जबलपुर के पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय में फर्नीचर खरीदी घोटाला, जांच समिति ने सौंपी अपनी रिपोर्ट

जबलपुर के पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय में फर्नीचर खरीदी घोटाला, जांच समिति ने सौंपी अपनी रिपोर्ट

प्रेषित समय :19:07:18 PM / Mon, Jun 8th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर


जबलपुर। एमपी के जबलपुर स्थित वेटरनरी विश्वविद्यालय में लाखों रुपये के फर्नीचर की खरीदी में घोटाला सामने आने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कम्प मच गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा गठित की गई पांच सदस्यीय विशेष जांच समिति ने इस पूरे मामले की गहन पड़ताल कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। जांच रिपोर्ट में महू वेटरनरी कॉलेज के लिए की गई फर्नीचर खरीदी में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं, जिसके तुरंत बाद प्रशासन ने एक्शन लेते हुए सिविल एवं सप्लाई कार्यों से जुड़े प्रोफेसर एसएस कारमोरे का तबादला जबलपुर से महू कर दिया है। 
                                    बताया जा रहा है कि महू कॉलेज के लिए करीब 30 लाख रुपये से अधिक की लागत से यह विवादित खरीदी की गई थी। इस पूरे मामले को लेकर मंदीप शर्मा का कहना है कि शिकायतों की जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। फर्नीचर की खरीदी प्रक्रिया को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जब जांच बैठी, तो चौंकाने वाले तथ्य बाहर आए। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान जानबूझकर तय नियमों और कायदों की घोर अनदेखी की गई। एक ऐसी कंपनी को काम सौंप दिया गया, जिसका मूल काम फर्नीचर का निर्माण या उसकी बिक्री करना था ही नहीं। जांच समिति की रिपोर्ट में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि जिस फर्म को इतने बड़े स्तर पर फर्नीचर सप्लाई का जिम्मा सौंपा गया, वह मुख्य रूप से कंसलटेंसी सेवाएं प्रदान करने वाली एक साधारण संस्था थी। जांच के दौरान यह बात स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुई है कि संबंधित ठेकेदार कंपनी के पास फर्नीचर निर्माण अथवा उसके क्रय-विक्रय का न तो कोई पुराना अनुभव था और न ही इसके लिए आवश्यक बुनियादी व्यवस्थाएं मौजूद थीं। इसके बावजूद विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ रसूखदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने निजी स्वार्थ के चलते नियमों को ताक पर रखकर इस कंपनी को नाजायज लाभ पहुंचाने का पुरजोर प्रयास किया। इस अनुचित सौदे को लेकर छात्र संगठन एबीवीपी ने भी परिसर में भारी विरोध प्रदर्शन किया था।
घटिया स्तर का निकला सामान-
पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर बात यह  है कि महू कॉलेज में जो सामान भेजा गया, उसकी गुणवत्ता बेहद खराब थी। जांच टीम ने पाया कि मौके पर सप्लाई किए गए फर्नीचर के मानक तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप बिल्कुल नहीं थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत विभागीय जांच को और तेज कर दिया है ताकि वित्तीय गड़बड़ी की तह तक पहुंचा जा सके।
दोषियों पर होगी सख्त कार्यवाही-
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय की साख के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। फर्नीचर क्रय के संबंध में मिली शिकायतों के आधार पर निष्पक्ष रूप से जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इस पूरी गड़बड़ी के पीछे जिन भी लोगों की संलिप्तता प्रमाणित होगी, उनके विरुद्ध सख्त से सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-