने में मदद कर सकता है। लेकिन तकनीक के साथ नियमित निरीक्षण, प्रशिक्षित कर्मियों और समय पर सुधारात्मक कार्रवाई की भी आवश्यकता होगी। NHAI और संबंधित एजेंसियों के लिए चुनौती यह होगी कि तकनीकी निगरानी को केवल औपचारिक प्रक्रिया न रहने दिया जाए, बल्कि उससे निर्माण की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार सुनिश्चित हो।
अंतिम मंजूरी के बाद स्पष्ट होगी कार्रवाई की व्यवस्था
मंत्रालय की ओर से मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट में संशोधनों की प्रक्रिया जारी है। अंतिम स्वीकृति के बाद नए प्रावधान जारी किए जाएंगे। इसके बाद ही ठेकेदार कंपनियों, निगरानी एजेंसियों और संबंधित प्राधिकरणों की जिम्मेदारियों में किए गए बदलावों की पूरी जानकारी सामने आएगी।
इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य निर्माण में खामियां सामने आने के बाद कार्रवाई करने के बजाय ऐसी कमियों को समय रहते रोकना है। इसके लिए ठेकेदार की निर्माण संबंधी जिम्मेदारी, निगरानी एजेंसियों के निरीक्षण संबंधी दायित्व और NHAI की अनुबंध के अनुसार निगरानी की भूमिका के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना जरूरी है। प्रभावी निगरानी और नियमों के अनुरूप जवाबदेही तय होने से राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता सुधारने तथा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-




