जबलपुर से सेना को मिलेगी नई ताकत, 46 किलोमीटर तक मार करेगी 52 कैलिबर धनुष

जबलपुर से सेना को मिलेगी नई ताकत, 46 किलोमीटर तक मार करेगी 52 कैलिबर धनुष

प्रेषित समय :20:11:13 PM / Mon, Sep 14th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर। देश की रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री एक बार फिर बड़ी भूमिका निभाने जा रही है। भारतीय सेना के लिए तैयार की जा रही स्वदेशी धनुष तोप अब नए और अधिक आधुनिक अवतार में सामने आएगी। इसकी मारक क्षमता बढ़ाने के साथ ही तकनीकी प्रणाली को भी उन्नत किया जा रहा है। नए संस्करण की सबसे बड़ी खासियत इसकी बढ़ी हुई दूरी होगी। वर्तमान धनुष की लगभग 38 किलोमीटर की मारक क्षमता को बढ़ाकर 44 से 46 किलोमीटर तक करने की तैयारी है। इसके साथ ही 45 कैलिबर वाली धनुष तोप को 52 कैलिबर के आधुनिक संस्करण में विकसित किया जा रहा है।

                                                         जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री में नए संस्करण की पहली खेप के तहत 12 तोप तैयार की जा रही हैं। सेना को कुल 62 आधुनिक धनुष तोप उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इन तोपों की आपूर्ति अलग-अलग खेप में की जाएगी। रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में यह परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि नई धनुष में मारक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ स्वदेशी तकनीक और भारतीय इलेक्ट्रॉनिक घटकों के इस्तेमाल पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
62 आधुनिक तोपों की आपूर्ति का लक्ष्य
नई धनुष परियोजना के तहत गन कैरिज फैक्ट्री को सेना के लिए कुल 62 आधुनिक तोप तैयार करनी हैं। पहली खेप में 12 तोपों का निर्माण किया जा रहा है। इसके बाद निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अन्य खेप तैयार कर सेना को उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे भारतीय सेना के तोपखाना बेड़े में आधुनिक और अधिक सक्षम स्वदेशी तोपों की संख्या बढ़ेगी। जबलपुर लंबे समय से देश के रक्षा उत्पादन के मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान रखता है। गन कैरिज फैक्ट्री में तोपों के निर्माण और उनके आधुनिकीकरण का लंबा अनुभव रहा है। धनुष परियोजना इसी तकनीकी क्षमता का परिणाम है। समय के साथ इसमें कई बदलाव किए गए और इसे आधुनिक युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया गया।

38 से बढ़कर 46 किलोमीटर तक होगी मारक क्षमता
नई धनुष की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी बढ़ी हुई मारक क्षमता है। मौजूदा धनुष की रेंज लगभग 38 किलोमीटर है। नए 52 कैलिबर संस्करण में इसे बढ़ाकर 44 से 46 किलोमीटर तक किए जाने की तैयारी है। इसका सीधा अर्थ यह है कि तोप पहले की तुलना में अधिक दूरी पर स्थित लक्ष्य तक प्रभावी तरीके से प्रहार करने में सक्षम होगी। रक्षा क्षेत्र में तोपों की क्षमता का आकलन केवल उनकी मारक दूरी से नहीं किया जाता, बल्कि सटीकता, लक्ष्य निर्धारण, तैनाती की गति, संचार प्रणाली और अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में संचालन की क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है। नए धनुष संस्करण में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तकनीकी उन्नयन किया जा रहा है।
45 कैलिबर से 52 कैलिबर की ओर बढ़ेगा धनुष
धनुष के नए संस्करण को 52 कैलिबर में विकसित किया जा रहा है। वर्तमान संस्करण 45 कैलिबर का है। कैलिबर में यह बदलाव तोप की समग्र क्षमता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके साथ ही इसकी फायरिंग क्षमता और दूरी में भी वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। गन कैरिज फैक्ट्री में धनुष पर लगातार तकनीकी काम किया गया है। वर्ष 2010 के बाद से इसके विकास और सुधार की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अलग-अलग चरणों में इसमें तकनीकी बदलाव किए गए और इसे भारतीय सेना की जरूरतों के अनुरूप बेहतर बनाया गया। अब इसका नया संस्करण आधुनिक युद्धक्षेत्र की बदलती जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जा रहा है।
विदेशी चिप की जगह भारतीय तकनीक
नए धनुष की खासियत केवल इसकी बढ़ी हुई मारक क्षमता नहीं होगी। इसके निर्माण में स्वदेशी तकनीक के इस्तेमाल को भी प्राथमिकता दी जा रही है। अब तक इस्तेमाल की जा रही इजराइल निर्मित चिप के स्थान पर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की निर्मित चिप का उपयोग किए जाने की योजना है। रक्षा उपकरणों में इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में महत्वपूर्ण प्रणालियों के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। धनुष के नए संस्करण में भारतीय घटकों के इस्तेमाल से स्वदेशीकरण को बढ़ावा मिलेगा और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ेगा।
डिजिटल प्रणाली से बढ़ेगी सटीकता
नए संस्करण में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल प्रणालियों को शामिल किया जा रहा है। इसमें उन्नत रेडियो फ्रीक्वेंसी और सक्रिय रडार चिप, डिजिटल फायर कंट्रोल प्रणाली, रडार से जुड़ी संवेदन प्रणाली, जीपीएस आधारित स्वचालित दिशा निर्धारण और ऑनबोर्ड बैलिस्टिक कंप्यूटर जैसी तकनीकें शामिल होंगी। इन तकनीकों का उद्देश्य तोप की संचालन क्षमता और लक्ष्य निर्धारण को अधिक प्रभावी बनाना है। जीपीएस आधारित ऑटो-लेइंग प्रणाली से तोप को निर्धारित दिशा में स्थापित करने की प्रक्रिया अधिक आधुनिक होगी। वहीं ऑनबोर्ड बैलिस्टिक कंप्यूटर फायरिंग से संबंधित गणनाओं में सहायता करेगा। डिजिटल फायर कंट्रोल और सेंसर आधारित प्रणालियां युद्धक्षेत्र में उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता बढ़ा सकती हैं।
पहाड़ी क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी होगी नई धनुष
भारत की भौगोलिक परिस्थितियां अलग-अलग प्रकार की हैं। मैदानी इलाकों के साथ देश की सीमाओं पर ऊंचे और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र भी हैं। ऐसे इलाकों में भारी हथियारों की तैनाती और संचालन सामान्य परिस्थितियों से अलग चुनौतीपूर्ण होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए धनुष के नए संस्करण में माउंटेन गन सिस्टम से जुड़ी क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे पहाड़ी युद्धक्षेत्रों में तोप की उपयोगिता बढ़ सकती है। सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी आधुनिक तोप के लिए केवल लंबी दूरी तक प्रहार करने की क्षमता पर्याप्त नहीं होती, बल्कि उसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में तेजी से तैनात और संचालित करना भी जरूरी होता है। नए धनुष में इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं।
बोफोर्स के आधार से स्वदेशी धनुष तक का सफर
धनुष तोप को चर्चित बोफोर्स तोप के तकनीकी आधार पर विकसित किए गए स्वदेशी संस्करण के रूप में देखा जाता है। हालांकि समय के साथ इसमें व्यापक तकनीकी बदलाव किए गए हैं। इसका विकास भारतीय रक्षा उत्पादन क्षमता और देश में तोप निर्माण के अनुभव का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री ने धनुष को लगातार बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शुरुआती चरण से लेकर आधुनिक संस्करण तक पहुंचने में कई तकनीकी परीक्षण और सुधार हुए। अब 52 कैलिबर के नए संस्करण के जरिए इसकी क्षमता को एक और स्तर तक ले जाने की तैयारी है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा महत्व
धनुष तोप की चर्चा हाल के सैन्य अभियानों के संदर्भ में भी हुई है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्वदेशी हथियार प्रणालियों की क्षमता और उपयोग को लेकर देशभर में चर्चा हुई। इसी पृष्ठभूमि में धनुष के आधुनिक संस्करण को विकसित करने का काम और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि किसी हथियार की वास्तविक क्षमता का आकलन उसके परीक्षण, तकनीकी मानकों और सेना के परिचालन अनुभव के आधार पर ही किया जाता है, लेकिन स्वदेशी तोप प्रणालियों का लगातार उन्नयन भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता के विस्तार को दर्शाता है।
आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम
धनुष का नया संस्करण भारतीय रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण की बढ़ती भूमिका को भी सामने लाता है। मारक क्षमता बढ़ाने से लेकर इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों और चिप तक में भारतीय तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में किए जा रहे प्रयास महत्वपूर्ण हैं। जबलपुर में तैयार हो रही ये 62 आधुनिक तोपें केवल सेना के तोपखाने में नई क्षमता नहीं जोड़ेंगी, बल्कि देश के रक्षा उत्पादन क्षेत्र में स्थानीय तकनीकी क्षमता को भी मजबूत करेंगी। 52 कैलिबर, 44 से 46 किलोमीटर तक की प्रस्तावित मारक क्षमता, डिजिटल फायर कंट्रोल, जीपीएस आधारित ऑटो-लेइंग और स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक घटकों से लैस धनुष का नया संस्करण भारतीय सेना की जरूरतों के अनुरूप एक महत्वपूर्ण उन्नयन के रूप में सामने आ रहा है। गन कैरिज फैक्ट्री में पहली खेप की 12 तोपों का निर्माण इस परियोजना की अगली कड़ी है। इसके बाद निर्धारित लक्ष्य के अनुसार अन्य तोपें तैयार की जाएंगी। इस तरह जबलपुर से निकलने वाला नया धनुष देश की रक्षा क्षमता में अपनी नई पहचान जोड़ने की तैयारी में है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-