आपराधिक मामले में बरी होने से विभागीय कार्रवाई खत्म नहीं होती, एमपी हाई कोर्ट का अहम फैसला

आपराधिक मामले में बरी होने से विभागीय कार्रवाई खत्म नहीं होती, एमपी हाई कोर्ट का अहम फैसला

प्रेषित समय :20:15:34 PM / Mon, Jul 6th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी का आपराधिक मामले में दोषमुक्त होना विभागीय कार्रवाई को स्वतः समाप्त नहीं करता। न्यायमूर्ति दीपक खोत की एकलपीठ ने रीवा पुलिस लाइन के बर्खास्त आरक्षक रामपाल अहिरवार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि विभागीय जांच और आपराधिक मुकदमे की प्रकृति, उद्देश्य तथा साक्ष्य के मानदंड अलग-अलग होते हैं। इसलिए आपराधिक अदालत से बरी होने मात्र से विभागीय दंड समाप्त नहीं किया जा सकता।

मामले के अनुसार वर्ष 2017 में ड्यूटी के दौरान आरक्षक पर आरोप लगा था कि उसने ऑटो में सवार एक महिला से स्कार्फ हटाने के लिए कहा और मना करने पर चाकू दिखाकर धमकाया। घटना के बाद विभागीय जांच कराई गई, जिसमें आरक्षक पर लगाए गए आरोप सिद्ध पाए गए। इसके आधार पर पुलिस विभाग ने उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया। बाद में आपराधिक अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए आरक्षक को दोषमुक्त कर दिया। इसके बाद उसने हाई कोर्ट में बर्खास्तगी का आदेश निरस्त करने की मांग करते हुए याचिका दायर की। हालांकि हाई कोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच में गंभीर कदाचार सिद्ध हो चुका है और केवल आपराधिक मामले में बरी होने के आधार पर विभागीय दंड को समाप्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने याचिका निरस्त करते हुए विभागीय कार्रवाई को वैध ठहराया। 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-