भोपाल-जबलपुर हाईवे पर 300 अवैध कट से थमी एंबुलेंस की रफ्तार हाईकोर्ट ने पूछा ओला उबर दो मिनट में तो एंबुलेंस क्यों नहीं?

भोपाल-जबलपुर हाईवे पर 300 अवैध कट से थमी एंबुलेंस की रफ्तार हाईकोर्ट ने पूछा ओला उबर दो मिनट में तो एंबुलेंस क्यों नहीं?

प्रेषित समय :20:54:25 PM / Mon, Apr 27th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के राजमार्गों पर सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं में हो रही देरी को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने भोपाल-जबलपुर हाईवे सहित अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने अवैध कट-प्वाइंट्स को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार के संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए उन परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं, जिनके कारण गंभीर मरीजों को ले जाने वाली एंबुलेंस समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव, एनएचएआई और लोक निर्माण विभाग के एसीएस को इस अव्यवस्था पर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं।

जनहित याचिकाकर्ता महावीर सिंह ने अदालत में स्वयं पैरवी करते हुए एक चुभता हुआ सवाल उठाया कि आज के दौर में जब ओला और उबर जैसी निजी टैक्सी सेवाएं मोबाइल ऐप के जरिए महज दो मिनट के भीतर उपभोक्ता के पास पहुंच जाती हैं, तो जीवन बचाने वाली एंबुलेंस घंटों तक क्यों नहीं पहुंच पाती? उन्होंने दस्तावेजों के साथ कोर्ट को बताया कि अकेले भोपाल-जबलपुर हाईवे पर स्थानीय लोगों और रसूखदारों ने अपनी सुविधा के लिए डिवाइडर तोड़कर करीब 300 अवैध कट बना लिए हैं। इन कटों की वजह से न केवल वाहनों की औसत गति प्रभावित होती है, बल्कि ये दुर्घटनाओं के सबसे बड़े ब्लैक स्पॉट बन गए हैं। अवैध रास्तों के कारण तेज रफ्तार वाहनों को अचानक ब्रेक लगाने पड़ते हैं, जिससे एंबुलेंस जैसी आपातकालीन गाड़ियां जाम और बाधाओं में फंसकर रह जाती हैं।

याचिका में दलील दी गई है कि राजमार्गों पर नियम विरुद्ध बनाए गए ये 300 कट सीधे तौर पर मानवाधिकारों और सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हैं। एंबुलेंस के समय पर न पहुंचने के कारण कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं, जो कि एक सभ्य समाज और कुशल प्रशासन के लिए चिंता का विषय है। हाईकोर्ट ने इन दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए माना कि राजमार्गों की यह स्थिति वास्तव में चिंताजनक है। अदालत ने प्रशासन से पूछा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में अवैध कट कैसे बने रहने दिए गए और इनके खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जवाब आने के बाद इन अवैध कटों को बंद करने और राजमार्गों पर एंबुलेंस के लिए निर्बाध रास्ता सुनिश्चित करने हेतु कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

इस सुनवाई के बाद अब एनएचएआई और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय होना तय माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि ढाबा संचालकों और अवैध कॉलोनाइजर्स ने अपनी जमीन की कीमत बढ़ाने और ग्राहकों की पहुंच आसान करने के लिए सरकारी संपत्ति यानी डिवाइडर को नुकसान पहुंचाकर ये कट बनाए हैं। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब उम्मीद जगी है कि भोपाल-जबलपुर हाईवे सहित प्रदेश के अन्य प्रमुख मार्गों को इन खतरों से मुक्त किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई तक सभी संबंधित विभागों को विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिसमें यह बताना होगा कि इन 300 अवैध कटों को हटाने और एंबुलेंस की आवाजाही सुगम बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। फिलहाल, हाईकोर्ट की इस टिप्पणी ने सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-