जबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस शासकीय मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान किशोर विश्वकर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु को लेकर उनकी पत्नी प्रीति विश्वकर्मा ने गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवादिनी का दावा है कि पति की मृत्यु के बाद उनके अंग निकालकर बेच दिए गए और शव को अज्ञात व्यक्ति के रूप में दर्ज कर दफना दिया गया। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए उन्होंने प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में परिवाद प्रस्तुत किया है। मामला अब हाई कोर्ट के बाद मजिस्ट्रेट न्यायालय तक पहुंच गया है। अदालत में 13 नवंबर को परिवादिनी के बयान दर्ज किए जाएंगे। उनकी ओर से अधिवक्ता विवेक तिवारी पैरवी कर रहे हैं।
यह मामला अस्पताल में उपचार, मृत्यु से संबंधित रिकॉर्ड, शव की पहचान और अंतिम निपटान की प्रक्रिया से जुड़े सवालों के कारण गंभीर हो गया है। हालांकि, अंग निकालकर बेचने और पहचान छिपाकर दफनाने जैसे आरोप फिलहाल परिवादिनी के दावे हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। न्यायालयीन कार्यवाही और सक्षम जांच के निष्कर्षों से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
12 अगस्त 2025 को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंची थीं पत्नी
परिवाद के अनुसार, प्रीति विश्वकर्मा 12 अगस्त 2025 को अपने पति किशोर विश्वकर्मा को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंची थीं। अस्पताल में ओपीडी, ईसीजी और सोनोग्राफी सहित उपचार संबंधी प्रक्रियाओं का उल्लेख परिवाद में किया गया है। परिवादिनी का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद कुछ समय में पति के संबंध में उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। प्रीति का कहना है कि पति की स्थिति और उनके बारे में जानकारी प्राप्त करने के प्रयासों के बावजूद घटनाक्रम स्पष्ट नहीं हो सका। इसके बाद अस्पताल और पुलिस के अभिलेखों में दर्ज विवरण को लेकर उनके मन में सवाल पैदा हुए। उन्होंने मृत्यु से संबंधित तारीखों, मर्ग की कार्यवाही और शव की पहचान के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। परिवाद में उपचार के दौरान हुई घटनाओं से लेकर मृत्यु और शव के अंतिम निपटान तक की पूरी प्रक्रिया की जांच आवश्यक बताई गई है। परिवादिनी चाहती हैं कि संबंधित दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट किया जाए कि उनके पति के साथ वास्तव में क्या हुआ था।
स्ट्रेचर पर पति को पहचानने का किया दावा
परिवादिनी ने दावा किया है कि 14 अगस्त की रात अस्पताल परिसर में स्ट्रेचर पर एक व्यक्ति को देखकर उन्होंने उसकी पहचान अपने पति किशोर विश्वकर्मा के रूप में की थी। उनके अनुसार, इस घटनाक्रम के बावजूद पति की मृत्यु और शव की पहचान से जुड़े अभिलेखों में विसंगतियां दिखाई देती हैं। प्रीति ने पुलिस रिकॉर्ड में मृत्यु की तारीख 13 अगस्त 2025 दर्ज होने और मर्ग संबंधी दस्तावेजों में मृतक को अज्ञात व्यक्ति के रूप में दर्शाए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जब उन्होंने पति को पहचानने का दावा किया, तब भी संबंधित रिकॉर्ड में उनकी पहचान किस प्रकार दर्ज की गई, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए। यह अंतर मामले की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि, उपलब्ध विवरण से यह स्पष्ट नहीं होता कि संबंधित रिकॉर्ड किस आधार पर तैयार किए गए थे और उनमें दर्ज जानकारी के पीछे क्या परिस्थितियां थीं। इन तथ्यों की पुष्टि मूल अभिलेखों और संबंधित अधिकारियों के पक्ष से ही हो सकेगी।
सीसीटीवी फुटेज और अस्पताल के रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
परिवादिनी ने न्यायालय से अस्पताल परिसर के सीसीटीवी फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित कराने का अनुरोध किया है। परिवाद में ड्यूटी रजिस्टर, कैजुअल्टी रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक लॉग और उपचार संबंधी अभिलेखों को जांच के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। इसके अलावा मर्ग क्रमांक 71/2025 की मूल डायरी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मॉर्च्युरी रिकॉर्ड तथा शव की पहचान और अंतिम निपटान से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत कराने की मांग की गई है। परिवादिनी का कहना है कि इन रिकॉर्ड की जांच से घटनाक्रम की समयरेखा स्पष्ट हो सकती है और यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनके पति के साथ क्या हुआ। सीसीटीवी फुटेज और ड्यूटी रजिस्टर जैसे रिकॉर्ड अस्पताल परिसर में संबंधित गतिविधियों और समय से जुड़ी जानकारी दे सकते हैं। वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मॉर्च्युरी रिकॉर्ड मृत्यु तथा शव की पहचान से संबंधित तथ्यों की जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इन दस्तावेजों की वास्तविक सामग्री सामने आने के बाद ही उनके आधार पर कोई निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
मजिस्ट्रेट जांच और फॉरेंसिक परीक्षण कराने का अनुरोध
प्रीति विश्वकर्मा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 196 के तहत मजिस्ट्रेट जांच कराने की मांग की है। उनका अनुरोध है कि मृत्यु से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल की जाए और आवश्यक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। परिवादिनी ने आवश्यकता पड़ने पर विधिक प्रक्रिया के अनुसार शव को कब्र से निकलवाकर स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड और फॉरेंसिक विशेषज्ञों से परीक्षण कराने का अनुरोध भी किया है। उनका कहना है कि वैज्ञानिक परीक्षण से मृत्यु की परिस्थितियों और लगाए गए आरोपों की जांच में मदद मिल सकती है। हालांकि, शव को कब्र से निकालने या किसी अन्य फॉरेंसिक प्रक्रिया को अपनाने का निर्णय संबंधित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी के आदेश के अधीन होगा। अभी उपलब्ध जानकारी में ऐसी किसी अनुमति या परीक्षण के आदेश की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इसे परिवादिनी की मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
हाई कोर्ट में भी पहुंचा था मामला
परिवादिनी के अनुसार, पति की तलाश और उनके संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए उन्होंने पहले मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। उनका दावा है कि हाई कोर्ट की कार्यवाही के बाद पुलिस से संबंधित जानकारी में किशोर विश्वकर्मा की मेडिकल कॉलेज में मृत्यु होने का तथ्य सामने आया। इसके बाद उन्होंने विभिन्न स्तरों पर शिकायतें कीं। परिवादिनी का आरोप है कि अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें मजिस्ट्रेट न्यायालय का रुख करना पड़ा। अब उन्होंने अदालत से मृत्यु से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कराने और संबंधित अभिलेखों की पड़ताल कराने की मांग की है। हालांकि, उपलब्ध समाचार विवरण में हाई कोर्ट के आदेश की पूरी प्रति या उसमें दर्ज निष्कर्षों का विस्तृत उल्लेख नहीं है। इसलिए पिछली न्यायिक कार्यवाही के संबंध में परिवादिनी के दावों और न्यायालय के वास्तविक आदेश के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए मूल आदेश का परीक्षण आवश्यक होगा।
13 नवंबर को बयान दर्ज होने के बाद आगे बढ़ेगी कार्यवाही
प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट पंकज सविता की अदालत में 13 नवंबर को परिवादिनी प्रीति विश्वकर्मा के बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद न्यायालय परिवाद और उपलब्ध सामग्री के आधार पर आगे की प्रक्रिया पर विचार करेगा। अधिवक्ता विवेक तिवारी परिवादिनी की ओर से पैरवी कर रहे हैं। आगे की कार्यवाही में परिवाद में प्रस्तुत तथ्यों, दस्तावेजों और बयान के आधार पर यह तय होगा कि मामले में किस प्रकार की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी है। अस्पताल और पुलिस के संबंधित रिकॉर्ड की जांच तथा अन्य साक्ष्यों का परीक्षण भी मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण हो सकता है। फिलहाल इस प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल किशोर विश्वकर्मा की मृत्यु की परिस्थितियों, उनकी पहचान से संबंधित रिकॉर्ड और शव के अंतिम निपटान को लेकर है। अंग निकालकर बेचने और पहचान छिपाने के आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इन गंभीर दावों पर निष्कर्ष निकालने से पहले निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण आवश्यक है। अब 13 नवंबर को होने वाली न्यायालयीन कार्यवाही पर नजर रहेगी।




