रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए बिजली कंपनी के पूर्व जेई को चार साल की जेल, लोकायुक्त अदालत ने सुनाई सजा

रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए बिजली कंपनी के पूर्व जेई को चार साल की जेल, लोकायुक्त अदालत ने सुनाई सजा

प्रेषित समय :20:39:54 PM / Mon, Jun 29th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर। भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए लोकायुक्त की विशेष अदालत ने मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता (जेई) कमलेश कसेरा को रिश्वतखोरी के मामले में दोषी करार देते हुए चार वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला उन सरकारी अधिकारियों के लिए भी कड़ा संदेश माना जा रहा है, जो अपने पद का दुरुपयोग कर आम नागरिकों से अवैध वसूली करते हैं। विशेष न्यायाधीश मनीष सिंह ठाकुर की अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों को विश्वसनीय मानते हुए आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराया। अदालत के फैसले के बाद आरोपी को निर्धारित सजा भुगतने के लिए जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

मामले की सुनवाई के दौरान लोकायुक्त संगठन की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रशांत शुक्ला ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन ने अदालत के समक्ष ट्रैप कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज, वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट, स्वतंत्र गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपी ने शिकायतकर्ता से रिश्वत की मांग की थी और उसे स्वीकार भी किया था।

अभियोजन के अनुसार पूरा मामला वर्ष 2021 का है। शिकायतकर्ता सतीश चंद्र वंशकार ने 18 फरवरी 2021 को लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनके भाई की किराना दुकान पर बिजली चोरी का प्रकरण बनाया गया था। आरोप था कि इस कार्रवाई को समाप्त करने और प्रकरण में राहत देने के बदले तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता कमलेश कसेरा ने 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि आरोपी पहले ही पांच हजार रुपये ले चुका है और शेष पांच हजार रुपये बाद में देने के लिए दबाव बना रहा है।

शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने पूरे मामले का गोपनीय सत्यापन कराया। जांच के दौरान शिकायत सही पाए जाने पर ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई गई। तय रणनीति के तहत शिकायतकर्ता को रासायनिक पाउडर लगे नोट दिए गए और आरोपी से संपर्क करने के लिए भेजा गया। लोकायुक्त की टीम पहले से ही आसपास मौजूद रही और पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी गई।

22 फरवरी 2021 को कांचघर स्थित मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यालय में शिकायतकर्ता ने आरोपी को शेष पांच हजार रुपये दिए। जैसे ही आरोपी ने रिश्वत की राशि स्वीकार कर उसे अपने पर्स में रखा, पहले से तैनात लोकायुक्त टीम ने तत्काल कार्यालय में प्रवेश कर उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान रिश्वत के नोट आरोपी के पर्स से बरामद किए गए और मौके पर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।

ट्रैप कार्रवाई के बाद वैज्ञानिक परीक्षण भी कराया गया। आरोपी के हाथों और उसके पर्स को सोडियम कार्बोनेट के घोल से धुलवाया गया। परीक्षण के दौरान घोल का रंग गुलाबी हो गया, जो इस बात का वैज्ञानिक प्रमाण माना जाता है कि आरोपी ने रिश्वत के लिए चिन्हित नोटों को छुआ था। इस परीक्षण रिपोर्ट को भी अभियोजन ने अदालत में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त ट्रैप पंचनामा, जब्ती दस्तावेज, स्वतंत्र गवाहों के बयान और जांच अधिकारी की गवाही ने भी अभियोजन के मामले को मजबूत बनाया।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी को निर्दोष साबित करने का प्रयास किया, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद माना कि रिश्वत मांगने और राशि स्वीकार करने के आरोप संदेह से परे सिद्ध हो चुके हैं। अदालत ने कहा कि लोक सेवकों से अपेक्षा की जाती है कि वे निष्पक्षता और ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करें, लेकिन जब कोई अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर आम नागरिकों से अवैध धन की मांग करता है तो वह न केवल कानून का उल्लंघन करता है, बल्कि शासन व्यवस्था में जनता के विश्वास को भी कमजोर करता है।

अदालत ने आरोपी कमलेश कसेरा को चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाने के साथ 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में कठोर दंड ही ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण का माध्यम बन सकता है। यदि आरोपी अर्थदंड जमा नहीं करता है तो उसे नियमानुसार अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।

इस फैसले को भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रही कानूनी कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोकायुक्त संगठन का कहना है कि सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी की शिकायत मिलने पर प्रत्येक मामले का निष्पक्ष सत्यापन किया जाता है और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर विधि सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी किसी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है तो उसकी सूचना तत्काल लोकायुक्त को दें, ताकि दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

लोकायुक्त अदालत का यह निर्णय स्पष्ट संकेत देता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कानून अपना काम कर रहा है और वर्षों बाद भी दोषियों को न्यायालय के समक्ष जवाबदेह होना पड़ता है। सरकारी सेवा में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए ऐसे निर्णय भविष्य में भी निवारक प्रभाव छोड़ेंगे और ईमानदार प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगे।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-