अब रेलवे में बहाना नहीं चलेगा, AI करेगा TTE की निगरानी ड्यूटी से गायब होते ही बजेगा अलर्ट , यात्रियों को मिलेगी त्वरित सेवा

अब रेलवे में बहाना नहीं चलेगा, AI करेगा TTE की निगरानी ड्यूटी से गायब होते ही बजेगा अलर्ट , यात्रियों को मिलेगी त्वरित सेवा

प्रेषित समय :19:51:04 PM / Mon, Dec 15th, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. भारतीय रेलवे ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए यात्रियों की सबसे पुरानी और सबसे गंभीर समस्या—यात्रा के दौरान ड्यूटी पर टीटीई (ट्रेन टिकट एग्जामिनर) की अनुपलब्धता—को जड़ से खत्म करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एक अत्याधुनिक उपस्थिति और निगरानी प्रणाली का शुभारंभ कर दिया है. यह कदम न केवल कर्मचारियों की जवाबदेही (अकाउंटेबिलिटी) सुनिश्चित करने वाला है, बल्कि लाखों रेल यात्रियों के लिए सफर के दौरान त्वरित सहायता और सुविधा की गारंटी भी है. यह तकनीक अब सुनिश्चित करेगी कि चलती ट्रेन में किसी भी आपात स्थिति, टिकट चेकिंग या सीट संबंधी शिकायत के समय टीटीई अपनी ड्यूटी पर मौजूद रहे और यात्रियों को भटकना न पड़े.

इस नई प्रणाली के कार्यान्वयन के बाद, रेलवे ने पूरे तंत्र को हाई-टेक बना दिया है. सूत्रों के अनुसार, यह AI सिस्टम हर टीटीई को एक विशेष ट्रेकिंग डिवाइस या स्मार्टवॉच के माध्यम से जोड़ा गया है. यह डिवाइस न केवल उनके ड्यूटी के समय को ट्रैक करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि टीटीई को आवंटित कोचों के क्लस्टर (समूह) में उनकी वास्तविक उपस्थिति बनी रहे. इस सिस्टम में जियो-फेंसिंग तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया है, जो किसी भी टीटीई के अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र से बाहर जाने पर नियंत्रण कक्ष को तुरंत अलर्ट भेजेगा. यह एक स्वचालित चेतावनी प्रणाली है, जिसका अर्थ है कि अब कोई भी टीटीई ड्यूटी के समय 'गायब' होने का बहाना नहीं बना सकेगा.

इस क्रांतिकारी बदलाव से यात्रियों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा. अक्सर शिकायत मिलती थी कि देर रात या सुबह के वक्त यात्रियों को अपनी सीट या किसी अन्य समस्या के लिए टीटीई की तलाश में पूरी ट्रेन में भटकना पड़ता था. कई बार तो टिकट चेकिंग के लिए भी टीटीई नहीं मिलते थे, जिससे फर्जीवाड़े को बढ़ावा मिलता था. अब, इस AI सिस्टम के लाइव होने के बाद, रेलवे के कंट्रोल रूम के पास हर समय यह सटीक जानकारी उपलब्ध रहेगी कि कौन सा टीटीई किस ट्रेन के किस कोच में ड्यूटी पर है. यदि कोई यात्री 139 जैसे हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत करता है कि उसे टीटीई नहीं मिल रहा है, तो कंट्रोल रूम तुरंत उस ट्रेन के निर्धारित टीटीई को अलर्ट भेज सकता है, जिससे त्वरित प्रतिक्रिया (क्विक रिस्पॉन्स) सुनिश्चित होगी.

रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस तकनीक को 'पारदर्शिता का नया युग' बताया है. उन्होंने कहा कि यह प्रणाली कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाने के लिए नहीं है, बल्कि उन्हें उनके दायित्वों का निर्वहन करने में मदद करने के लिए है. यह सिस्टम टीटीई की वास्तविक ड्यूटी अवधि का सटीक रिकॉर्ड रखेगा, जिससे ओवर टाइम और कार्यभार का उचित मूल्यांकन भी किया जा सकेगा. इसके साथ ही, यह प्रणाली टीटीई द्वारा दर्ज की गई टिकट अनियमितताओं और मौके पर जुर्माना वसूली के डेटा को भी सीधे सर्वर से जोड़ेगी, जिससे राजस्व रिसाव (रेवेन्यू लीकेज) को रोका जा सकेगा और पूरे प्रक्रिया में मानव हस्तक्षेप कम होगा.

सोशल मीडिया पर आम यात्रियों द्वारा इस कदम की जमकर सराहना हो रही है. लोग इसे 'यात्री सुरक्षा और सुविधा' की दिशा में एक बड़ा कदम बता रहे हैं. कई यात्रियों ने अपनी पिछली यात्राओं के खराब अनुभव साझा किए हैं और उम्मीद जताई है कि यह नई तकनीक अब 'ड्यूटी से गायब' रहने वाले टीटीई पर प्रभावी रूप से लगाम लगाएगी. यह न केवल टीटीई की उपस्थिति को ट्रैक करेगा, बल्कि उनके व्यवहार और यात्रियों के साथ उनके संपर्क के रिकॉर्ड को भी एक हद तक डिजिटल रूप से कैप्चर करने की क्षमता रखता है.

शुरुआत में, यह प्रणाली राजधानी, दुरंतो और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों में लागू की गई है, जहाँ यात्रियों का आवागमन अधिक होता है और सेवा की अपेक्षाएँ उच्च होती हैं. चरणबद्ध तरीके से, इसे लंबी दूरी की सभी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में लागू किया जाएगा. रेलवे का लक्ष्य है कि अगले छह महीनों के भीतर देश की लगभग 3,000 से अधिक ट्रेनों में इस AI-आधारित निगरानी प्रणाली को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया जाए.

इस तकनीक के सफल कार्यान्वयन के बाद, भारतीय रेलवे अब विश्व के उन चुनिंदा रेलवे नेटवर्कों में शामिल हो जाएगा, जो अपने फ्रंटलाइन कर्मचारियों की उपस्थिति और सेवा वितरण की निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कर रहे हैं. यह सिर्फ एक अटेंडेंस सिस्टम नहीं है, यह यात्रियों के प्रति भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता का डिजिटल प्रमाण है, जिसने अब यह सुनिश्चित कर दिया है कि ट्रेन में सफर के दौरान, उनकी सहायता के लिए एक अधिकारी हमेशा ऑन-ड्यूटी और ट्रैक पर रहेगा. अब इंतजार है कि इस तकनीक का वास्तविक प्रभाव जमीन पर कब दिखाई देता है और यात्री कब इस सुविधा का पूरा लाभ उठा पाते हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-