जबलपुर। शहर में तेजी से बढ़ रहे बैटरी चालित ई-रिक्शों और उनसे उत्पन्न हो रही यातायात अव्यवस्था को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत बैटरी चालित ई-रिक्शा तथा अन्य वाहनों को दी गई छूट के संबंध में केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब तलब किया है। अदालत ने संकेत दिए कि शहरों में ई-रिक्शों की लगातार बढ़ती संख्या और उससे बिगड़ रही यातायात व्यवस्था को देखते हुए अब इस नीति की व्यापक समीक्षा आवश्यक हो गई है।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को अंतिम अवसर देते हुए चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि बैटरी चालित वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसका सीधा असर शहरों की यातायात व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन पर दिखाई दे रहा है। ऐसे में यह विचार करना आवश्यक है कि मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत दी गई छूट वर्तमान परिस्थितियों में कितनी व्यावहारिक और प्रभावी है।
युगलपीठ ने केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित सहायक सॉलिसिटर जनरल को निर्देश दिए कि वे इस विषय में केंद्र सरकार से स्पष्ट निर्देश प्राप्त कर अगली सुनवाई में न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखें। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि आवश्यकता हो तो केंद्र सरकार बैटरी चालित ई-रिक्शों और अन्य वाहनों को दी गई छूट वापस लेने अथवा उसके प्रावधानों की पुनः समीक्षा करने पर भी विचार कर सकती है।
मामले की सुनवाई जबलपुर निवासी डॉ. पी.जी. नाजपांडे और रजत भार्गव द्वारा दायर जनहित याचिका पर की जा रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश कुमार उपाध्याय ने न्यायालय को बताया कि बिना प्रभावी नियमन के बड़ी संख्या में संचालित हो रहे ई-रिक्शे यातायात सुरक्षा, सड़क अनुशासन और प्रशासनिक नियंत्रण के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। कई स्थानों पर इनके कारण जाम की स्थिति बनती है और सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ रही है।
याचिका में यह भी कहा गया कि वर्तमान व्यवस्था में ई-रिक्शों के संचालन के लिए पर्याप्त नियंत्रण और निगरानी तंत्र का अभाव है। परिणामस्वरूप अनेक वाहन बिना समुचित अनुशासन के सड़कों पर संचालित हो रहे हैं, जिससे आम नागरिकों के साथ-साथ अन्य वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय से इस विषय में प्रभावी दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है तथा स्पष्ट किया है कि इस विषय पर सभी पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। अदालत का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से बैटरी चालित वाहनों को प्रोत्साहित करना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ यातायात सुरक्षा और सड़क अनुशासन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-





