डुंडी गुड्स शेड की लेटलतीफी से व्यापारी परेशान, गेहूं-मक्का की लोडिंग-अनलोडिंग पर संकट

डुंडी गुड्स शेड की लेटलतीफी से व्यापारी परेशान, गेहूं-मक्का की लोडिंग-अनलोडिंग पर संकट

प्रेषित समय :19:25:31 PM / Fri, Oct 16th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नगर प्रतिनिधि ,जबलपुर। जबलपुर रेल मंडल में माल लदान के जरिए रेलवे का राजस्व बढ़ाने की कोशिशों के बीच डुंडी रेलवे स्टेशन पर गुड्स शेड निर्माण में हो रही देरी व्यापारियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। स्टेशन से गेहूं, मक्का, धान सहित अन्य खाद्यान्नों का परिवहन दूसरे शहरों और राज्यों में किया जाता है। इसके बावजूद माल की लोडिंग और अनलोडिंग के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि रेलवे प्रशासन ने लोडिंग-अनलोडिंग के लिए प्लेटफार्म निर्माण को मंजूरी देने के साथ ठेका भी आवंटित कर दिया है, लेकिन निर्माण कार्य शुरू होने में देरी हो रही है।
डुंडी स्टेशन की यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब रेलवे बोर्ड सभी जोनों और मंडलों को माल परिवहन बढ़ाकर राजस्व में वृद्धि करने के लक्ष्य दे रहा है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर जरूरी बुनियादी सुविधाओं का समय पर तैयार नहीं होना रेलवे की माल ढुलाई व्यवस्था के सामने भी चुनौती खड़ी करता है।

मंजूरी और ठेके के बाद भी निर्माण का इंतजार
डुंडी स्टेशन पर खाद्यान्नों की लोडिंग-अनलोडिंग के लिए सुविधायुक्त गुड्स शेड की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। यहां से बड़ी संख्या में व्यापारी खाद्यान्नों को रेलवे के माध्यम से अन्य शहरों और राज्यों तक भेजते हैं। रेलवे से माल परिवहन व्यापारियों के लिए उपयोगी माध्यम है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त प्लेटफार्म, शेड और व्यवस्थित लोडिंग-अनलोडिंग क्षेत्र होना आवश्यक है।

व्यापारियों के अनुसार, स्टेशन पर इन सुविधाओं की कमी के कारण माल चढ़ाने और उतारने की प्रक्रिया सुगम नहीं हो पा रही है। रेलवे प्रशासन की ओर से निर्माण की मंजूरी और ठेका दिए जाने के बावजूद काम शुरू नहीं होने से समस्या बनी हुई है।

अब सवाल यह है कि जब परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है, तो निर्माण शुरू होने में देरी की वजह क्या है और सुविधाएं उपलब्ध कराने की समयसीमा क्या निर्धारित की गई है। इन बिंदुओं पर स्पष्टता आने से व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

गेहूं, मक्का और धान के परिवहन पर पड़ रहा असर
डुंडी रेलवे स्टेशन खाद्यान्न परिवहन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां से गेहूं, मक्का और धान जैसे कृषि उत्पादों को दूसरे शहरों और राज्यों तक भेजा जाता है। इसके अलावा आसपास के किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यूरिया की रैक भी यहां पहुंचती हैं।

ऐसे में स्टेशन पर गुड्स शेड और व्यवस्थित लोडिंग-अनलोडिंग प्लेटफार्म की उपलब्धता केवल व्यापारियों के लिए ही नहीं, बल्कि कृषि आपूर्ति व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। खाद्यान्न की ढुलाई में पर्याप्त जगह और जरूरी सुविधाएं नहीं होने से माल को संभालने, वाहनों की आवाजाही और परिवहन संबंधी कामकाज में परेशानी हो सकती है।

व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि यदि स्टेशन पर जरूरी सुविधाएं विकसित कर दी जाएं, तो माल की लोडिंग और अनलोडिंग अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेगी। इससे परिवहन की प्रक्रिया को सुगम बनाने में मदद मिलेगी।

माल लदान बढ़ाने के लक्ष्य के बीच स्थानीय सुविधाओं की चुनौती
रेलवे बोर्ड की ओर से माल लदान बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य रेलवे की माल ढुलाई से होने वाली आय बढ़ाने के साथ सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने के अवसरों को भी मजबूत करना है। जबलपुर रेल मंडल भी माल परिवहन के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास कर रहा है।

लेकिन डुंडी जैसे स्टेशन पर आवश्यक सुविधाओं के अभाव में माल ढुलाई की संभावनाओं का पूरा उपयोग करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। व्यापारी रेलवे के माध्यम से अधिक माल भेजना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए लोडिंग-अनलोडिंग की प्रक्रिया का सुविधाजनक होना जरूरी है।

यदि स्टेशन पर बुनियादी ढांचा तैयार करने में देरी होती है, तो व्यापारियों को वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी पड़ सकती है। इसका असर परिवहन की लागत और कामकाज की समय-सारिणी पर भी पड़ सकता है। हालांकि, डुंडी में देरी के कारण व्यापारियों को हुए वास्तविक आर्थिक नुकसान के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

गोसलपुर और देवरी में विकल्प देने की मांग
व्यापारियों से जुड़े कुछ लोगों का सुझाव है कि जब तक डुंडी में गुड्स शेड का निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक रेलवे प्रशासन को समीपवर्ती गोसलपुर और देवरी जैसे स्टेशनों पर माल लोडिंग की संभावनाओं पर विचार करना चाहिए। यदि इन स्टेशनों पर पर्याप्त सुविधाएं और परिचालन संबंधी व्यवस्था उपलब्ध हो, तो व्यापारियों को अस्थायी राहत मिल सकती है।

हालांकि, किसी दूसरे स्टेशन पर माल लदान की अनुमति देना केवल दूरी के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए रेलवे लाइन की उपलब्धता, रैक संचालन, सुरक्षा, माल रखने की जगह और अन्य परिचालन व्यवस्थाओं का आकलन आवश्यक होगा।

फिर भी, डुंडी में निर्माण पूरा होने तक वैकल्पिक व्यवस्था की मांग इस समस्या का व्यावहारिक समाधान तलाशने की जरूरत को रेखांकित करती है। रेलवे प्रशासन यदि इस दिशा में पहल करता है, तो व्यापारियों को लंबे समय तक इंतजार करने की मजबूरी से राहत मिल सकती है।

रेलवे ने बताई निर्माण की तकनीकी तैयारी
पश्चिम मध्य रेलवे, जबलपुर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मधुर वर्मा के अनुसार, डुंडी और गोसलपुर दोनों स्टेशनों पर गुड्स शेड निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गोसलपुर में काम लगभग अंतिम चरण में पहुंचने वाला है।

डुंडी स्टेशन के संबंध में उन्होंने कहा कि यहां गुड्स शेड से एक लाइन को मुख्य रेल लाइन से जोड़ना है। इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। रेलवे के इस बयान से स्पष्ट है कि डुंडी में निर्माण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण परिचालन पहलू मुख्य लाइन से कनेक्टिविटी का है।

हालांकि, निर्माण कार्य शुरू होने और पूरा होने की निश्चित तारीख सामने नहीं आई है। ऐसे में व्यापारियों की नजर अब इस बात पर है कि रेलवे की तैयारियां जमीन पर कब दिखाई देंगी और स्टेशन पर लोडिंग-अनलोडिंग की सुविधाएं कब उपलब्ध हो सकेंगी।

समयबद्ध निर्माण से रेलवे और व्यापारियों दोनों को फायदा
डुंडी स्टेशन पर गुड्स शेड का निर्माण पूरा होने से खाद्यान्न परिवहन से जुड़े व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों को सुविधा मिलने की उम्मीद है। व्यवस्थित प्लेटफार्म और शेड उपलब्ध होने से माल चढ़ाने-उतारने की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सकता है। साथ ही, रेलवे को भी इस स्टेशन से माल लदान बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।

फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत निर्माण की स्थिति स्पष्ट करने, काम शुरू करने की समयसीमा तय करने और तब तक वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करने की है। जबलपुर रेल मंडल में माल परिवहन की संभावनाओं को मजबूत करने के लिए जरूरी है कि स्वीकृत बुनियादी ढांचा समय पर तैयार हो। डुंडी में गुड्स शेड की सुविधा कब तक उपलब्ध होगी, इसका जवाब अब रेलवे प्रशासन की अगली कार्रवाई से ही मिलेगा।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-