जबलपुर। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के क्रम में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) जबलपुर ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के दो वरिष्ठ अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई उस समय की गई जब दोनों अधिकारी एक निर्माण कार्य के भुगतान के एवज में रिश्वत की दूसरी किस्त ले रहे थे। इस कार्रवाई के बाद सरकारी विभागों में हड़कंप मच गया और पूरे मामले ने एक बार फिर सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार गिरफ्तार किए गए अधिकारियों में अतिरिक्त मुख्य अभियंता (सिविल) प्रहलाद मर्सकोले तथा कार्यपालन यंत्री (सिविल) चंद्रशेखर मेहरा शामिल हैं। दोनों अधिकारी जबलपुर सर्किल स्थित मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के रामपुर कार्यालय में पदस्थ हैं। ईओडब्ल्यू की टीम ने दोनों को उनके कार्यालय में ही रिश्वत की राशि लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।
मामले की शुरुआत तब हुई जब जबलपुर निवासी ठेकेदार अशोक कुमार द्विवेदी ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि कटनी जिले के बहोरीबंद तहसील अंतर्गत बचैया ग्राम में जूनियर इंजीनियर कार्यालय के निर्माण कार्य का लगभग 10 लाख रुपये का भुगतान विभाग द्वारा किया जाना था। आरोप है कि इस भुगतान को जारी करने के बदले कार्यपालन यंत्री चंद्रशेखर मेहरा ने 20 हजार रुपये तथा अतिरिक्त मुख्य अभियंता प्रह्लाद मर्सकोले ने 30 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। कुल मिलाकर 50 हजार रुपये की अवैध राशि मांगी गई थी।
शिकायत प्राप्त होने के बाद ईओडब्ल्यू ने पूरे मामले का सत्यापन कराया। जांच के दौरान रिश्वत मांगने की शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई। जांच में यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता से पहले ही पांच हजार रुपये रिश्वत के रूप में लिए जा चुके थे। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने पूरी योजना बनाकर ट्रैप की कार्रवाई की।
पूर्व निर्धारित योजना के तहत शिकायतकर्ता को अधिकारियों के संपर्क में भेजा गया। जैसे ही दोनों अधिकारियों ने रिश्वत की दूसरी किस्त स्वीकार की, ईओडब्ल्यू की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान अतिरिक्त मुख्य अभियंता प्रह्लाद मर्सकोले के पास से 10 हजार रुपये तथा कार्यपालन यंत्री चंद्रशेखर मेहरा के पास से 15 हजार रुपये बरामद किए गए। इस प्रकार कुल 25 हजार रुपये की ट्रैप राशि के साथ दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया।
ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार यह राशि रिश्वत की दूसरी किस्त थी। शिकायतकर्ता से पूर्व में पांच हजार रुपये लिए जाने की पुष्टि भी जांच में सामने आई है, जबकि शेष राशि बाद में देने की बात तय हुई थी। ट्रैप की सफलता के बाद ईओडब्ल्यू की टीम ने कार्यालय में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों को भी अपने कब्जे में लिया।
इस कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 7(ए) के तहत अपराध दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसी अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रिश्वतखोरी का यह मामला केवल इसी भुगतान तक सीमित था या फिर विभाग में अन्य निर्माण कार्यों एवं भुगतान प्रक्रियाओं में भी इसी प्रकार की अनियमितताएं की जाती रही हैं।
सरकारी निर्माण कार्यों में भुगतान के बदले रिश्वत मांगने के आरोप लंबे समय से सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में अक्सर ठेकेदारों को भुगतान प्राप्त करने के लिए अनावश्यक विलंब और दबाव का सामना करना पड़ता है। इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें विभाग के वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई है।
ईओडब्ल्यू ने आम नागरिकों और ठेकेदारों से अपील की है कि यदि किसी भी सरकारी कार्यालय में उनसे रिश्वत की मांग की जाती है तो वे बिना भय के इसकी शिकायत करें। एजेंसी ने भरोसा दिलाया है कि शिकायतों का गोपनीय सत्यापन कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसी मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है। यदि जांच के दौरान अतिरिक्त साक्ष्य या अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-




