बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी पासपोर्ट मामले में ग्वालियर पुलिस की भूमिका भी जांच के घेरे में, एसटीएफ ने खंगाले रिकॉर्ड

बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी पासपोर्ट मामले में ग्वालियर पुलिस की भूमिका भी जांच के घेरे में, एसटीएफ ने खंगाले रिकॉर्ड

प्रेषित समय :20:11:29 PM / Wed, Sep 9th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ग्वालियर. बांग्लादेशी नागरिकों को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हिंदू नाम से भारतीय पासपोर्ट जारी होने के मामले में जांच अब केवल पासपोर्ट हासिल करने वाले संदिग्धों तक सीमित नहीं रही है. इस पूरे प्रकरण में पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी जांच के केंद्र में आ गई है. ग्वालियर के डबरा थाने से शुरू हुई सत्यापन प्रक्रिया एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल तक पहुंची और इसके बाद संबंधित दस्तावेज पासपोर्ट सेवा केंद्र भेजे गए. अब स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरी प्रक्रिया में कथित फर्जी दस्तावेज और गलत पहचान आखिर किस स्तर पर नहीं पकड़ी गई.

एसटीएफ की टीम मंगलवार को ग्वालियर एसपी कार्यालय पहुंची और पासपोर्ट से जुड़े रिकॉर्ड जुटाए. टीम दस्तावेजों की पड़ताल के साथ यह भी देख रही है कि पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान आवेदकों की पहचान और पते का भौतिक सत्यापन किस आधार पर किया गया था. जांच का एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि थाना स्तर से क्लियर रिपोर्ट भेजे जाने के बाद एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल में दस्तावेजों की स्क्रूटनी किस तरह की गई.

डबरा थाने से शुरू हुई थी सत्यापन की प्रक्रिया
जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार संदिग्ध पासपोर्ट के लिए पुलिस वेरिफिकेशन डबरा थाने के स्तर से किया गया था. उस अवधि में विनायक शुक्ला डबरा थाना प्रभारी के पद पर थे. वर्तमान में वे दतिया जिले में एसडीओपी बड़ौनी के पद पर पदस्थ हैं. थाना क्षेत्र में संबंधित आवेदकों के पते और पहचान के भौतिक सत्यापन की जिम्मेदारी बीट स्तर पर थी.

उस समय डबरा थाने के बीट प्रभारी भूपेंद्र गुर्जर थे. बताया जा रहा है कि बीट प्रभारी ने आवेदकों के बताए गए पते और पहचान का मौके पर सत्यापन कर रिपोर्ट तैयार की थी. इसी रिपोर्ट के आधार पर थाना स्तर से पासपोर्ट के लिए पुलिस क्लियरेंस दी गई और इसे आगे एसपी कार्यालय भेजा गया.

अब एसटीएफ का मुख्य सवाल यही है कि बीट प्रभारी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट वास्तव में किस आधार पर तैयार हुई. क्या आवेदकों के पते पर जाकर उनका भौतिक सत्यापन किया गया था या दस्तावेजों के आधार पर ही रिपोर्ट तैयार कर दी गई? एसटीएफ इस बिंदु पर रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के बयान के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है.

एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल की भूमिका भी जांच में
थाना स्तर से पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल में पहुंची थी. यहां दस्तावेजों और पुलिस रिपोर्ट की स्क्रूटनी के बाद प्रकरण पासपोर्ट सेवा केंद्र तक गया. अब जांच एजेंसी इस पूरी कड़ी को जोड़कर देख रही है.

एसटीएफ यह पता कर रही है कि थाना स्तर से भेजी गई रिपोर्ट में ऐसी कौन-कौन सी जानकारियां थीं, जिनके आधार पर पासपोर्ट प्रक्रिया आगे बढ़ी. यदि दस्तावेजों में कोई विसंगति थी तो वह एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल की जांच में क्यों सामने नहीं आई. इसके साथ ही पासपोर्ट सेवा केंद्र के स्तर पर हुई जांच की प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में लिया गया है.

जांच एजेंसी के लिए यह महत्वपूर्ण है कि एक व्यक्ति को भारतीय नागरिक के रूप में स्थापित करने वाली अलग-अलग प्रक्रियाओं में दस्तावेजों की विश्वसनीयता की जांच किस स्तर पर हुई. पुलिस सत्यापन, जिला स्तर की स्क्रूटनी और पासपोर्ट जारी होने की प्रक्रिया के बीच यदि कोई खामी रही है तो उसका पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं.

सात राज्यों तक पहुंची संदिग्धों की तलाश
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एसटीएफ की जांच का दायरा ग्वालियर तक सीमित नहीं है. फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने वाले संदिग्धों की तलाश में सात राज्यों में टीमें भेजी गई हैं. जांच में कुछ संदिग्धों के भारत से बाहर निकलकर थाईलैंड पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है.

बताया जा रहा है कि इनमें कुछ संदिग्ध बौद्ध भिक्षु के रूप में रह रहे हैं. हालांकि विदेश में मौजूद संदिग्धों के संबंध में जांच एजेंसी उपलब्ध जानकारी और रिकॉर्ड का सत्यापन कर रही है. भारत में मौजूद अन्य संदिग्धों की तलाश भी जारी है.

एसटीएफ अब यह भी जोड़ने का प्रयास कर रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने, पहचान बदलने, पुलिस सत्यापन हासिल करने और पासपोर्ट प्राप्त करने की प्रक्रिया में कहीं कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था. अलग-अलग स्थानों से मिले दस्तावेज और रिकॉर्ड की कड़ियों को जोड़कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है.

फर्जी पासपोर्ट रद्द कराने की तैयारी
जांच में जिन पासपोर्ट को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया हुआ पाया जाएगा, उन्हें रद्द कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी. एसटीएफ के अनुसार ऐसे मामलों में विदेश मंत्रालय को पत्र भेजा जाएगा, ताकि संबंधित पासपोर्ट को निरस्त कराया जा सके.

जांच एजेंसी की चिंता उन संदिग्धों को लेकर भी है, जो अभी भारत में मौजूद हैं. फर्जी दस्तावेजों से तैयार पासपोर्ट का इस्तेमाल कर वे देश से बाहर न निकल सकें, इसके लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है. वहीं जो संदिग्ध विदेश पहुंच चुके हैं, उनके संबंध में आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी. जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी कराने की कार्रवाई भी आगे बढ़ाई जा सकती है.

अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान होंगे दर्ज
एसटीएफ अब उन सभी लोगों से पूछताछ की तैयारी कर रही है, जिनकी भूमिका पुलिस वेरिफिकेशन और पासपोर्ट प्रक्रिया में रही. तत्कालीन डबरा थाना प्रभारी विनायक शुक्ला और तत्कालीन बीट प्रभारी भूपेंद्र गुर्जर को नोटिस देकर उनके बयान दर्ज किए जाने की बात कही गई है.

इसके अलावा एसपी कार्यालय की पासपोर्ट सेल से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से भी जानकारी ली जाएगी. पासपोर्ट सेवा केंद्र के संबंधित अधिकारियों की भूमिका और उनके स्तर पर हुई दस्तावेजी जांच को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है.

एसटीएफ यह स्पष्ट करना चाहती है कि यदि आवेदकों की पहचान और पते का भौतिक सत्यापन किया गया था तो उसकी पुष्टि करने वाले दस्तावेज और रिकॉर्ड क्या हैं. यदि सत्यापन रिपोर्ट में गलत जानकारी दर्ज की गई थी तो उसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है, यह भी जांच के बाद सामने आएगा.

पुलिस सत्यापन पर उठे सवालों के जवाब तलाश रही एसटीएफ
इस पूरे मामले ने पासपोर्ट जारी करने से पहले होने वाली पुलिस वेरिफिकेशन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं. सामान्य तौर पर आवेदक की पहचान और उसके पते की पुष्टि के लिए पुलिस स्तर पर सत्यापन किया जाता है. इसके बाद रिपोर्ट संबंधित स्तर पर भेजी जाती है. ऐसे में यदि किसी विदेशी नागरिक ने कथित तौर पर भारतीय पहचान के आधार पर पासपोर्ट हासिल कर लिया, तो जांच का स्वाभाविक केंद्र यह बन गया है कि सत्यापन के दौरान उसकी वास्तविक पहचान सामने क्यों नहीं आई.

एसटीएफ इसी सवाल का जवाब रिकॉर्ड के जरिए तलाश रही है. फिलहाल जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए किसी अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है. एजेंसी दस्तावेज, पुलिस रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के बयान जुटाकर पूरे घटनाक्रम की कड़ी तैयार कर रही है.

दोषियों पर कार्रवाई का एसटीएफ का दावा
एसटीएफ के पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह भदौरिया के अनुसार मामले में किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. वहीं मध्य प्रदेश एसटीएफ के एडीजी डी. श्रीनिवास वर्मा ने कहा कि जाली दस्तावेजों से पासपोर्ट बनवाने वालों की तलाश देशभर में की जा रही है. पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच कराई जा रही है और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

अब जांच की दिशा दो स्तरों पर आगे बढ़ रही है. एक ओर उन लोगों की तलाश की जा रही है, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारतीय पहचान और पासपोर्ट हासिल किया. दूसरी ओर डबरा थाने से लेकर एसपी कार्यालय और आगे पासपोर्ट सेवा केंद्र तक पहुंची प्रक्रिया की जांच की जा रही है. एसटीएफ की पड़ताल से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इस पूरे मामले में दस्तावेजी फर्जीवाड़ा किस स्तर पर हुआ और सरकारी सत्यापन की कई परतों को पार कर संदिग्धों के लिए भारतीय पासपोर्ट हासिल करना कैसे संभव हुआ.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-