ट्रेन में तेज आवाज में मोबाइल चलाना पड़ेगा भारी, हो सकती है 6 महीने की कैद और 5000 तक का जुर्माना

ट्रेन में तेज आवाज में मोबाइल चलाना पड़ेगा भारी, हो सकती है 6 महीने की कैद और 5000 तक का जुर्माना

प्रेषित समय :14:14:41 PM / Sat, Oct 17th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. ट्रेन में सफर के दौरान मोबाइल पर तेज आवाज में रील देखना, बिना इयरफोन के गाने बजाना या स्पीकर ऑन करके लंबी बातचीत करना अब केवल खराब व्यवहार नहीं, बल्कि कानूनी अपराध की श्रेणी में आ गया है. सह-यात्रियों की शांति और नींद में खलल डालने वाले ऐसे लापरवाह यात्रियों के खिलाफ रेलवे प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. रेलवे नियमों के तहत कोच में उपद्रव या शोर मचाने पर भारी जुर्माने के साथ-साथ जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है.

1,000 से 5,000 रुपये तक जुर्माना, 6 महीने तक की हो सकती है जेल

रेलवे नियमों के अनुसार, यदि कोई यात्री मोबाइल पर तेज आवाज में ऑडियो या वीडियो चलाकर दूसरों को परेशान करता है और इसकी शिकायत दर्ज होती है, तो उस पर तत्काल 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. मामला अधिक गंभीर होने, बार-बार मना करने के बावजूद विवाद खड़ा करने या रेलवे परिसर की शांति भंग करने पर रेलवे अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी. ऐसे मामलों में यह जुर्माना बढ़कर 5,000 रुपये तक हो सकता है और दोषी पाए जाने पर 6 महीने तक की कैद का भी स्पष्ट प्रावधान है.

सदर्न रेलवे ने शुरू की विशेष सख्ती, टीटीई को दिए गए सख्त निर्देश

इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए सदर्न रेलवे ने नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है. स्टेशनों और ट्रेनों में लाउडस्पीकर के जरिए लगातार सार्वजनिक घोषणाएं की जा रही हैं और कोचों में चेतावनी नोटिस लगाए जा रहे हैं. टिकट परीक्षक (टीटीई) समेत अन्य ऑन-ड्यूटी रेलवे स्टाफ को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित राउंड के दौरान शोर मचाने वाले यात्रियों पर नजर रखें और शिकायत मिलते ही तुरंत चालान काटें या कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें. रेलवे बोर्ड ने यद्यपि 2012 में भी ऐसे निर्देश जारी किए थे, लेकिन अब एसी और स्लीपर कोचों में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए इसकी निगरानी को अत्यंत कड़ा कर दिया गया है.

किन हरकतों से कोच में बढ़ता है तनाव और विवाद

रेलवे कोच में बंद जगह, खासकर एसी बोगियों में, छोटी सी आवाज भी काफी गूंजती है. बिना हेडफोन के सोशल मीडिया रील देखना, ऊंची आवाज में संगीत सुनना, स्पीकरफोन पर निजी पारिवारिक बातें करना और तेज रिंगटोन बजाना अन्य यात्रियों के आराम और मानसिक शांति को सीधे प्रभावित करता है. सबसे ज्यादा परेशानी रात के समय होती है जब लोग सोने का प्रयास कर रहे होते हैं. कई बार जब कोई सह-यात्री विनम्रता से आवाज धीमी करने को कहता है, तो कुछ लोग अभद्रता और हाथापाई पर उतारू हो जाते हैं, जिससे यात्रा का माहौल पूरी तरह बिगड़ जाता है.

विवाद होने पर खुद न भिड़ें, रेलमदद ऐप और टीटीई का लें सहारा

रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को स्पष्ट सलाह दी है कि यदि कोई सह-यात्री तेज आवाज में मोबाइल बजा रहा हो और टोकने पर झगड़ा करने लगे, तो खुद विवाद बढ़ाने के बजाय तुरंत रेलवे तंत्र का सहारा लें. पीडि़त यात्री अपने कोच और बर्थ नंबर के साथ सीधे टीटीई या अटेंडेंट को सूचित कर सकते हैं. इसके अलावा रेलवे की आधिकारिक हेल्पलाइन व रेलमदद पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है. यदि स्थिति ज्यादा तनावपूर्ण हो जाए या मारपीट की नौबत दिखे, तो तुरंत रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को बुलाएं. सुखद और सुरक्षित यात्रा के लिए हमेशा इयरफोन का इस्तेमाल करें और इस बात का ध्यान रखें कि ट्रेन एक सार्वजनिक स्थान है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-