नज़रिया. नए कृषि क़ानूनों को रद्द करवाने के लिए दिल्ली सीमा पर जारी कृषि आंदोलन की दशा और दिशा बदल रही है. पंजाब चुनाव के परिणामों से किसान उत्साहित हैं और किसानों को नज़रअंदाज़ करने के कारण मोदी सरकार से नाराज़ किसान अब चुनावी राज्यों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं.
खबर है कि अब जनता को जागरूक करने और बीजेपी का किसान विरोधी चेहरा दिखाने के लिए आंदोलन कर रहे किसान नेता राकेश टिकैत, किसानों को लेकर पश्चिम बंगाल में महापंचायत करने जा रहे हैं.
याद रहे, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव करीब हैं और हर ओर से परेशान बीजेपी को पश्चिम बंगाल से बहुत उम्मीदें हैं, क्योंकि एक तो, लंबे समय से वहां टीएमसी की ममता सरकार है, जिसके कारण सत्ता विरोधी मानसिकता का लाभ बीजेपी को मिल सकता है और दूसरा, बंगाल के लोगों ने अभी तक बीजेपी का शासन नहीं देखा है, लिहाजा उन्हें अच्छे दिनों के सपने दिखाना आसान है.
यदि किसान बंगाल चुनाव में जाते हैं, तो इसका नुकसान किसे होगा, इस सवाल को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
इसका सबसे ज्यादा नुकसान बीजेपी को होगा, तो थोड़ा नुकसान टीएमसी का भी होगा.
देखना दिलचस्प होगा कि किसान आंदोलनकारियों की पश्चिम बंगाल चुनाव में मौजूदगी क्या असर दिखाती है?
पश्चिम बंगाल चुनाव- अभी तो सर्वे में टीएमसी आगे है, चुनाव आते-आते बीजेपी आगे हो जाएगी?
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-पंजाब निकाय चुनावों से कांग्रेस खुश, बादल-देओल की सीट पर कांग्रेसी परचम, किसान आंदोलन का नजर आया प्रभाव
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